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पानी की किल्लत और महंगे खानपान से बढ़ी दुश्वारियों के बीच दहशत में जिंदगी
प्रदीप मेश्राम
राजनांदगांव, 26 फरवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। रूस के यूक्रेन पर ताबड़तोड़ हमले में राजनांदगांव के मानपुर की एक मेडिकल छात्रा युद्ध से पनपे दुश्वारियों के बीच मेट्रो ट्रेन के बंकर के नीचे पिछले कुछ दिनों से छुपी हुई है। रूस की ओर से जंग का सामना कर रहे यूक्रेन के दूसरे बड़े शहर खारकीव में भी हालात बिगड़ गए हैं। राजनांदगांव के मानपुर से सटे खडग़ांव की 19 वर्षीय आयशा जार्ज भी देशभर के हजारभर से अधिक सहपाठियों के साथ बंकर में छुपी हुई है।
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दूसरे वर्ष की मेडिकल छात्रा आयशा ने 2021 में यूक्रेन में चिकित्सकीय शिक्षा के लिए दाखिला लिया था। दाखिले के दूसरे साल के बीच में रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई छिड़ गई। इस लड़ाई से खारकीव शहर भी धमाकों को सह रहा है। वीएन खराजीना खारकीव नेशनल युनिवर्सिटी की छात्रा आयशा तकरीबन 5 दिनों से नोवोकोवा मेट्रो के बंकर में अस्थाई ठिकाना बनाए हुई है। आयशा की मां खडग़ांव चिकित्सालय में बतौर स्टॉफ नर्स पदस्थ हैं। वहीं उनके पिता जार्ज थॉमस खडग़ांव पंचायत के उपसरपंच हैं। युद्ध का ऐलान के बाद आयशा के कॉलेज प्रबंधन ने फौरन छात्रों को हॉस्टल छोडऩे का फरमान जारी कर दिया। हॉस्टल खाली करने के बाद से आयशा समेत छत्तीसगढ़ और देश के कई राज्यों के छात्र बेसहारा हो गए। विदेशी छात्रों की सुरक्षा को लेकर यूक्रेन सरकार ने हाथ खड़ा कर दिया है। रूस से निपटने के लिए यूक्रेन का सिर्फ सीमा पर ध्यान है। आयशा के माता-पिता इंटरनेट के जरिये संपर्क में है।
इस संबंध में ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में छात्रा की मां हेलन जार्ज ने बताया कि खारकीव शहर भी रूसी हमले से तबाह हो रहा है। उनकी बेटी फिलहाल मेट्रो ट्रेन के बंकर में शरण ली हुई है। मां का कहना है कि पानी की किल्लत वहां ठहरे छात्र-छात्राओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। खानपान के सामान की खरीदी के लिए बाहर निकलना खुद को युद्ध में झोंकने जैसा हो गया है।
युद्ध की मार से मामूली वस्तुएं भी आसमानी दाम पर है। पानी के भाव भी युद्ध के चलते उछाल पर है। पानी की कमी विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है। माता-पिता ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य विदेशी अफसरों से मदद की गुहार लगाई है। इस बीच यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के फिलहाल टलने के आसार दिख रहे हैं। ऐसे में एमबीबीएस के विद्यार्थियों के लिए भी हालात जीवन-मरण जैसे दिख रहे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक युद्ध के हालात के मद्देनजर आयशा की 8 मार्च को वापसी थी। इससे पहले रूस ने हमला शुरू कर दिया। आयशा और अन्य स्वदेशी विद्यार्थी मुश्किल में पड़ गए हैं। इस संबंध में कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विद्यार्थियों की वापसी का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार सरकार के संपर्क में है। इस बीच परिजनों ने दिल्ली दूतावास में आयशा की वापसी के लिए पंजीयन भी करा दिया है। हालांकि परिजनों के लिए यह सुखद बात है कि वाट्सअप कॉलिंग से रोज बातचीत हो रही है। परिजनों ने आयशा के हवाले से बताया कि खारकीव शहर की ओर भी रूस की सेनाएं बढ़ रही है। विदेशी नागरिकों और छात्राओं को स्वदेश लौटने के लिए यूक्रेन के सीमावर्ती देशों का रूख करना पड़ रहा है। जिसमें पोलैंड और दूसरे सरहदी देश हैं, जहां से विमान सेवाएं चल रही है। यहां तक पहुंचना काफी महंगा भी है। ऐसे में मेडिकल छात्राओं के लिए युद्ध खत्म होने तक एक ही जगह रहने मजबूर हो रहे हैं।


