संपादकीय
एक केन्द्रीय शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई, के 12वीं के इम्तिहान के मूल्यांकन को लेकर जिस तरह की गड़बडिय़ां सामने आई हैं, उनसे पूरी परीक्षा प्रणाली और व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बहुत बुरी आंच आई है। भारत में एक के बाद एक, दाखिला या नौकरी इम्तिहान को लेकर विवाद
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चलते ही रहता है, चाहे वह केन्द्र सरकार का जिम्मा हो, चाहे राज्य सरकारों का। बेरोजगारों का मानना रहता है कि नौकरी रिश्वत से मिलती है, और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में पीएससी के पुराने घोटाले अभी दशकों बाद भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचकर पड़े हुए हैं, जिनका दावा सरकारी नौकरियों पर बनता है, वे अब तक इंसाफ के इंतजार में खड़े हैं, और जिन्हें गलत किस्म से नौकरी मिलने की तोहमत लगी है, वे फैसला आने तक शायद रिटायर भी हो जाएं। मध्यप्रदेश, राजस्थान, एक के बाद एक कई प्रदेशों में तरह-तरह के इम्तिहानों का भ्रष्टाचार, पेपर आऊट, सामूहिक नकल से बुरा हाल रहा है। अभी देश की किसी भी किस्म की चिकित्सा शिक्षा के लिए होने वाले दाखिला इम्तिहान, नीट, के पेपर बड़े पैमाने पर पूरी तरह लीक हो जाने की बात पहली नजर में ही साबित हो जाने के बाद उसे रद्द कर दिया गया, और कल की खबर है कि देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बंगले पर हुई बैठक में यह तय किया गया कि उनकी अगुवाई में अगले महीने की नीट परीक्षा के पर्चे वायुसेना अलग-अलग जगहों पर पहुंचाएगी, सेना की मदद ली जाएगी, और ऐसा सोचा जा रहा है कि इम्तिहान के प्रश्नपत्रों को बैंकों में रखने के बजाय फौजी ठिकानों पर रखा जाए। यह दुनिया के इतिहास में शायद पहला मौका होगा, जब शांतिकाल में, बिना किसी आपातकाल के, बिना किसी मेडिकल इमरजेंसी के, सिर्फ पेपर लीक रोकने के लिए वायुसेना, और फौज का इस्तेमाल किया जाएगा। भला कौन यह सोच सकते थे कि मेडिकल दाखिला इम्तिहान की तैयारी बैठक प्रतिरक्षा मंत्री के घर पर होगी, और सरकारी समाचार बताएगा कि प्रधानमंत्री इस तैयारी पर नजर रख रहे हैं!
22 लाख बच्चों वाली नीट इम्तिहान तबाह हो जाने के बाद कई बच्चे खुदकुशी कर चुके हैं, और इन बच्चों के परिवार में जो बेचैनी आई है, इम्तिहान अगले महीने दुबारा होने की वजह से परिवारों की गर्मियों की छुट्टियां जिस तरह तबाह हुई हैं, उनसे लगता है कि करीब एक करोड़ या उससे अधिक लोग ही नीट की असफलता से प्रभावित हुए हैं। अब इसके बाद करीब 18 लाख बच्चों वाली सीबीएसई के बोर्ड इम्तिहान की उत्तरपुस्तिकाएं ऑनलाईन जांचने में जो गड़बडिय़ां हुई हैं, वे देश के करोड़ों छात्र-छात्राओं, और उनके परिवारों को सदमा पहुंचाने वाली हैं। अब जब सरकार ने यह माना है कि कुछ मामलों में गड़बडिय़ां हुई हैं, और ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें उत्तरपुस्तिकाएं ऑनलाईन डाली गईं, तो वे इतनी धुंधली थी कि जांचने वाले शिक्षक उन्हें पढ़ नहीं पा रहे थे, जिन छात्र-छात्राओं ने अपनी उत्तरपुस्तिकाएं मांगीं वे यह देखकर सदमे में आ गए कि कई प्रश्नों के