गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नवापारा राजिम, 4 फरवरी। रायपुर रोड स्थित श्री कबीर सत्संग भवन में त्रिदिवसीय संत कबीर सत्संग समारोह में उपस्थित संतों ने अपने-अपने विचार प्रकट किए।
इस अवसर पर सत्संग के तृतीय एवं अंतिम दिवस संत धर्मेंद्र साहेब ने कहा कि, संसारिक जीवन में, सुख और अपनापन का अनुभव सिर्फ और सिर्फ घर में ही अनुभव किया जा सकता है, न कि मकान में। वैसे तो घर और मकान एक ही जैसा महसूस होता है लेकिन मकान में छड़ सीमेंट, गारा ईंटा, व अन्य चीजों से मिलकर जिसका जितना आवक उसका उतना बड़ा मकान होता है नए-नए डिजाइन में बनाते हैं उसमें रहने वाले व्यक्ति साथ रहकर के भी बातचीत नहीं होती है एक दूसरे के मन में ईष्र्या द्वेष भरा रहता है अपनापन का भाव नहीं रहता है सिर्फ आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए एक दूसरे के साथ रहते हैं, व्यवहार खत्म सा रहता है लेकिन घर में रहने वाले व्यक्तियों के मन में यह बात नहीं होती है।घर और मकान में रहने वाले व्यक्तियों के बीच में यही अंतर है कि जीवन जीने की कला का ज्ञान का अभाव जिसके कारण दुख का प्रवेश हो जाना और जीवन कलह में रहता है।
आगे कहा-सभी लोगों को जीवन जीने की कला का ज्ञान लेना जरूरी है सत्संग का लाभ और सत्संग करना भी जरूरी है,इसलिए मकान नहीं घर बनाये जिसमें सुख पूर्वक रहा जा सके दिखाने के लिए मकान मत बनाओ जहां सुकून छिन जाए।
आज के कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्त जनों ने सत्संग का लाभ लिया।
कार्यक्रम में संत विचार साहब संत गुरु भूषण, समेन्द्र साहब,सुरेंद्र जी,समिति अध्यक्ष द्वारिका साहू,सूरज मास्टर,उत्तम साहू, बसंत साहू,यशवंत साहू एवं गायक गुरु शरण साहू एवं सभी का भरपूर सहयोग रहा कार्यक्रम के समापन की घोषणा समिति अध्यक्ष द्वारिका साहू ने आभार व्यक्त कर किया।


