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कोयलीबेड़ा के दुर्गम क्षेत्र भी विकास से जुड़े
कोयलीबेड़ा से लौटकर प्रदीप मेश्राम की विशेष रिपोर्ट
रायपुर, 23 फरवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। कांकेर जिला मुख्यालय से 140 किलोमीटर दूर कोयलीबेड़ा नक्सल उपद्रव का शिकार रहा है। नक्सली हिंसा की लगातार मार से कोयलीबेडा के अंदरूनी हिस्से में प्रशासन और पुलिस साझा कदम उठाकर स्थानीय आदिवासी लोगों के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा खड़ी कर रहे हैं। नक्सल मोर्चे पर तैनात कांकेर पुलिस ने नक्सलियों के उत्पात की परवाह छोड़ कोयबलीबेड़ा इलाके के कुख्यात नक्सली राजू सलामे के गांव तक सडक़ बिछा दी है। कंपनी नंबर 5 के कमांडर राजू सलामे के गांव तक सडक़ को नक्सलियों को जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। दस लाख का ईनामी नक्सली राजू सलामे आदिवासियों को सशस्त्र अंदाज में भय दिखाता रहा है।
अंतागढ़ पुलिस अनुभाग से कोयलीबेड़ा की दूरी महज 30 किलोमीटर की है, लेकिन इस इलाके में पुलिस और प्रशासन की पहुंच पिछले कुछ बरसों से बढ़ी है। अब इस इलाके में नक्सलियों के सरकार विरोधी नीतियों का दबी जुबां विरोध हो रहा है। लंबे समय से राजू सलामे की तलाश में पुलिस को कच्चे रास्ते से सफर तय करना पड़ता था। अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा के मुख्य मार्ग काफी चौड़ा है। इस रास्ते को भी पुलिस ने पैरामिलिट्री फोर्स के साथ घेरे रखा है। रात-दिन बीएसएफ के जवान भी इस मार्ग से गुजरने वालों की सघन जांच करते हैं। मुख्य मार्ग के बाद पुलिस ने कोयलीबेड़ा क्षेत्र के कमांडर और दूसरे दर्जे के नक्सलियों के गांव में सडक़ पहुंचाने का काम किया है।
मुठभेड़ स्थल पर बने कैम्प
नक्सलियों के चुनिंदा मुठभेड़ ठिकानों को पुलिस ने कैम्प में बदलकर लोगों के लिए सुरक्षा का माहौल बनाया है। बीएसएफ और डीएफ के साथ-साथ एसटीएफ और एसएसबी के जवान मुठभेड़ स्थलों पर तैनात हो गए हैं। कोयलीबेड़ा के हनुमान टेकरी, फांसीपुल समेत दूसरे अंधे मोड़ पर अब सामान्य आवाजाही हो रही है। इस मार्ग के सोलंगी में हुए मुठभेड़ में जवानों की शहादत भी हुई है। अब पुलिस ने ऐसे जगहों पर अपने बेसकैम्प खोलकर नक्सलियों को पीछे ढकेल दिया है। वर्ष 2008 और 2009 में हनुमान टेकरी में जिला पुलिस बल के दो सिपाही शहीद हुए थे। सोलंगी में हुए मुठभेड़ के बाद पुलिस ने भी अपनी ताकत बढ़ाई। पिछले कुछ बरसों में औसतन रोज होने वाली मुठभेड़ में भी गिरावट आई है।
पुल-पुलिया का बदला स्वरूप
कोयलीबेड़ा के मुख्य और अंदरूनी रास्तों में बने पुल-पुलियों को उड़ाकर नक्सली फोर्स के अंदर आने के मंसूबे पर पानी फेरते रहे हैं। कोयलीबेड़ा क्षेत्र के पुराने पुलों को नक्सलियों ने तबाह कर दिया था। अब पुलिस ने ऐसे पुल के निर्माण में सुरक्षा देकर उन्हें नया रूप दिया है। पुलिस के लिए यह काम जोखिम भरा रहा है।
पिछड़ापन दूर करना और युवाओं को मुख्यधारा में लाना मकसद-एसपी
कांकेर एसपी शलभ सिन्हा का मानना है कि नक्सलियों की विचारधारा का, बढ़ते विकास की रफ्तार ने पर्दाफाश किया है। स्थानीय पिछड़ापन नक्सलियों के विकास विरोधी होने का गवाह है। शिक्षित युवाओं को मुख्यधारा में लाना पुलिस का मकसद है। युवाओं के लिए इलाके में रोजगार की भरपूर संभावना है। सडक़ों के निरंतर फैलते जाल से युवाओं का नक्सल पंथ से मोह भंग हुआ है। यह अच्छी बात है कि युवाओं ने अपना भविष्य चुनने के लिए लोकतंत्र पर भरोसा बढ़ाया है। आने वाले दिनों में यही युवा क्षेत्र का अलग-अलग क्षेत्रों में नाम रौशन करेंगे।


