अंतरराष्ट्रीय
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को पहली बार किसी इबोला मरीज की बीमारी ठीक होने का दावा किया है. यह मरीज डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो (डीआरसी) का है. डब्ल्यूएचओ की अनाइस लेगांद ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, "डीआरसी ने 27 मई को एक मरीज के ठीक हो कर अस्पताल से समुदाय में जाने की बात कही है." मरीज केस्वास्थ्यमें सुधार और टेस्ट में दो बार निगेटिव पाए जाने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिली.
लेगांद का कहना है कि इबोला के जिन मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, उनमें से पहली बार कोई ठीक हुआ है. उन्होंने इस बात की उम्मीद जताई कि कुछ और लोग भी ठीक हो सकते हैं, जिनके टेस्ट का नतीजा अभी नहीं आया है.
लेगांद ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने अब तक 17 लोगों की इबोला से मौत होने की पुष्टि की है जबकि 223 संदिग्ध मौतों के लिए भी इबोला को जिम्मेदार बताया जा रहा है. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. इबोला के अब तक कुल 125 मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि 900 लोग संदिग्ध रूप से इस वायरस से संक्रमित हैं. इबोला के इस वायरस से संक्रमित होने पर करीब 50 फीसदी मामलों में मौत की आशंका रहती है.
लेगांद डब्ल्यूएचओ की वायरल हेमोरेजिक फीवर्स की टेक्निकल ऑफिसर हैं. उन्होंने जोर दे कर कहा है कि इलाज और देखभाल से लोगों के जिंदा बचने की दर बढ़ाई जा सकती है. उन्होंने और लोगों के इस बीमारी से ठीक होने की उम्मीद जताई है. डब्ल्यूएचओ के प्रमुख तेद्रोस अधानोम घेब्रेसेयुस डीआरसी की यात्रा पर गए हुए हैं. (dw.com/hi)


