गरियाबंद
लोकनृत्य और भजनों ने बढ़ाई मेले की रौनक
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम, 3 फरवरी। राजिम कुंभ कल्प मेला के सांस्कृतिक मंच पर सोमवार को छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की अनुपम छवि देखने को मिली। पंथी, सुवा, पंडवानी, जस गीत, रामायण, सतनाम भजन, देशभक्ति और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों से मेला परिसर दिनभर गुंजायमान रहा। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक पूर्व महोत्सव स्थल के नदी मंच और नया मेला स्थल के स्थानीय मंच पर कलाकारों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया।
धरसीवा की यामिनी साहू ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी, वहीं राजिम के भोले साहू ने जसगीत के माध्यम से माता के भजनों को प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना बटोरी। परसदाजोशी के श्यामरतन साहू ने रामायण के बालकाण्ड पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामचरितमानस शिक्षा, संस्कार और जीवन मूल्यों को समझने का सशक्त माध्यम है। बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए रामायण पढऩे और सुनने की परंपरा आवश्यक है। बकली के दुर्गेश कुमार भारती ने सतनाम भजन प्रस्तुत किया, जबकि मालगांव (गरियाबंद) के वामन नेताम ने सुंदरकाण्ड की प्रभावशाली व्याख्या की।
फाग गीतों और लोकनृत्य ने बांधा समा
नवीन मेला मैदान चौबेबांधा स्थित स्थानीय मंच पर धौराभाठा के लखनलाल यादव ने पंडवानी के माध्यम से महाभारत के प्रसंग सुनाए। सुंदरकेरा के ओमप्रकाश ने जगराता में माता के भजनों की प्रस्तुति दी। चौबेबांधा के आत्मानंद चेलक की पंथी प्रस्तुति और गणेशपुर की मुस्कान मिश्रा के लोकनृत्य ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। राजिम के भारत धीवर की फाग मंडली, गंजईपुरी के ललित ध्रुव का सुगम गायन और सडक़परसुली की टीना बेला के सुवा नृत्य ने कार्यक्रम को और रंगीन बना दिया।
बारबाहरा के लेखपाल साहू ने लोककला मंच पर छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। नवापारा के बंटी प्रजापति ने भजन संध्या की शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन निरंजन साहू एवं किशोर निर्मलकर ने किया।


