कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
केशकाल, 1 अप्रैल। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए पीएमश्री शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय केशकाल के कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों ने एक सराहनीय उपलब्धि हासिल की है।
अंग्रेजी व्याख्याता संध्या श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने दो वर्षों की सतत मेहनत से एनसीईआरटी आधारित रंगीन, आकर्षक और नवाचारपूर्ण पुस्तकों के साथ-साथ डिजिटल सामग्री तैयार की है। इस परियोजना के तहत हॉर्नबिल, स्नैपशॉट्स, फ्लेमिंगो और विस्टास के सभी पाठों को समाहित करते हुए कुल 15 पुस्तकों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा एक समग्र व्याकरण पुस्तक भी तैयार की गई है, जो स्कूली छात्रों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी साबित हो रही है।
विद्यार्थियों द्वारा तैयार सामग्री में आधुनिक तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया है। प्रत्येक पुस्तक में क्यूआर कोड जोड़े गए हैं, जिन्हें स्कैन कर छात्र आसानी से श्रव्य और दृश्य सामग्री तक पहुंच सकते हैं। इससे उच्चारण, श्रवण कौशल और विषय की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिल रही है। सभी पाठों को सरल भाषा, चित्रों और रचनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। कविताओं में भावार्थ और काव्यालंकार को सहज तरीके से समझाया गया है, वहीं प्रत्येक पाठ के साथ व्याकरणिक विश्लेषण भी जोड़ा गया है, जिससे विद्यार्थी कहानी के साथ-साथ भाषा के नियमों को भी बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं। व्याकरण को द्विभाषीय और तालिकात्मक रूप में प्रस्तुत कर वाक्य निर्माण को आसान बनाया गया है, जिससे यह सामग्री प्रारंभिक से लेकर उन्नत स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बन गई है।
यह उपलब्धि पीएम श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना की सार्थकता को भी दर्शाती है। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक सशक्त मंच मिला है, जहां वे न केवल सीख रहे हैं बल्कि सृजनात्मक कार्यों के माध्यम से अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
इसी कड़ी में केशकाल के विद्यार्थियों का यह प्रयास यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर ग्रामीण प्रतिभाएं भी किसी से कम नहीं हैं। यह पहल पारंपरिक शिक्षा पद्धति से हटकर छात्र-केंद्रित और अनुभवात्मक शिक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है।


