अंतरराष्ट्रीय

क्या है Mad Cow Disease, जो कोरोना से सहमे कनाडा में हड़कंप मचा रही है?
02-Apr-2021 3:50 PM
क्या है Mad Cow Disease, जो कोरोना से सहमे कनाडा में हड़कंप मचा रही है?

कोरोना महामारी की नई लहर से दुनिया वैसे ही सहमी हुई है, इस बीच कनाडा में एक और रहस्यमयी बीमारी पैर पसार रही है. मैड काऊ डिसीज नाम की ये बीमारी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी मानी जाती है और ये काफी घातक भी है. लेकिन इस सबसे ऊपर डराने वाली बात ये है कि मैड काऊ डिसीज के बारे में विशेषज्ञों को भी खास जानकारी नहीं, सिवाय इसके कि ये पशुओं से इंसानों को होती है.

कनाडा में दिख रहा प्रकोप
इस बीमारी का सबसे पहला मामला 2015 में आया था. उस समय इसके 5 मरीज मिले थे. पिछले साल 24 लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए थे. अब साल 2021 में भी मामले बढ़ रहे हैं. कनाडा में हाल ही में एकाएक 43 संक्रमित सामने आए, जिनमें से 5 की मौत हो गई. रोग को bovine spongiform encephalopathy के नाम से भी जाना जाता है. ये एक बेहद खतरनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो मरीज की जान भी ले सकती है. ये prion नामक वायरस से फैलती है. बीमार गाय, भेड़ या बकरी का गोश्त खाने पर ये बीमारी होती है.

क्या है ये बीमारी और क्या लक्षण हैं 

मैड काऊ डिसीज के साथ खतरनाक बात ये है कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, तब तक मस्तिष्क की कोशिकाओं का नुकसान हो चुका होता है और रोग की पहचान न होने या इलाज न मिलने पर आखिरकार मरीज की मौत हो जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में 1 से 2 साल लगते हैं, जिस दौरान लक्षण सामने आते हैं. जैसे मरीज मतिभ्रम का शिकार हो जाता है. वो बातें भूलने लगता है और उसका मांसपेशियों पर से नियंत्रण भी घटता जाता है. आखिर तक हालत ये होती है कि तंत्रिका तंत्र फेल हो जाता है.

इस तरह की जांच होती है 
बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच करते हैं, जैसे ईसीजी, ब्रेन एमआईआई या फिर दिमाग या रीढ़ की हड्डी में पाए जाने वाले पदार्थ की जांच. हालांकि समस्या ये है कि शुरुआती समय में इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि भूलने या कंपन को थकान या कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है और बीमारी देर से पता चलती है.

आमतौर पर गायों से होने वाली इस बीमारी के कारण कई देशों ने कईयों बार दूसरे देशों से बीफ के आयात पर पाबंदी भी लगाई.

गायों से होने वाली ये अकेली बीमारी नहीं 
ब्रुसेलोसिस नाम की बीमारी भी गाय या बकरियों से आती है. इंफेक्टेड गायों या बकरियों का दूध पीने पर ये बीमारी हो सकती है लेकिन अगर आप गाय पालने के शौकीन हैं तो शरीर पर हुए हल्के-फुल्के जख्मों के जरिए भी इस बीमारी के बैक्टीरिया भीतर पहुंच जाते हैं. इसके लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते हैं. हालांकि अच्छी बात ये है कि ये बीमारी उतनी गंभीर नहीं और एंटीबायोटिक से इसका पक्का इलाज हो जाता है.

कई घातक संक्रमण पशुओं की देन हैं
कोरोना फैलने के शुरुआती दौर में कई तरह के पशुओं को इसके लिए जिम्मेदार माना गया. ये सही है कि जंगली या फिर पालूत पशुओं से भी इंसानों तक कई घातक संक्रमण पहुंचते रहे हैं. जैसे पक्षी पालने वाले लोगों को पैरट फीवर का खतरा रहता है. बीमारी संक्रमित पक्षी के शरीर से हवा के जरिए फैलती है और अगर हम भी उसी हवा में सांस ले रहे हैं तो बीमारी के वायरस नाक के जरिए हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं. बीमारी के लक्षणों में बुखार, डायरिया, सूखी खांसी और ठिठुरन शामिल हैं. इसका इलाज भी एंटीबायोटिक से होता है.

रेबीज को जानलेवा माना जाता है 
रेबीज नाम की बीमारी को जानवरों से होने वाली सबसे घातक बीमारियों में गिना जाता है. वायरस से फैलने वाली ये बीमारी पालतू जानवरों में आसपास रहने वाले जंगली जानवरों से आती है और पालतू जानवरों की सफाई के दौरान इंसानी शरीर में इसके वायरस प्रवेश कर जाते हैं. फ्लू की तरह लक्षणों से बीमारी की शुरुआत होती है, जो जल्द ही मतिभ्रम, बेहोशी या पैरालिसिस में बदल जाती है. पूरी दुनिया में हर साल लगभग 50 हजार मौतें इसी बीमारी की वजह से होती हैं. मॉर्डन चिकित्सा में इसका इलाज तो है लेकिन हर जगह उपलब्ध नहीं.
 


अन्य पोस्ट