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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 8 मार्च। विधानसभा में मंगलवार को सरकारी नियुक्तियों, और कर्मचारियों के नियमितिकरण को लेकर जमकर बहस हुई। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया, और सदन से वाकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने लिखित जवाब का जिक्र करते हुए कहा कि 20 हजार 294 लोगों को सरकारी नौकरी देने की बात कही गई है। लेकिन सरकारी होर्डिंग्स में कहा गया कि 4 लाख 65 हजार से अधिक को नौकरी दी गई है। एक कार्यक्रम में सीएम ने 5 लाख नौकरी देने की बात कही गई है। उन्होंने इस अंतर को लेकर जानकारी चाही।
सीएम ने अपने जवाब में कहा कि नौकरी केवल सरकारी ही नहीं होती है। रोजगार केवल शासकीय नहीं होता। अब तक 20 हजार 291 को सरकारी नौकरी दी गई है। कौशिक ने कर्मचारियों के नियमितिकरण को लेकर सवाल पूछे और कहा कि सरकार ने जन घोषणा पत्र को आत्मसात किया है। इसके लिए कमेटी भी बनाई गई थी, लेकिन कमेटी की 9 जनवरी 2020 के बाद कोई बैठक नहीं हुई। इस पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि वाणिज्य-उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी, इसमें विधि पंचायत और वित्त विभाग के सचिव हैं।
सीएम ने कहा कि कमेटी की 18 जनवरी 2019 को बैठक हुई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा हुई है, जिसमें कहा गया है कि एक बार ही नियमित किया जा सकता है। इस पर विधि विभाग, और एजी से अभिमत मांगा गया है। साथ ही सभी विभागों से कर्मचारियों को लेकर जानकारी बुलाई गई है।
उन्होंने कहा कि 37 विभागों से जानकारी आ गई है, बाकी विभागों से जानकारी आनी बाकी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनघोषणा पत्र में कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा किया गया था, लेकिन तीन साल बीत गए, और अब तक कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा सका है। विपक्षी सदस्यों ने इसको लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया, जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने प्रतिवाद किया है। सीएम ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आपके नेता टं्रप में बिजी थे। नमस्ते टं्रप के चक्कर में पूरा देश फंसा, कईयों की जान चली गई। छत्तीसगढ़ सरकार कर्मचारियों को रोजगार देने की दिशा में काम कर रही है। हमने कमेटी बनाई है, और उसकी अनुशंसा पर कार्रवाई की जाएगी।


