अंतरराष्ट्रीय
यरूशलम को लेकर इस्राएल में कई दिन से जारी झड़पें सोमवार को अचानक बढ़कर हवाई हमलों में बदल गईं और आधिकारियों के मुताबिक लगभग 20 लोगों की मौत हो गई.
इस्राएली अधिकारियों का कहना है कि फिलीस्तीनी उग्रवादी संगठनों ने यरूशलम के पास रॉकेट दागे जिसके जवाब में किए गए इस्राएली हमलों में नौ बच्चों समेत कम से कम 20 लोगों की जान चली गई. इस्राएली सेना ने बताया कि हथियार बंद समूहों के खिलाफ गाजा में सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की गई है. प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि यरूशलम इलाके पर हमला करके उग्रवादियों ने "लाल रेखा” पार कर दी है. ऐसा 2014 के बाद पहली बार हुआ है कि यरूशलम के पास रॉकेट दागे गए हों.
इस्राएली सेना देर रात तक रॉकेट लॉन्चर दागती रही और हवाई हमले होते रहे. फिलीस्तीन की ओर से गाजा पट्टी के पास तटीय इलाकों में जोरदार धमाकों की जानकारी दी गई है. उधर इस्राएली सेना का दावा है कि मध्य रात्रि के पहले फिलीस्तीनी उग्रवादियों ने 150 से ज्यादा रॉकेट दागे जिन्हें इस्राएल के मिसालइ डिफेंस सिस्टम ने पकड़ लिया.
मौजूदा तनाव की वजह
इस्राएल में पिछले कई दिन से तनाव बना हुआ है. यरूशलम के बीचोबीच स्थित अल अक्सा मस्जिद के पास दो पक्षों में भारी हिंसक झड़पें हो रही हैं और दर्जनों लोग घायल हुए हैं. ये झगड़े इस्राएली अधिकारियों द्वारा शेख जारा इलाके में रह रहे फिलीस्तीनियों को हटाने की कार्रवाई के बाद शुरू हुए हैं.
रविवार को अल अक्सा मस्जिद के पास रमजान की सबसे पवित्र मानी जाने वाली रातों में से एक के दौरान इस्राएली पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक झड़पें हुईं. इसके बाद देश के न्याय मंत्रालय ने लोगों को शेख जारा इलाके से हटाने के लिए हो रही सुनवाई रद्द कर दी. यरूशलम पर इस्राएल के कब्जे का जश्न मनाने के लिए आयोजित एक राष्ट्रवादी ध्वज-मार्च भी रद्द कर दिया गया क्योंकि आयोजकों को फिलीस्तीनी इलाकों से न गुजरने को कहा गया था.
इसी दौरान गाजा से यरूशलम के इलाकों पर रॉकेट हमले किए गए. इनके जवाब में प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, "गाजा के आतंकी संगठनों ने लाल रेखा पार कर दी है. यरूशलम के बाहरी इलाकों में हम पर मिसाइलों से हमला किया है.” हमास के रॉकेट हमले शुरू होने के बाद पश्चिमी दीवार के पास रह रहे यहूदी परिवारों को हटा लिया गया.
‘उकसाया गया है'
फिलीस्तीनी नेता और कानूनविद डॉ. हनान अशर्वी ने डॉयचे वेले को बताया कि इस्राएल जानबूझ कर फिलीस्तीनियों को उकसा रहा है. उन्होंने कहा, "इस्राएल ने पवित्र स्थल को निशाना बनाया है. इबादत करने वालों को निशाना बनाया है. उन्हें बताया गया था कि इस्राएल आग से खेल रहा है. और इसके बाद भी वे जारी रहे और बात को बढ़ाते रहे.”
डॉ. अशर्वी ने कहा कि इस्राएल यरूशलम में डेमोग्रैफिक इंजीनियरिंग या नस्ली सफाई कर रहा है. उन्होंने कहा, "वे फिलीस्तीन में घरों पर कब्जा कर रहे हैं. वे फिलीस्तीनियों को उनके ही घरों से निकाल रहे हैं. वे फिलीस्तीनी घरों को गिरा रहे हैं. तो मामला बस लोगों को जगह से हटाना और मुआवजा देना नहीं है. मामला ये है कि वे फिलीस्तीनियों से छुटकारा पाना चाहते हैं और फिलीस्तीनियों के शहर का सफाया करना चाहते हैं. वे देखना चाहते हैं कि वे यरूशलम पर कब्जा करने की अपनी कोशिश में किस हद तक जा सकते हैं, उसका किरदार बदल सकते हैं और यरूशलम पर अवैध संप्रभुता स्थापित कर सकते हैं.”
दुनियाभर से प्रतिक्रिया
दोनों पक्षों के बीच बढ़ते मौजूदा तनाव को लेकर दुनियाभर के नेताओं ने प्रतिक्रिया की है. जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास ने इलाके में हिंसा की निंदा की है. उन्होंने कहा कि इस्राएल और फिलीस्तीन दोनों तरफ के अधिकारियों का फर्ज है कि और आम लोगों की जानें ना जाएं.
यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख योसेप बोरेल के एक प्रवक्ता ने कहा, "बढ़ती हिंसा एकदम रुकनी चाहिए.”
अमेरिकी विदेशी मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा है कि गाजा से इस्राएल के खिलाफ रॉकेट हमले फौरन बंद होने चाहिए. उन्होंने दोनों पक्षों से तनाव कम करने के लिए कदम उठाने की अपील की. हालांकि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के उस बयान का समर्थन करने में झिझक रहा है जिसमें इस्राएल से शेख जारा इलाके से लोगों को हटाना बंद करने पर विचार को कहा गया है.
वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी, एपी, डीपीए)


