अंतरराष्ट्रीय
डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में इबोला वायरस की चपेट में आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वायरस का संक्रमण शुरू होने के बाद अब तक 1,077 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं. कॉन्गो की सरकार ने बताया कि इबोला की वजह से अब तक 246 लोगों की संदिग्ध मौत हो गई है. परीक्षण में कुल 121 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है इनमें 17 लोगों की मौत के मामले शामिल हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा बड़ी है. युगांडा और दक्षिणी सूडान से लगती सीमा पर इतुरी प्रांत में वायरस के संक्रमण की कई हफ्तों तक अनदेखी हुई और अब तक सारे मामले दर्ज भी नहीं हुए हैं. इस बीच युगांडा ने पूर्वी कॉन्गो से लगती अपनी सीमा बंद कर दी है. युगांडा में अब तक सात लोगों में इबोला के संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनका संबंध पूर्वी कॉन्गो में बीमारी के फैलाव से है.
युगांडा संदिग्ध मामलों की संख्या के बारे में जानकारी नहीं दे रहा है. युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इबोला रिस्पांस टीम, मानवीय अभियान के साथ ही भोजन और सामान की डिलीवरी के अलावा और किसी को सीमा पार आने जाने की अनमति फिलहाल नहीं है. कॉन्गो से आने वाले सभी लोगों को स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की देख रेख में 21 दिन के लिए क्वारंटीन किया जा रहा है.
इबोला एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है जिसमें जान जाने का खतरा है. यह वायरस शारीरिक संपर्क और शरीर के तरल के संपर्क में आने से फैलता है. 2014-15 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला की वजह से 11,000 लोगों की मौत हुई थी. दूसरी बार पूर्वी कॉन्गो में इसके संक्रमण के कारण करीब 2,300 लोगों की मौत हुई. (dw.com/hi)


