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नक्सल क्षेत्र कांकेर में नदी पुल की नींव
छोटाबेठिया से लौटकर प्रदीप मेश्राम की विशेष रिपोर्ट
रायपुर, 24 फरवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। कांकेर जिले के दक्षिण इलाके छोटाबेठिया से सटे बेचाघाट में बारिश के दौरान उफनती कोटरी नदी में जल्द ही एक बड़े पुल की नींव रखने के बाद जल्द ही अबूझमाड़ के लिए भी एक द्वार खुल जाएगा। कांकेर का यह हिस्सा अबूझमाड़ सीमा से लगा हुआ है। बेचाघाट में 9 करोड़ रुपए की लागत से शुरू होने वाले पुल निर्माण के लिए टेंडर भी हो गया है।
बेचाघाट से होकर कोटरी नदी इंद्रावती में जाकर समाहित होती है। बेचाघाट में नक्सलियों की अलग-अलग गतिविधियां होती है। बेचाघाट के दूसरे किनारे बसे गांवों में जाने के लिए बारिश का मौसम हमेशा घातक रहा है। बरसात के दौरान लोगों को आवाजाही के लिए नाव की मदद लेनी पड़ती है। इस पुल के भौगोलिक और सामाजिक नजरिये से कई फायदे हैं। पुल की कमी से बरसात के दिनों में विकास कार्य ठप हो जाता है। लंबे समय से बेचाघाट पुल की मांग होती रही है। पुल निर्माण के बाद कांकेर का यह हिस्सा नारायणपुर की सीमा से भी जुड़ जाएगा। पुल से भौगोलिक चुनौतियां भी कम होंगी। वहीं अबूझमाड़ के लिए यह पुल विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
वैसे छोटाबेठिया के कई गांवों में नक्सलियों की आमद रही है। नदी के दूसरे छोर में बसे कंदाड़ी, सितरम और सोनपुर इलाके में नक्सलियों का दबदबा है। नक्सलियों की आवाजाही ने इस इलाके में प्रशासन के रास्ते में अड़चनें पैदा की हैं। अब पुल निर्माण से विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी।
मिली जानकारी के मुताबिक 200 मीटर का एक पुल कोटरी नदी के दोनों किनारे को जोड़ देगा। बेचाघाट पुल पखांजूर, छोटाबेठिया और नारायणपुर के सोनपुर क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को भी भौगोलिक रूप से जोड़ेगा। तकरीबन 73 गांव को इस पुल से सुविधा मिलेगी।
अफसरों के मुताबिक लगभग एक लाख से अधिक की जनसंख्या के जीवन पर पुल निर्माण का सकारात्मक असर पड़ेगा। पुलिस के पास हमेशा दूसरे छोर में नक्सलियों के मीटिंग लेने और दूसरी गतिविधियां संचालित करने की खबरें आती रही हैं, लेकिन पुल के अभाव में नक्सली इस कटे हुए इलाके को पनाहगाह के रूप में देखते रहे हैं। पुल निर्माण के लिए लंबे समय से प्रशासनिक कवायद होती रही है, लेकिन सुरक्षा की कमी और विपरीत परिस्थितियों के कारण यह इलाका विकास से अछूता रहा है। अबूझमाड़ के लिहाज से भी इस पुल का निर्माण जरूरी है।

आईईडी ट्रेनिंग सेंटर के लिए इलाका कुख्यात
बेचाघाट के दूसरे छोर में कनेक्टिविटी नहीं होने का नक्सलियों ने हमेशा फायदा उठाया है। चर्चा है कि इस क्षेत्र के कई गांव में आईईडी ट्रेनिंग सेंटर चलाया जा रहा है। जिसमें नक्सलियों के इंटेलिजेंस के क्षेत्रीय प्रमुख शंकर राव की अक्सर उपस्थिति रही है। वह अपने शीर्ष नक्सल नेताओं को अपनी निगरानी में आवाजाही भी कराता रहा है। आईईडी ट्रेनिंग सेंटर के लिए अबूझमाड़ का घनघोर जंगल नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना रहा है। नक्सलियों के हार्डकोर ग्रुप विस्फोट करने के तरीके और पुलिस के हमले के जवाब देने के लिए इस इलाके में प्रशिक्षित होते हैं। बेचाघाट पुल निर्माण से स्वभाविक रूप से पुलिस की दखल बढ़ेगी। वहीं विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

बिना पुल हादसों का गवाह रहा कोटरी नदी
कोटरी नदी के किनारे बसे बेचाघाट के साथ-साथ आसपास के गांवों के लिए बारिश का मौसम आफत लेकर आता है। कोटरी नदी में पुल नहीं होने से लोगों को नाव की मदद लेनी पड़ती है। गैर प्रशिक्षित नाविक लोगों की जान संकट में डालकर नदी पार कराते हैं। इसके एवज में लोगों को रोजाना नाविक को पारिश्रमिक भी देना पड़ता है। पिछले साल उफनती नदी में एक नाव पलटने से कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं बमुश्किल लोगों की जान बची। कोटरी नदी इस इलाके की बड़ी नदी है। बरसात के लगभग 2 महीने तक नदी की धार तेज रहती है। वैसे नदी में पूरे साल पानी का बहाव रहता है। पुल नहीं होने के कारण लोगों को हर बारिश में जान जोखिम लेकर आवाजाही करनी पड़ती है। नदी का जलस्तर घटने के बाद लोग अस्थाई रपटे से आवाजाही करते हैं। बरसाती पानी की धार से रपटा बह जाता है।

बेचाघाट पुल क्षेत्रीय मांग- एसपी
कांकेर एसपी शलभ सिन्हा बेचाघाट पुल को क्षेत्र की विकास की लिहाज से अहम मानते हैं। उनका कहना है कि सालों पुरानी यह क्षेत्रीय मांग है। पुल निर्माण से अबूझमाड में भी विकास की संभावना बढ़ेगी। नारायणपुर से भी लोगों का संपर्क बढ़ेगा। एसपी का कहना है कि कोटरी नदी में पुल निर्माण एक तरह से इलाके के भविष्य को सुनहरा रूप देगा।


