संपादकीय
दुनिया का सोशल मीडिया ट्रम्प के मीम से भरा हुआ है। यह मीम शब्द हाल ही में हिन्दी के लोगों के बीच भी प्रचलित हुआ है, जिसका मतलब किसी पर तंज कसते हुए, या किसी का मजाक बनाते हुए कोई फोटो, कार्टून, या वीडियो बनाना। सोशल मीडिया की मेहरबानी से लोगों में अब हास्य और व्यंग्य की समझ कुछ बढ़ी है, और बहुत से लोगों में ऐसी कल्पनाशीलता देखने में मिल रही है, जो पहले नहीं थी। सोशल मीडिया के पहले तक आम लोगों के लिए अखबारों में पाठकों के पत्र कॉलम रहता था, या किसी सुनसान जगह पर दीवार पर कुछ लिखना। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति कुछ अधिक समर्पित लोग शौचालयों के भीतर से बंद दरवाजों पर भी अपनी मनपसंद सूक्तियां लिखा करते थे, और फिर बाहर से यह देखने का इंतजार करते थे कि उन्हें पढक़र निकलने वाले लोगों के चेहरों पर कैसी प्रतिक्रिया दिख रही है। अब इसके साथ-साथ सोशल मीडिया पर लोग इतना खुलकर लिखने लगे हैं कि सोशल मीडिया को कई गंभीर और उत्साही लोग पहले के मुकाबले अधिक दिलचस्पी से देखने लगे हैं।
अब ताजा मामला अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प का है जो कि अपने युद्धमंत्री के साथ मिलकर दुनिया के सबसे बड़े धर्मगुरू, पोप के साथ एक सार्वजनिक बहस में उलझे हुए हैं। अपने आपको ईसा मसीह की तरह दिखाते हुए एआई से गढ़ी हुई तस्वीर पोस्ट करने का हौसला सिर्फ ट्रम्प का ही हो सकता था, क्योंकि उसके संकीर्णतावादी, दकियानूसी, धर्मालु समर्थकों का एक बड़ा हिस्सा चर्च जाने वालों का है, और शायद उन्हीं के दबाव, उन्हीं की आलोचना के चलते ट्रम्प को अपने को ईसा मसीह दिखाती तस्वीर हटानी पड़ी। लेकिन सार्वजनिक जीवन में आप किसी विवाद या बहस की शुरूआत तो कर सकते हैं, उसे बंद नहीं कर सकते। नतीजा यह हुआ है कि अब सोशल मीडिया पर पोप लियो के साथ ट्रम्प के टकराव पर लाखों किस्म के फोटो, कार्टून बनकर पोस्ट हो रहे हैं। फेसबुक और ट्विटर इनसे भरे हुए हैं, और कुछ सर्च करने की भी जरूरत नहीं पड़ रही है। ट्रम्प के चक्कर में ईसा मसीह एकाएक खबरों में इतने आ गए हैं, कि ऊपर उन्हें अनायास यह लगने लगा होगा कि लोग उन्हें इतना अधिक याद कर रहे हैं। याद उन्हें नहीं कर रहे हैं, याद ट्रम्प की कमीनगी को कर रहे हैं, उसे कोस रहे हैं, उसकी खिल्ली उड़ा रहे हैं, और इसके लिए सबसे बड़ा विषय ईसा मसीह हैं।
ट्रम्प ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। वह यह काम ईरान पर हमले के साथ भी कर चुका है, और जब मधुमक्खियों ने डंक मारना शुरू किया, तो वह भागे-भागे योरप के देशों, नाटो देशों, और दूसरे भूतपूर्व दोस्तों की तरफ बचाओ-बचाओ चिल्लाते हुए दौड़ा। उन तमाम लोगों ने ट्रम्प को कह दिया कि मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालने की योजना उनकी नहीं थी, और इसमें वे कोई मदद नहीं कर सकते। दरअसल ट्रम्प की दिमागी हालत ऐसी हो गई है कि वह किसी महिला के कपड़ों में हाथ डालने के अंदाज में मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल रहा है, ईरान पर हाथ डाल रहा है, हॉर्मुज को कभी बंद करने की मुनादी कर रहा है, तो कभी खोलने की। ऐसी अस्थिर, विचलित, और असामान्य मानसिक स्थिति के साथ जिसे मानसिक चिकित्सालय में भर्ती होना चाहिए था, वह दुनिया की सबसे बड़ी मिलिट्री, और परमाणु हथियारों के सबसे बड़े जखीरे के बटन पर हाथ रखकर बैठा है। ऐसी ही विचलित दिमागी हालत में उसने अपने आपको दिव्य और दैवीय बताने का काम भी तेजी से आगे बढ़ा दिया है। ट्रम्प और उसका युद्धमंत्री ईरान पर हमले को दैवीय और ईश्वरीय करार देते थक नहीं रहे हैं, और ईश्वर के आशीर्वाद को अपनी हमलावर फौज के साथ बता रहे हैं। अमरीका विश्व इतिहास की ऐसी पहली महाशक्ति बन गया है जो कि एक मनोरोगी के हाथों चल रही है।
