गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
गरियाबंद, 1 फरवरी। विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और व्यवहारिक ज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत गरियाबंद जिले के एलिमेंट्री स्तर के 10 विद्यार्थियों का आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम शहर में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। यह भ्रमण जिला कलेक्टर भगवान सिंह उइके एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर के निर्देशन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर तथा जिला मिशन समन्वयक शिवेश कुमार शुक्ला का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। भ्रमण का संचालन सहायक कार्यक्रम समन्वयक एवं जिला नोडल अधिकारी विल्सन पी. थॉमस के नेतृत्व में किया गया।
इस शैक्षणिक यात्रा के दौरान विद्यार्थियों को देश की रक्षा, विज्ञान, पर्यावरण और पर्यटन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने आईएनएस पनडुब्बी संग्रहालय का अवलोकन किया, जहां उन्हें भारतीय नौसेना की पनडुब्बी प्रणाली, समुद्र में कार्य करने की तकनीक तथा राष्ट्र की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से बताया गया। पनडुब्बी के भीतर जाकर विद्यार्थियों ने वहां की जीवन शैली और तकनीकी संरचना को नजदीक से देखा।
कैलाशगिरी हिलटॉप पार्क भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पहाड़ी भू-आकृति, हरित क्षेत्र संरक्षण और विशाखापट्टनम शहर के प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव किया। यहां से समुद्र और शहर का विहंगम दृश्य बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। विजाग ग्लास ब्रिज पर विद्यार्थियों को आधुनिक इंजीनियरिंग, संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई, जिससे उनमें विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि बढ़ी।
टियू-142 विमान संग्रहालय में भारतीय वायुसेना के समुद्री निगरानी विमान के इतिहास, उपयोगिता और रक्षा क्षेत्र में उसकी भूमिका से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया। इसके पश्चात ऋषिकोंडा बीच एवं आर.के. बीच पर बच्चों को समुद्री जैव विविधता, तटीय पर्यावरण, स्वच्छता एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई।
पूरे भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए सिम्मी विल्सन, जिला पीएमयू टीम से टाकेश्वरी, देवेंद्र कुमार आसनी एवं सनत कुमार की सक्रिय सहभागिता रही।
जिला मिशन समन्वयक शिवेश कुमार शुक्ला ने इस अवसर पर टीम को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढक़र वास्तविक अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों एवं टीम सदस्यों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक प्रयासों को निरंतर जारी रखने की बात कही।


