संपादकीय
मध्यप्रदेश के देवास में अभी इतवार को 42 नौजवान अपने परिवारों सहित एक मंदिर में शादी का इंतजार कर रहे थे। दूल्हे थे, तो जाहिर है कि सजे-धजे थे, रिश्तेदारों को लेकर आए थे। सुबह से रात हो गई, लेकिन न कोई दुल्हन पहुंची, न कोई शादी हुई। बाद में इन निराश और ठगे गए लोगों की शिकायत पर 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने इंदौर के एक अनाथाश्रम की लड़कियों से इनकी शादी करवाने का वायदा किया था, और इसके लिए रजिस्ट्रेशन के नाम पर वसूली की थी। धोखा देने के लिए सोशल मीडिया पर से किन्हीं भी लड़कियों की तस्वीरें निकाल ली गई थीं, और यह भी कहा गया था कि सामूहिक विवाह में सीएम खुद आएंगे, और 51-51 हजार के चेक सबको देंगे। यह भी कहा गया था कि पहले दिन लड़कियों को मिलवाया जाएगा, शादी में दहेज का सामान भी मिलेगा। बीबीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि इनमें से अधिकतर दूल्हों की उम्र 40 साल के आसपास थी, और कुछ दूल्हे 60 साल के भी थे।
भारत में शादी का वायदा करके बालिग या नाबालिग से देहसंबंध बनाना, शादी का झांसा देकर किसी नकली दुल्हन से शादी करा देना जो कि शादी के तुरंत बाद गहने लेकर भाग जाए, ऐसे मामले भारत में आते ही रहते हैं। कुछेक तो ऐसी लुटेरी दुल्हनों की खबरें आती हैं जो कि पेशेवर अंदाज में दर्जन-दर्जनभर लोगों से शादी कर चुकी हैं, और भाग चुकी हैं। कई ऐसी शिकायतें पुलिस तक पहुंचती हैं कि किसी व्यक्ति ने अपना नाम-धरम कुछ और बताया, और शादी के बाद लडक़ी को पता लगा कि वह तो किसी दूसरे धरम का है, और उसका नाम भी कुछ और है। ऐसे कई मामलों में बाद में यह भी निकलता है कि यह ताजी शादी करने वाला दूल्हा असल में बासी है, और पहले से उसके बीवी-बच्चे भी हैं। ऐसे बहुत से धोखे भारत की लड़कियों के साथ देश के बाहर भी होते आए हैं, और अब ऐसे रिश्तों के मामले में भारत सरकार जांच-पड़ताल में मदद भी करती है, किसी दूसरे देश में जाकर गलत रिश्ते में फंस गई, धोखा खा चुकी लडक़ी की मदद तो करती ही है। अधिक जायज यह कहना होगा कि दूसरे देशों में भी वहां बसी हुई लड़कियां या महिलाएं भी भारत के मर्दों को ऐसा ही धोखा देती हैं, जैसा कि वहां से कुछ भारतवंशी मर्द देते हैं।
अब जब भारत में सरकार ने जिंदगी की बहुत सारी चीजों को डिजिटल कर दिया है, और हर नागरिक के पास यह अधिकार है कि वह भारत सरकार के मुफ्त के एप्लीकेशन, डिजिलॉकर पर अपना दस्तावेज रख सकते हैं, तो सरकार को रिश्तों की धोखाधड़ी रोकने के लिए कुछ और पहल भी करनी चाहिए। यह हिफाजत इसलिए जरूरी है कि जिंदगियां तबाह न हों, और फिर यह भी तो है कि किसी भी जुर्म की जांच और मुजरिम को सजा दिलवाने की जिम्मेदारी घूम-फिरकर सरकार पर ही तो आती है। इसलिए सरकारों को यह कोशिश करनी चाहिए कि ऐसी धोखाधड़ी की रोकथाम का तरीका निकाला जाए, ताकि बाद में जुर्म की नौबत ही न आए, न ही जांच और मुकदमे की, और न ही जेल की। यह सब कुछ सरकार और समाज पर बोझ रहता है।
आज जब हिन्दुस्तान में एक सिमकार्ड भी बिना आधार कार्ड के नहीं खरीदा जा सकता, इस किस्म के आधा-एक दर्जन पहचानपत्र में से किसी के बिना न राशन कार्ड बन सकता, न पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हो सकती, और न ही ड्राइविंग लाइसेंस बन सकता। ऐसे में सरकार को यह चाहिए कि किसी भी तरह की मैच मेकिंग के लिए आधार कार्ड या किसी दूसरे पहचानपत्र के आधार पर शिनाख्त का एक तरीका मुहैया कराए। हमारी नजर में यह एक बड़ा आसान तरीका रहेगा जिसमें लोगों को डिजिलॉकर में अपने सारे पहचानपत्र, और जरूरी दस्तावेज डालने के लिए बढ़ावा दिया जाए। इसके बाद किसी को काम पर कर्मचारी या कामगार को रखना है, किसी को रिश्ता