अंतरराष्ट्रीय
(शिरिष बी प्रधान)
काठमांडू, 21 जनवरी। नेपाल में ‘जेन जेड’ के विरोध प्रदर्शनों के महीनों बाद पांच मार्च को कराए जा रहे आम चुनाव में चार पूर्व प्रधानमंत्री भी अपनी किस्मत आजमाएंगे।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष और ‘जेन-जेड’आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ने को मजबूर हुए के पी शर्मा ओली ने आगामी चुनाव के लिए झापा-5 सीट से नामांकन दाखिल किया है। वहीं, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल ‘प्रचंड’ रुकुम पूर्व से किस्मत आजमा रहे हैं।
दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के माधव कुमार नेपाल और प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के बाबूराम भट्टराई ने क्रमशः रौतहट-1 और गोरखा-2 निर्वाचन क्षेत्रों से नामांकन दाखिल किया है।
हालांकि, दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्री नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता झाला नाथ खनाल इस दौड़ में शामिल नहीं हैं।
नेपाल में ‘जेन-जेड’ युवाओं के नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ओली ने नौ सितंबर को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद देश में आम चुनाव आवश्यक हो गए थे।
नई पीढ़ी यानी जेनरेशन जेड वह बच्चे हैं, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। इन 15 साल के बीच जो बच्चे पैदा हुए हैं, उन्हें जेन जेड कहा जाता है। साल 2025 तक यह पीढ़ी दुनिया की करीब 30 फीसदी वर्कफोर्स बन चुकी है और अपनी अलग सोच और आदतों से समाज और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर डाल रही है।
वरिष्ठ पत्रकार और ‘आर्थिक दैनिक’ के संपादक प्रह्लाद रिजाल का कहना है, ‘‘पिछले साल सितंबर में ‘जेन जेड’ के विद्रोह का एक मुख्य कारण यह था कि पिछले 15 वर्षों में, तीन शीर्ष नेताओं, देउबा, प्रचंड और ओली एक के बाद एक प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के लिए जोड़-तोड़ करते रहे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जेन जेड’ (1997 से 2012 के बीच जन्में बच्चे) के युवा बदलाव चाहते थे और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे पुराने नेतृत्व से तंग आ चुके हैं। इसके बावजूद, हमारे पास ये चार नेता हैं जिनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है।’’
ओली 74 वर्ष के हैं, प्रचंड और भट्टाराई दोनों की उम्र 71 साल है। माधव कुमार नेपाल 72 वर्ष के हैं।
इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे दो पूर्व प्रधानमंत्रियों में से, खनाल ने स्वेच्छा से दौड़ से दूर रहने का विकल्प चुना है, जबकि देउबा को अपनी ही पार्टी के युवा नेताओं के प्रतिरोध के कारण मैदार से बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक धनंजय शर्मा ने कहा, ‘‘देउबा अपने दादेलधुरा निर्वाचन क्षेत्र से आठवीं बार चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी के नव निर्वाचित अध्यक्ष गगन थापा ने अंततः उन्हें ‘जेन जेड’ की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव से दूर रहने के लिए मना लिया।’’
‘द काठमांडू पोस्ट’ ने खबर दी कि सोमवार रात को, देउबा के निजी सचिवालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वह इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे जबकि उनकी पत्नी और पूर्व मंत्री आरजू राणा देउबा पहले से कैलाली से चुनाव लड़ने की इच्छुक थीं लेकिन अब वह मैदान में नहीं उतरेंगी।
इस बीच, मैदान में केवल पूर्व प्रधानमंत्री ही नहीं हैं। देश भर से तीन महापौर भी अपने-अपने पदों से इस्तीफा देकर आम चुनाव में लड़ रहे हैं।
महापौर रह चुके और आम चुनाव में किस्मत आजमाने वालों में काठमांडू महानगरपालिका के पूर्व महापौर बलेंद्र शाह ‘बालेन’ ने झापा-5 सीट से नामांकन दाखिल किया है जहां से ओली ने भी दावेदारी की है।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत उपलब्ध 165 सीटों के लिए मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय सहित कुल 3,088 पुरुषों और 395 महिलाओं ने अपना नामांकन दाखिल किया।
प्रतिनिधि सभा की कुल 275 सीटों में से, 165 सीट पर प्रत्यक्ष निर्वाचन होता है जबकि शेष 40 प्रतिशत या 110 सीट पर सदस्य आनुपातिक मतदान प्रणाली के माध्यम से चुने जाते हैं। (भाषा)


