अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ने कहा है कि वह फ़लस्तीनी प्राधिकरण (पीए) और फ़लस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है.
पीए की स्थापना ओस्लो शांति समझौते के तहत हुई थी. वहीं पीएलओ को फ़लस्तीनी जनता का आधिकारिक प्रतिनिधि माना गया था.
इसके बदले में पीएलओ ने हिंसा छोड़ने और इसराइल को मान्यता देने पर सहमति दी थी.
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि इस प्रतिबंध के बाद वीज़ा नहीं दिया जाएगा, जिससे फ़लस्तीनी अधिकारियों का अमेरिका आना-जाना रुक जाएगा.
इसे ट्रंप प्रशासन की एक अहम राजनयिक सख़्ती माना जा रहा है.
इस कार्रवाई को इस हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र में फ़्रांस और सऊदी अरब की अगुवाई में हुई उस कॉन्फ़्रेंस के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मक़सद भविष्य में दो-राष्ट्र समाधान के लिए समर्थन जुटाना था.
इसराइल के विदेश मंत्री गिदियोन सार ने अमेरिका के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.
एक्स पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और पूरे अमेरिकी विदेश विभाग का शुक्रिया अदा किया है.
उन्होंने कहा कि दोनों संगठनों से जुड़े फ़लस्तीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का जो कदम उठाया गया है, वह सराहनीय है. (bbc.com/hindi)


