अंतरराष्ट्रीय
वेनेजुएला के अंदर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकडऩे के बाद ऐसे संकेत हैं कि ट्रंप प्रशासन के निशाने पर ग्रीनलैंड हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी और उनके प्रशासन के सबसे प्रभावशाली सहयोगी स्टीफन मिलर की पत्नी ने शनिवार की देर रात एक्स पर ग्रीनलैंड को लेकर एक पोस्ट किया जिस पर डेनमार्क ने गहरी आपत्ति जताई है।
स्टीफन मिलर ट्रंप प्रशासन में डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ हैं और उनकी पत्नी कैटी मिलर ने वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद एक्स पर डेनमार्क के अर्द्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड की एक तस्वीर पोस्ट की।
इस तस्वीर में ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे में दिखाया गया है और इसके ऊपर सिर्फ एक शब्द लिखा गया- ‘जल्द’। केटी मिलर की पोस्ट को लेकर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्ऱेडरिकसन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से ग्रीनलैंड पर कब्ज़े को लेकर ‘धमकियां देना बंद करने’ को कहा।
डेनमार्क की कड़ी प्रतिक्रिया
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने केटी मिलर की इस पोस्ट को ‘अपमानजनक’ बताया।
उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘देशों और लोगों के बीच रिश्ते आपसी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर बनते हैं। ऐसे प्रतीकात्मक इशारों पर नहीं, जो हमारे दर्जे और हमारे अधिकारों की अनदेखी करें।’
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ‘घबराने या चिंता करने की कोई वजह नहीं है। हमारा देश बिक्री के लिए नहीं है और हमारा भविष्य सोशल मीडिया पोस्ट से तय नहीं होता।’
अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोएलर सोरेंसन ने रविवार को केटी मिलर की पोस्ट का लिंक साझा करते हुए लिखा, ‘हम डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता के लिए पूर्ण सम्मान की उम्मीद करते हैं।’
डेनमार्क के राजदूत ने केटी मिलर की पोस्ट के जवाब में एक सख्त ‘फ्रेंडली रिमाइंडर’ देते हुए लिखा कि उनका देश नेटो का सदस्य है और उसने ‘आर्कटिक सुरक्षा प्रयासों को काफी मजबूत किया है’ और इस पर अमेरिका के साथ मिलकर काम किया है।
सोरेंसन ने लिखा, ‘हम करीबी सहयोगी हैं और हमें इसी तरह मिलकर काम करते रहना चाहिए।’
डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वह ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना चाहते हैं।
इस दिशा में उनकी सरकार की ओर से उठाए गए क़दमों ने डेनमार्क और यूरोपीय संघ दोनों को नाराज़ किया है। पिछले महीने 22 दिसंबर को ट्रंप ने डेनिश क्षेत्र के लिए एक दूत की नियुक्ति की थी।
ट्रंप ने कहा था कि ग्रीनलैंड ‘अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी’ है और इसे अपने ‘कब्जे में लेना ही होगा।’
कौन हैं स्टीफन मिलर?
स्टीफन मिलर को ट्रंप की नीतियों का मुख्य रणनीतिकार माना जाता है। वह राष्ट्रपति को सख़्त इमिग्रेशन नीति और घरेलू एजेंडे की रूपरेखा सुझाते रहे हैं।
बीबीसी संवाददाता एटाहौल्पा अमेराइज के अनुसार, ट्रंप की सबसे कठोर आप्रवासन नीति के पीछे अगर कोई मास्टरमाइंड है तो वह हैं स्टीफन मिलर।
ट्रंप ने अपना दूसरा कार्यकाल जिस दिन संभाला, उसी दिन उन्होंने जिन कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए उन पर मिलर के हस्ताक्षर पहले से मौजूद थे। इन आदेशों में थे- जन्मसिद्ध नागरिकता को खत्म करना और दक्षिणी सीमा पर राष्ट्रीय इमरजेंसी घोषित करना।
दूसरे कार्यकाल में स्टीफन मिलर का रुतबा बहुत तेज़ी से बढ़ा है और उन्हें ट्रंप का सबसे बड़ा वफ़ादार सहयोगी माने जाने लगा है।
स्टीफन मिलर की पत्नी केटी मिलर ट्रंप के पहले कार्यकाल में होमलैंड सिक्योरिटी विभाग में डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी रह चुकी हैं।
बाद में उन्होंने तत्कालीन उपराष्ट्रपति माइक पेंस के लिए कम्युनिकेशन डायरेक्टर के रूप में काम किया और उनकी प्रेस सेक्रेटरी की भूमिका भी निभाई।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के इरादे
अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी शनिवार को उस समय सकते में आ गए, जब ट्रंप ने अमेरिकी सेना को वेनेजुएला की राजधानी कराकस पर हमला करने और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकडऩे का आदेश दिया था। मादुरो फिलहाल न्यूयॉर्क में अमेरिकी हिरासत में हैं।
ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका अब अनिश्चित काल तक वेनेजुएला को ‘चलाएगा’ और उसके बड़े तेल भंडार का इस्तेमाल करेगा।
