अंतरराष्ट्रीय
पिछले साल जब अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग स्टारलाइनर कैप्सूल की मदद से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंचे तो उन्हें नहीं पता था कि वो यहां नौ महीनों के लिए फंस जाएंगे.
उन्हें वापिस ले जाने वाले बोइंग स्टारलाइनर में तकनीकी ख़राबी आ गई, उसके थ्रस्टर्स नाकाम हो गए जिस कारण वो दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर पृथ्वी के लिए उड़ान नहीं भर पाया.
इसके बाद स्पेसएक्स के भेजे कैप्सूल की मदद दोनों धरती पर सफलतापूर्वक वापिस लौटे. इसके दो महीने बाद बुच विल्मोर ने बीबीसी न्यूज़ को बताया, "डॉकिंग बहुत ज़रूरी थी,अगर हम डॉक नहीं कर पाए, तो हमें नहीं पता था कि हम वापस जा पाएंगे या नहीं. "
दोनों अंतरिक्ष यात्री आठ दिनों की एक परीक्षण उड़ान पर थे लेकिन इसकी जगह उन्हें क़रीब नौ महीने तक अंतरिक्ष में रहना पड़ा.
पहली चुनौती आईएसएस के साथ कैप्सूल की सुरक्षित और सफलतापूर्वक डॉकिंग थी और पृथ्वी पर मौजूद मिशन कंट्रोल के यान के थ्रस्टर्स को फिर से चालू करने में मदद के बाद, ये काम दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने कुछ मिनटों में ही पूरा कर लिया था.
विल्मोर ने कहा कि उन्हें आशंका थी कि वे फिर से शायद पृथ्वी पर लौट नहीं सकेंगे. उन्होने बताया, "निश्चित रूप से हमारे मन में ये चल रहा था."
दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने कहा कि उस समय बिगड़ रही स्थिति के बारे में उन्होंने बहुत ज़ोर नहीं दिया क्योंकि उन्हें समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है.
वहीं सुनीता विलियम्स ने बीबीसी को बताया, "आप एक-दूसरे के मन की बात पढ़ लेते हैं और जानते हैं कि हम असफलताओं के बावजूद भी कहां जा रहे हैं?"
उन्होंने स्वीकार किया, "इसकी उम्मीद नहीं थी, लेकिन फिर हमने समाधान के बारे में सोचा. ठीक उसी समय, हम क्या सोच रहे थे, हमारे पास क्या विकल्प हैं? हम क्या कर सकते हैं?"
उन्होंने कहा, "हमें पता था कि कोई हमें निराश नहीं करेगा, हमें पता था कि सभी हमारी चिंता कर रहे हैं."
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने जून 2024 में आईएसएस तक की यात्रा शुरू की थी. वो बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्षयान की पहली चालक दल परीक्षण उड़ान में भाग ले रहे थे. (bbc.com/hindi)


