कोण्डागांव

नक्सल भय खत्म, समर्पण बढ़ा, अब सडक़ों से दौड़ रहा विकास
20-Mar-2026 7:56 PM
नक्सल भय खत्म, समर्पण बढ़ा, अब सडक़ों से दौड़ रहा विकास

कोण्डागांव के दुर्गम इलाकों में नई तस्वीर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 20 मार्च।
कभी नक्सल भय और दुर्गम रास्तों के कारण जहां विकास कार्य ठप पड़े थे, आज वही क्षेत्र तेजी से बदलती तस्वीर पेश कर रहे हैं। नक्सलियों के लगातार समर्पण, पुलिस की मजबूत पकड़ और बेहतर तालमेल के चलते अब जिले के संवेदनशील इलाकों में विकास कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है। सडक़, पुल और पुलिया निर्माण अब उन क्षेत्रों में भी संभव हो पाया है, जहां कभी पहुंचना तक चुनौती था।
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत कोण्डागांव जिले में विकास की यह नई लहर साफ दिखाई दे रही है। पहले बरसात में दलदल बन जाने वाले रास्तों की जगह अब पक्की सडक़ों का जाल बिछ रहा है। इससे दूरस्थ गांवों का मुख्यालय से सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है और ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव आ रहा है।

पीएमजीएसवाई के कार्यपालन यंत्री बलराम सिंह ठाकुर के अनुसार, जिले में फेज-1 से फेज-3 तक कुल 778 कार्य (करीब 1495 किमी) पूर्ण किए जा चुके हैं। अब फेज-4 के अंतर्गत लगभग 171 किमी लंबाई के 35 नए मार्गों पर कार्य जारी है, जिनमें पहले से लंबित और संवेदनशील मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है।

इनमें वर्ष 2016-17 में स्वीकृत कुधूर-तुमड़ीवाल और कुधूर-हड़ेली मार्ग विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। नक्सल प्रभाव के कारण वर्षों तक अधूरे रहे ये मार्ग अब 2026 में पुलिस सुरक्षा के बीच तेजी से बनाए जा रहे हैं। दुर्गम जंगलों और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में बन रही ये सडक़ें अब ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा बनती जा रही हैं।

कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने कोण्डागांव पुलिस एवं आम्र्स फोर्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले नक्सलियों का प्रभाव था, वहां अब पुलिस कैंप स्थापित किए जा रहे हैं, नए थाने और चौकियां खोली जा रही हैं तथा सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। नक्सलियों के आत्मसमर्पण से इन इलाकों में सुरक्षा का माहौल बना है, जिससे सडक़, पुल-पुलिया जैसे विकास कार्य तेजी से संभव हो पाए हैं। उन्होंने बताया कि कुधूर से तुमड़ीवाल तक लगभग 11 किमी लंबा मार्ग पूर्णता की ओर है, वहीं करीब 30 अन्य मार्ग भी निर्माणाधीन हैं।

पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा ने बताया कि तुमड़ीवाल, कुधूर और हड़ेली क्षेत्र कभी घोर नक्सल प्रभावित रहे हैं, जहां आमदई एरिया कमेटी और बयानार एरिया कमेटी जैसे बड़े नक्सली संगठन सक्रिय थे। वर्ष 2007 में कुधूर में 9 पुलिस जवानों की शहादत इस क्षेत्र की गंभीर स्थिति को दर्शाती है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पुलिस की सतत कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था के चलते इन क्षेत्रों में न केवल सडक़ों का निर्माण हो रहा है, बल्कि नए मार्ग भी खोले जा रहे हैं। एरंडवाल में नया पुल निर्माण और राणापला से हड़ेली तक मेगा ब्रिज का पूर्ण होना इसका उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों से केवल कनेक्टिविटी ही नहीं, बल्कि संचार व्यवस्था, बाजार गतिविधियां और वाहनों की आवाजाही भी बढ़ी है। साथ ही, अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ अब सीधे ग्रामीणों तक पहुंच रहा है।
जिले में अब तक 1053 गांवों और 411 ग्राम पंचायतों को सडक़ संपर्क से जोडऩे का कार्य किया जा चुका है। इन सडक़ों के बनने से छात्र समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं, किसान अपनी उपज बाजार तक आसानी से ले जा पा रहे हैं और मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में राहत मिल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जिस सडक़ का इंतजार था, वह अब हकीकत बन चुकी है। नक्सल प्रभावित अंचल में बन रही ये सडक़ें अब सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और तेजी से बढ़ते विकास की नई पहचान बन चुकी हैं।


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