अंतरराष्ट्रीय
जर्मनी के बाडेन-वुर्टेमबर्ग राज्य की एक अदालत ने सोमवार, 19 जनवरी को फैसला सुनाया कि मुस्लिम महिलाएं कार चलाते समय चेहरे को पूरी तरह ढकने वाला 'नकाब' नहीं पहन सकती हैं. यह मामला मानहाइम की एक मुस्लिम महिला द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने तर्क दिया था कि छह बच्चों की मां होने के नाते उन्हें दैनिक कार्यों के लिए गाड़ी चलानी पड़ती है और नकाब पहनना उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का हिस्सा है.
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जर्मन ट्रैफिक कोड के सुरक्षा नियम धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण हैं. न्यायाधीश के अनुसार, वाहन चालक का चेहरा खुला होना अनिवार्य है ताकि सड़क पर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जरूरत पड़ने पर चालक की पहचान की जा सके. चेहरे को ढकने से चालक की दृष्टि बाधित हो सकती है, जो दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है.
हालांकि, अदालत ने परिवहन मंत्रालय द्वारा लगाए गए शुरुआती प्रतिबंध की प्रक्रिया में कुछ कमियां भी पाईं. न्यायाधीश ने कहा कि मंत्रालय ने इस प्रतिबंध को लागू करते समय धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार पर पर्याप्त गहराई से विचार नहीं किया था. इसके चलते मंत्रालय को महिला की अपील पर फिर से विचार करने का आदेश दिया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही मंत्रालय को इस पर दोबारा विचार करने को कहा गया है, लेकिन अंतिम परिणाम बदलने की संभावना बहुत कम है. (dw.com/hi)