ग्रीनलैंड के मामले में ट्रंप दावा करते रहे हैं कि डेनमार्क के इस क्षेत्र को अमेरिका का हिस्सा बनाना अमेरिकी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के हित’ में होगा, क्योंकि यह आर्कटिक में रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर है।
ग्रीनलैंड को लेकर एक मैगजीन ‘द अटलांटिक’ ने फोन पर ट्रंप से सवाल किया, तो ट्रंप की ओर से कहा गया गया कि, ‘हमें ग्रीनलैंड चाहिए, बिल्कुल चाहिए। हमें यह रक्षा के लिए चाहिए।’
रॉयटर्स के मुताबिक, रविवार को मैग्ज़ीन को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला की उप राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज़ अगर नहीं मानती हैं तो उन्हें मादुरो से भी बड़ी क़ीमत भुगतनी पड़ सकती है।
डेल्सी रोड्रिग्ज़ ने कहा है कि वो अपने देश के प्राकृतिक संसाधनों की ‘हर हाल में रक्षा’ करेंगी।
ग्रीनलैंड रेयर अर्थ का खजाना
21 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल वाले ग्रीनलैंड द्वीप की आबादी सिर्फ 57 हजार है। कई तरह की स्वायत्तता वाले ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था डेनमार्क की सब्सिडी पर निर्भर है और ये किंगडम ऑफ़ डेनमार्क का हिस्सा है। इस द्वीप के 80 फीसदी हिस्से पर स्थाई रूप से मोटी बर्फ जमी रहती है।
ग्रीनलैंड के लिए ट्रंप की ये महत्वाकांक्षा कोई नई नहीं हैं। 2019 में उन्होंने कहा था कि ये एक ‘शानदार रियल एस्टेट’ सौदा होगा।
उच्च तकनीकी सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले अहम खनिज भी ग्रीनलैंड में बड़ी मात्रा में मौजूद हैं।
पिछले साल जनवरी में मिशिगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और जियोलॉजिस्ट एडम सिमोन ने बीबीसी न्यूज ब्राज़ील को बताया था कि ग्रीनलैंड में पूरी दुनिया का एक चौथाई या करीब 15 लाख टन रेयर अर्थ मिनरल्स हो सकता है।
रेयर अर्थ के मामले में अभी चीन पूरी दुनिया पर हावी है और ग्रीनलैंड में खनन कंपनियों में भी उसका निवेश है। चीन वर्षों से ग्रीनलैंड में अपनी मौज़ूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
चीनी कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने ग्रीनलैंड में कम से कम दो हवाई अड्डे बनाने की कोशिश की है।
लेकिन माना जाता है कि अमेरिकी का दवाब में ऐसा नहीं हो पाया।
चीन को अमेरिका अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता है और उसके साथ होड़ में ग्रीनलैंड एक नया मोर्चा बन गया है।
वेनेजुएला के साथ जंग नहीं- मार्को रुबियो
वेनेजुएला पर कार्रवाई को लेकर ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस से मंजूरी नहीं ली थी और इसे लेकर अमेरिका में भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
मंजूरी लेने को लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एबीसी न्यूज से कहा, ‘यह जरूरी नहीं था क्योंकि यह कोई हमला नहीं था।’
उन्होंने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन के बारे में कांग्रेस को सूचित नहीं किया जा सकता क्योंकि ‘इससे जानकारी लीक होने की आशंका रहती है।
रुबियो ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला के साथ युद्ध नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘अमेरिका की ओर ड्रग्स लाने वाली नावों को ज़ब्त करने का काम जारी रहेगा।’
रुबियो से पूछा गया कि वेनेज़ुएला को कौन चला रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि अमेरिका को ‘वेनेजुएला में बदलाव दिखने की उम्मीद ह’, जिसमें ‘सबसे जरूरी’ बदलाव वे होंगे जो ‘अमेरिका के राष्ट्रीय हित में हों।’
रुबियो ने कहा कि अमेरिका के खतरों से निपटने के लिए उनकी सरकार ‘हर तरह के दबाव का इस्तेमाल’ करने का इरादा रखती है।
शनिवार को हुए ऑपरेशन के तुरंत बाद ट्रंप ने फ़्लोरिडा में अपने आवास मार-आ-लागो में एक प्रेस कॉन्फ्रेस की और कहा कि अमेरिका वेनेजुएला को ‘तब तक चलाएगा’ तब तक कि सत्ता का ‘सुरक्षित, सही और समझदारी भरा परिवर्तन नहीं हो जाता।’
लेकिन थिंकटैंक चैटम हाउस में इंटरनेशनल लॉ प्रोग्राम के डायरेक्टर मार्क वेलर ने बीबीसी की लाइव रिपोर्टर केटी विलियम्स से कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून में, ‘बल के इस्तेमाल का कोई कानूनी आधार नहीं है’, न तो ‘ड्रग्स के संदिग्धों को पकडऩे’ के लिए और न ही ‘वेनेजुएला में लोकतंत्र को बढ़ावा देने’ के लिए।
वेलर ने वेनेज़ुएला को ‘चलाने’ की बात को ‘बहुत अजीब’ बताते हैं।
अमेरिकी कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं बहुत तीखी रही हैं। चीन ने मादुरो को तुरंत रिहा करने की मांग की है। ईसाई धर्मगुरु पोप लिओ ने वेनेजुएला की संप्रभुता की गारंटी देने की अपील की है।