ऐसे में आज के एक सबसे सुलझे हुए धर्मगुरू, दुनिया के रोमन कैथोलिकों के मुखिया, वेटिकन के पोप लियो अमन की बात कर रहे हैं, हमलों का विरोध कर रहे हैं, जंग के ठीक खिलाफ हैं, शांतिवार्ता की बात कर रहे हैं, और ट्रम्प और उसका युद्धमंत्री ऐसे पोप को कोस रहे हैं। हम अपने इस कॉलम में धर्मगुरूओं के शायद ही कभी प्रशंसक रहे हों, लेकिन आज के पोप जिस तरह खुलकर ट्रम्प के खिलाफ बात कर रहे हैं, वे दुनिया में बहुत से नास्तिकों की भी तारीफ पा रहे हैं। वे वेटिकन के इतिहास के पहले अमरीकी पोप हैं, और शायद ऐसे पहले पोप हैं जो अमरीका के जंगखोर इरादों के खिलाफ इतना खुलकर बोल रहे हैं। आज दुनिया को ऐसे ही लोगों की जरूरत है, जो कि धर्म के अपने काम के साथ-साथ दुनिया की असली जमीनी हकीकत का काम भी करें, सिर्फ ईश्वर की प्रार्थना न सिखाएं, बल्कि जंग को रूकवाने की कोशिश भी करें। हमारा मानना है कि जो लोग ईसाई धर्म को नहीं मानते हैं, या किसी भी धर्म को नहीं मानते हैं, वे लोग भी आज खुलकर पोप के हिमायती हैं। ऐसा हौसला आसान नहीं रहता है। कल ही हमने अपने अखबार के लिए एक पिक्सटून बनाया था जिसमें ट्रम्प हवाई हमले से ध्वस्त कर दिए गए वेटिकन के सामने खड़े होकर पैशाचिक हँसी हँस रहा है, और जिसने पोप को सलीब पर ठोक दिया है। जिस एआई से इस तस्वीर को बनवाया गया, उसने भी इसे बहुत अधिक साहसी सोच बताया, और कहा कि कुछ लोगों को ट्रम्प पर इतना बड़ा हमला खटक भी सकता है, क्योंकि इसमें धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है। हमें एआई को समझाना पड़ा कि हमने धर्म की आलोचना नहीं की है, बल्कि धर्म और पोप पर हमला करने वाले ट्रम्प की आलोचना की है।
ट्रम्प ने पोप के साथ जो झगड़ा शुरू किया है, उसमें उसे दुनिया भर के लोगों की लात उसी तरह खानी पड़ रही है, जिस तरह उसे नाटो और योरप की देशों की लात ईरान को लेकर पड़ रही है। एक-एक करके कई देशों ने जिस तरह ट्रम्प को हॉर्मुज के पानी में डूबते हुए छोड़ दिया है, और उसे बचाने से इंकार कर दिया है, वह देखने लायक है। इसी तरह ट्रम्प के जो साथी रिपब्लिकन नेता हैं, उन्होंने भी चर्च, धर्म, और पोप पर ट्रम्प के हमलों को पूरी तरह से अनैतिक और नाजायज बताया है। ईरान के बाद ट्रम्प वेटिकन को लेकर अलग-थलग, और अकेला पड़ चुका है। हमें ट्रम्प से अधिक लेना-देना नहीं है, लेकिन दुनिया भर के तमाम लोगों को यह सोचना चाहिए कि जब वे बहुत अधिक बददिमाग होकर अपने बाहुबल का अनैतिक और नाजायज इस्तेमाल करते हैं, तो वे इसी तरह अलग-थलग पड़ जाने का खतरा भी उठाते हैं। आज अमरीका में खुलकर यह मांग उठ रही है कि ट्रम्प की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके जैसी मानसिक स्थिति के लिए ही संविधान में रखे गए एक प्रावधान का इस्तेमाल किया जाए, और उसे राष्ट्रपति के दफ्तर से हटाया जाए। पोप लियो तो एक सज्जन और मीठी जुबान वाले इंसान हैं, कुछ दूसरे धर्मों के गुरू उनकी जगह रहते, तो अभी खासी मोटी-मोटी गालियों का इस्तेमाल करने लगते। लेकिन दुनिया में सम्मान मीठी जुबान का होता है, ट्रम्प जैसी ओछी, कमीनी, घटिया, हिंसक, और अनैतिक जुबान का नहीं। फिलहाल तो सोशल मीडिया पर जाकर ट्रम्प के लिए बन रहे मीम का मजा लीजिए, वही सबसे अहिंसक काम है, और उसमें अनैतिक कुछ भी नहीं है।