करना है, किसी को ट्यूशन के लिए शिक्षक तय करना है, तो ऐसे सब मौकों पर लोग एक-दूसरे को अपना आधार कार्ड, या अपना दूसरा पहचानपत्र चाहें तो दे सकते हैं, और आगे की जांच के लिए लोग भारत सरकार के किसी मोबाइल ऐप पर जाकर उन नंबरों को डालकर देख सकते हैं कि जानकारी सही या नहीं। ऐसी सहूलियत का बेजा इस्तेमाल न हो, इसलिए आज भी आधार-ओटीपी की व्यवस्था रहती है, और जब तक लोग अपने फोन पर आया हुआ ओटीपी नहीं देते हैं, उनके आधार कार्ड का कोई ऑनलाईन इस्तेमाल नहीं हो सकता। आज अगर कोई अपने को किसी एक जात-धरम का बता रहे हैं, अपनी कुछ उम्र बता रहे हैं, अपना कोई पता बता रहे हैं, तो उनसे कोई भी संपर्क या संबंध रखना चाहने वाले लोग उनसे आधार-पड़ताल की मांग कर सकते हैं। आज किसी के ड्राइविंग लाइसेंस को देखकर उसे काम पर रखना पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहता। ड्राइविंग लाइसेंस के नंबर से कुछ साबित नहीं होता। ऐसे हर मामले में लोगों को आधार कार्ड की मांग करके कार्डवाले व्यक्ति की इजाजत से ऑनलाईन यह देख लेना चाहिए कि उनकी बताई गई जानकारी सही है या नहीं।
इसमें कहीं भी निजता प्रभावित नहीं होती है, क्योंकि जो लोग चाहेंगे, वे ही अपना आधार कार्ड दिखाएंगे, और उसकी जांच की इजाजत के लिए आया हुआ ओटीपी बताने पर ही उनकी जानकारी उजागर हो सकेगी। यह एक ऐसी सहूलियत हो सकती है, जो लोगों की अनुमति से ही इस्तेमाल की जा सके। ऐसा होने पर लोगों का धोखा खाना कम होने लगेगा। यह भी हो सकेगा कि लोग आगे शक होने पर अपनी शिनाख्त साबित करने के लिए डिजिलॉकर पर अपने डाले हुए बाकी दस्तावेज भी देखने की इजाजत दे सकेंगे। लोग जब किसी से शादी करना चाहते हैं, तो अपने बारे में ऐसी बुनियादी जानकारी दिखाकर अपनी पुख्ता शिनाख्त साबित कर सकते हैं। चूंकि यह पूरा सिलसिला शुरू से आखिर तक वैकल्पिक रहेगा, इसमें कुछ भी जबर्दस्ती या अनिवार्य नहीं होगा, इसलिए किसी की जिंदगी की गोपनीयता खत्म नहीं होगी। आज भी किसी निजी कंपनी में भी नौकरी पाने के लिए जब अर्जी भेजी जाती है, तो उसके साथ कुछ लोगों का हवाला भी देना पड़ता है, जिन्हें फोन करके कंपनी आवेदक के बारे में दरयाफ्त कर सके।
भारत सरकार को पड़ताल, या ऐसे किसी और नाम वाला एक मोबाइल ऐप बनाकर देश का आधार-डाटा, डिजिलॉकर का डाटा, और बाकी किस्म की शिनाख्त-जानकारी ऑनलाईन रखने का एक इंतजाम करना चाहिए। जो शरीफ लोग होंगे, उन्हें जरूरत के समय अपनी पहचान साबित करने से कोई परहेज नहीं होना चाहिए। जो लोग अपनी पहचान उजागर करने के साथ उसकी आगे जांच-पड़ताल के लिए आधार-ओटीपी देंगे, उनके ऑनलाईन रिकॉर्ड से यह भी दिख जाना चाहिए कि उनके नाम पर कोई जुर्म दर्ज हैं क्या। जिन लोगों को अपने जुर्म छुपाने की जरूरत हो, वे लोग अपने आधार कार्ड, और उसके इस्तेमाल के लिए आने वाले ओटीपी देने से मना कर सकते हैं। अगर केन्द्र सरकार ऐसा इंतजाम करेगी, तो देश में हर दिन धोखाधड़ी के दसियों हजार मामले कम हो जाएंगे। जिन लोगों को शिनाख्त उजागर न करनी हो, या जिन लोगों को बिना शिनाख्त की पड़ताल के लोगों को काम पर रखना हो, शादियां करनी हो, उनका हिसाब-किताब वे लोग जानें, उनके लिए बाद में थाना और कोर्ट-कचहरी तो खुले रहेंगे ही। डिजिटल-इंडिया का जो नारा है, उसका एक तर्कसंगत विस्तार करने की जरूरत है, जब बहुत सारी चीजें डिजिटल हैं, तो उनका इस्तेमाल रोजाना की धोखाधड़ी को घटाने का एक विकल्प जनता को देने में किया जाना चाहिए। जो इस विकल्प का इस्तेमाल करना नहीं चाहते, उनके लिए सब कुछ आज की तरह जारी रह सकता है, उन्हें इस सावधानी के इस्तेमाल के लिए मजबूर करने की कोई जरूरत नहीं है। (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)


