अंतरराष्ट्रीय
जर्मनी ने अमेरिका के कोविड-19 की वैक्सीन का पेटेंट छोड़ने के प्रस्ताव का विरोध किया है. जर्मनी का कहना है कि इससे वैक्सीन के उत्पादन में कोई रूकावट नहीं आएगी.
जर्मनी की सरकार का कहना है कि ‘’बौद्धिक संपदा की सुरक्षा किसी भी नए विचार का स्रोत होती है इसलिए इसे बनाए रखना चाहिए.‘’
इससे पहले यूरोपीय संघ ने कहा था कि वह इस प्रस्ताव पर बात करने के लिए तैयार है और संघ के कुछ देशों ने प्रस्ताव का समर्थन भी किया था.
इस योजना का समर्थन करने वालों की ओर से कहा जा रहा है कि पेटेंट हट जाने से कई निर्माता कंपनियां वैक्सीन बना सकेंगी. इससे ग़रीब देशों में वैक्सीन की पहुँच आसान और सुगम होगी.
लेकिन इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले, जिनमें कुछ दवा कंपनियां भी शामिल हैं, उनका कहना है कि इससे कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.
भारत का दिया गया आइडिया
इस विचार का प्रस्ताव सबसे पहले भारत और दक्षिण अफ्रीका की ओर से रखा गया था जो विश्व व्यापार संगठन के 60 देशों के समूह का नेतृत्व करते हैं. ये समूह चाहता है कि वैक्सीन को बौद्धिक संपदा के पेटेंट के दायरे से अस्थायी रूप से हटा दिया जाए.
इससे पहले जब ये प्रस्ताव पेश किया गया था उस वक्त अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने इसका विरोध किया था साथ ही ब्रिटेन और यूरोपीय संघ भी इसके विरोध में खड़े थे. लेकिन इस बार जब अमेरिका ने इस प्रस्ताव को समर्थन दे दिया तो भारत की इस मांग को और बल मिला.
विश्व व्यापार संगठन की प्रमुख एनगोज़ी उकान्ज़ो इकेला ने बीबीसी के न्यूज़आर कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह अमेरिका के पेटेंट हटाने के समर्थन का स्वागत करती हैं. सदस्यों को बातचीत करके एक व्यवाहारिक समझौते तक पहुँचना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में वैक्सीन के निर्माण को लेकर काफ़ी असामनता है, जो की ‘ठीक नहीं’ है.
वह मानती हैं कि वैक्सीन बनाने में कच्चे माल और तजुर्बे की कमी सबसे बड़ी परेशानी है लेकिन वह कहती हैं कि अर्थव्यस्था को बनाए रखने के लिए शुरुआत कहीं से तो करनी होगी.
रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने पेटेंट छोड़ने के विचार का समर्थन किया है.
ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि वह‘विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्यों के साथ इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में काम कर रही है.’साथ ही वह‘अमेरिका और अन्य सदस्यों के साथ मिल कर कोविड की वैक्सीन के प्रोडक्शन को बढ़ाने को लेकर चर्चा कर रहा है.’.
वहीं इस बीच जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री येन स्पान ने कहा है कि देश में एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन पर लगाई गई रोक के फ़ैसले को वापस लिया जा रहा है,अब इस वैक्सीन को हर वयस्क शख्स ले सकता है. इससे पहले कुछ लोगों में ख़ून का थक्का जमने की शिकायत के बीच 60 साल की उम्र से ऊपर के लोगों के सेवन के लिए ये वैक्सीन रोक दी गई थी.
क्यों इसे लेकर इतनी बहस हो रही है?
कई विकासशील देशों का का मानना है कि पेटेंट और अन्य बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के नियमों से वैक्सीन और कोरोना के लिए ज़रूरी दवाओं के निर्माण में बाधा पैदा होती है.
वैक्सीन से पेटेंट हटने पर ग़रीब देशों के लिए इसका निर्माण सस्ता हो पाएगा जहाँ वैक्सीन की काफ़ी कमी है.
लेकिन इसका विरोध करने वाली,खास कर फ़ार्मा कंपनियों का मानना है कि इससे समस्या नहीं सुलझेगी.
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल मैन्युफ़ैक्चर्स असोसिएशन के प्रमुख थॉमस कुएनी ने बीबीसी से कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी चिंता ये है कि‘पेटेंट हट जाने से वैक्सीन की सुरक्षा और गुणवत्ता पर संकट आ सकता है.’ (bbc.com)


