कोण्डागांव

रॉट आयरन निर्माण प्रक्रिया से रूबरू हुई जयपुर की टीम
07-May-2026 2:51 PM
रॉट आयरन निर्माण प्रक्रिया से  रूबरू हुई जयपुर की टीम

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोण्डागांव, 7 मई। कोण्डागांव जिले की पारंपरिक शिल्पकला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत राजस्थान की प्रतिष्ठित संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिजाइन जयपुर के विशेषज्ञों ने कोण्डागांव के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर यहां के शिल्पकारों के कौशल को नजदीक से समझा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालना तथा शिल्पकारों को बेहतर विपणन अवसर उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञ गांव-गांव पहुंचकर शिल्पकारों से सीधे संवाद करते हुए उनके कार्यों का अवलोकन कर सराहना की।

ग्राम करनपुर में ढोकरा शिल्प की जटिल निर्माण प्रक्रिया ने विशेषज्ञों को विशेष रूप से प्रभावित किया। वहीं ग्राम छोटेराजपुर एवं कुसमा में रॉट आयरन शिल्पकला को बारीकी से समझते हुए संबंधित समूहों से चर्चा की गई और बाजार से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस दौरान राज्य कार्यालय से सहायक राज्य कार्यक्रम प्रबंधक मनोज मिश्रा के नेतृत्व में जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोण्डागांव अविनाश भोई के मार्गदर्शन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुंजलाल सिन्हा ने शिल्पकारों और विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित किया।

विशेषज्ञों ने माना कि कोण्डागांव के शिल्पकारों में अद्भुत कौशल और सृजनात्मकता है। उन्होंने कहा कि यदि इन उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, बेहतर फिनिशिंग और प्रभावी ब्रांडिंग का सहयोग मिले, तो इनके मूल्य में कई गुना वृद्धि संभव है। साथ ही उन्होंने बाजार के नए रुझान, ग्राहकों की पसंद और आकर्षक पैकेजिंग के महत्व के प्रति शिल्पकारों को जागरूक किया।

इस पहल को आगे बढ़ाते हुए आईआईसीडी जयपुर ने बस्तर के शिल्पकारों को जयपुर आमंत्रित किया है, जहां उन्हें विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से ई-कॉमर्स, डिजाइन नवाचार और आधुनिक विपणन तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। संस्था का उद्देश्य शिल्पकारों को आधुनिक डिजाइन मानकों में दक्ष बनाकर उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना है।


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