गरियाबंद

आईएसबीएम विवि में उद्यमिता व स्टार्टअप जागरूकता सह संवेदनशीलता कार्यशाला
19-Mar-2026 4:38 PM
आईएसबीएम विवि में उद्यमिता व स्टार्टअप जागरूकता सह संवेदनशीलता कार्यशाला

विद्यार्थियों ने स्थानीय उत्पादों का किया प्रदर्शन, विशेषज्ञों ने नवाचार, स्टार्टअप व पेटेंट पर दिया मार्गदर्शन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

छुरा (गरियाबंद), 19 मार्च। आईएसबीएम विश्वविद्यालय, छुरा में इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के तत्वावधान में तथा स्टार्टअप छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से उद्यमिता एवं स्टार्टअप जागरूकता सह संवेदनशीलता कार्यशाला का गरिमामय एवं सफल आयोजन विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल, ब्लॉक-02 में किया गया। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार, आत्मनिर्भरता, सृजनात्मक सोच, स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा रोजगार सृजन की भावना को विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया तथा विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल की गतिविधियों एवं नवाचार-उन्मुख पहलों की जानकारी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापकगण, कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न गणमान्य वक्ताओं एवं विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को उद्यमिता और स्टार्टअप की अवधारणा, उसके व्यावहारिक पक्ष, चुनौतियों और संभावनाओं पर अत्यंत प्रेरक एवं ज्ञानवर्धक मार्गदर्शन प्रदान किया।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बी. पी. भोल ने कहा कि उद्यमिता केवल व्यवसाय आरंभ करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक सोच, एक दृष्टिकोण और जीवन में कुछ नया करने का साहस है।  उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उद्यमिता में अच्छी आदतों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। समयपालन, अनुशासन, निरंतर अभ्यास, धैर्य, जिम्मेदारी तथा लक्ष्य के प्रति निष्ठा जैसे गुण एक सफल उद्यमी के व्यक्तित्व की आधारशिला होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लाभ और हानि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, इसलिए किसी भी उद्यमी को सफलता के साथ-साथ चुनौतियों और असफलताओं का सामना करने के लिए भी मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उद्यमिता का वास्तविक आधार कल्पनाशक्ति है। जब व्यक्ति किसी सामान्य समस्या को नई दृष्टि से देखता है और उसका अभिनव समाधान खोजता है, तभी एक नया उद्यम जन्म लेता है।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञ कुमुद मिश्रा ने विद्यार्थियों को अत्यंत सरल एवं व्यवहारिक भाषा में स्टार्टअप क्या है तथा स्टार्टअप और उद्यमिता में क्या अंतर है, यह विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि हर व्यवसाय स्टार्टअप नहीं होता, बल्कि स्टार्टअप वह होता है जो किसी समस्या का नया, प्रभावी, नवाचारी और विस्तार योग्य समाधान प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप प्राय: छोटी-छोटी समस्याओं की पहचान से आगे आता है, और यही छोटी समस्याएँ आगे चलकर बड़े अवसरों का रूप ले सकती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति के भीतर एक विशेष क्षमता, एक विशिष्ट प्रतिभा और आगे बढऩे की अपार संभावना होती है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने, विकसित करने और सही दिशा देने की होती है।

कार्यक्रम के दौरान यह विशेष रूप से देखने को मिला कि विश्वविद्यालय के अनेक छात्र-छात्राओं ने स्थानीय उत्पादों, नवाचारी विचारों एवं उपयोगी अवधारणाओं को स्टार्टअप और उद्यमिता की दृष्टि से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित इन उत्पादों और विचारों में स्थानीय संसाधनों, स्थानीय जरूरतों तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संभावनाओं का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। यह प्रदर्शन केवल एक प्रदर्शनी भर नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास, उद्यमशील दृष्टि और आत्मनिर्भरता की भावना का सशक्त उदाहरण था।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित उत्पादों, विचारों और मॉडलों का अवलोकन कर उन्हें बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने बताया कि किसी भी छोटे विचार को यदि सही योजना, तकनीकी समझ, निरंतर सुधार और बाजार की आवश्यकता के अनुरूप विकसित किया जाए, तो वही आगे चलकर एक सफल स्टार्टअप बन सकता है। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उत्पादों, पारंपरिक ज्ञान, क्षेत्रीय संसाधनों और समुदाय से जुड़ी आवश्यकताओं को आधार बनाकर भी सशक्त उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं। इस दौरान विद्यार्थियों को अपने विचारों को केवल कक्षा या परियोजना तक सीमित न रखकर उन्हें व्यवहारिक रूप देने, आगे बढ़ाने और समाजोपयोगी मॉडल में विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।

विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण सलाह भी दी गई कि यदि उनके पास कोई नवीन विचार, विशिष्ट उत्पाद, उपयोगी तकनीक, मौलिक डिज़ाइन या नवाचार आधारित कार्य है, तो उसे उचित प्रक्रिया के माध्यम से पेटेंट कराने की दिशा में भी सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में केवल विचार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस विचार की बौद्धिक संपदा के रूप में सुरक्षा भी अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को समझाया गया कि पेटेंट के माध्यम से वे अपने कार्य, आविष्कार और नवाचार को सुरक्षित रख सकते हैं, जिससे भविष्य में उन्हें पहचान, संरक्षण और व्यावसायिक अवसर प्राप्त हो सकते हैं। यह मार्गदर्शन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञ प्रीति खंडेलवाल सदस्य स्टार्टअप छत्तीसगढ़ ने स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों, नवाचार की भूमिका, तथा शासन स्तर पर उपलब्ध सहयोग एवं प्रोत्साहन की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी सोच को सीमित न रखें, बल्कि समस्याओं को अवसर के रूप में देखें और समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाएँ। उन्होंने कहा कि आज का समय उन युवाओं का है जो केवल नौकरी के अवसरों की प्रतीक्षा नहीं करते, बल्कि स्वयं अवसरों का निर्माण करते हैं।

कार्यक्रम के प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञ कुमुद मिश्रा सहायक प्रबंधक उद्योग भवन ने स्टार्टअप की प्रक्रिया, उद्यम आरंभ करने की प्रारंभिक चुनौतियाँ, स्थानीय उत्पादों के व्यवसायीकरण, वित्तीय सहायता, नवाचार, विपणन, तथा पेटेंट से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों द्वारा इन सभी जिज्ञासाओं का अत्यंत सरल, स्पष्ट एवं व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत किया गया। इस संवादात्मक सत्र ने विद्यार्थियों को न केवल जानकारी प्रदान की, बल्कि उन्हें अपने विचारों पर गंभीरतापूर्वक कार्य करने के लिए प्रेरित भी किया।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस बात पर बल दिया कि आज के समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता, समस्या-समाधान कौशल, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का विकास करना भी है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि वे अपने विचारों के बल पर समाज में सार्थक परिवर्तन ला सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान एवं अभिनंदन किया गया। तत्पश्चात लक्ष्मीकांत सिन्हा, आईआईसी सदस्य द्वारा आभार प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने  अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेषज्ञों, आयोजन समिति, आईआईसी सदस्यों, प्राध्यापकगण, कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं के प्रति हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस सफल आयोजन में आईआईसी संयोजक एवं कार्यक्रम समन्वयक टेकेश्वर कौशिक की विशेष भूमिका रही। उनके कुशल समन्वय, योजनाबद्ध कार्यप्रणाली और सतत प्रयासों से यह कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित, गरिमामय और प्रभावी ढंग से संपन्न हुआ।

यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह उनके लिए सोच बदलने, क्षमता पहचानने, स्थानीय उत्पादों को अवसर में बदलने, नवाचार को दिशा देने और अपने कार्य को आगे बढ़ाकर पेटेंट तथा स्टार्टअप की ओर ले जाने का प्रेरक मंच सिद्ध हुई। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में यह विश्वास जागृत किया कि अच्छी आदतें, कल्पनाशक्ति, आत्मविश्वास, नवाचार और सही मार्गदर्शन के माध्यम से वे स्वयं के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

 


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