उत्तर जांचे नहीं गए, या नंबर जोड़े नहीं गए। अब केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने यह माना है कि सीबीएसई इम्तिहान में परीक्षार्थियों के लिखे गए 40 करोड़ पन्नों की जांच में बड़ी चूक हुई है। करीब 4 लाख छात्र-छात्राओं ने दुबारा जांच के लिए आवेदन किया है। जब तकनीकी सिस्टम इस हद तक खराब साबित हो चुका है, कि किसी की कॉपियां किसी और नंबर पर चढ़ा दी गई हैं, किसी की कॉपियों के पन्ने गायब हैं, तो इन 4 लाख के आवेदनों से परे भी विश्वसनीयता खत्म है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री की कल की बैठक में आईआईटी के प्रोफेसरों को भी बिठाया गया था, और सरकार ने यह दिखाने की कोशिश की कि उसका तकनीकी सिस्टम एकदम ठीक है। दूसरी तरफ 19 साल के एक छात्र निसर्ग अधिकारी का दावा है कि सीबीएसई की वेबसाइट को उसने बड़ी आसानी से हैक कर लिया, और इसकी सुरक्षा एकदम कमजोर होने के बारे में उसने भारत सरकार को फरवरी में ही अलर्ट कर दिया था। उसने अपने सार्वजनिक ब्लॉग में लिखा है कि सीबीएसई पोर्टल में दाखिला और छेडख़ानी आसानी से हो सकते हैं।
इस बीच यह भी देखने की जरूरत है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अभी कुछ दिन पहले जब सीबीएसई इम्तिहान में गड़बड़ी का बयान दिया, तो केन्द्र सरकार और सीबीएसई बोर्ड दोनों ने जमकर उनकी बात का खंडन किया था। सरकार में तो राजनीतिक लोग रहते हैं, उनका तो राजनीतिक जवाब देना समझ में आता है, लेकिन बोर्ड ने भी राहुल के आरोपों का आनन-फानन खंडन किया था, और उन्हें गुमराह करने वाला बताया था। अब शिक्षा मंत्री ने इन सब खामियों, और गड़बडिय़ों की जिम्मेदारी खुद ली है। सीबीएसई को लेकर राहुल से परे भी, जब एक परीक्षार्थी लडक़े ने सोशल मीडिया पर उसकी उत्तरपुस्तिकाओं को लेकर हुई धांधली के बारे में लिखा, तो दसियों हजार लोगों ने उसे धिक्कारना शुरू कर दिया, और कुछ जाने-माने लोगों ने उसे देशद्रोही और पाकिस्तानी करार देना भी शुरू कर दिया था, बाद में बोर्ड ने खुद माना कि उसकी उत्तरपुस्तिकाओं में गड़बड़ी हुई थी। एक छोटे से स्कूली बच्चे, वह भी हिन्दू बच्चे की शिकायत सही साबित होने के पहले ही उसे गद्दार साबित करके पाकिस्तान भेजने के फतवे दिए जाने लगे थे।
सरकारों को अपनी खामियों और नाकामियों को मंजूर करना आना चाहिए। चाहे प्रभावित लोग हों, चाहे सामाजिक कार्यकर्ता, मीडिया, या विपक्ष, जिस किसी से मिली जानकारी से सरकारें अपनी गड़बड़ी ठीक कर सकती हैं, उनकी बात का सम्मान किया जाना चाहिए। परिपक्व लोकतंत्रों में सावधान करने वाले, विसल ब्लोअर का सम्मान किया जाता है, उसे देश से निकालने का फतवा नहीं दिया जाता। नीट के 22 लाख बच्चों और सीबीएसई के 18 लाख बच्चों की दिमागी हालत देखें, तो आज सरकार की असफलता से इन 40 लाख बच्चों का वर्तमान बिगड़ गया है। ये संदेह के बीच कई हफ्ते या महीने गुजारेंगे, और दुबारा इम्तिहान, पुनर्मूल्यांकन के बाद भी उनका पूरा भरोसा नहीं लौट पाएगा। इस नौबत की गंभीरता को भी अगर सरकार नहीं समझेगी, तो ऐसी और गलतियां भी होती रहेंगी। सरकारों को आरोपों का राजनीतिक जवाब देने के पहले अपने घर को भी जांच-परख लेना चाहिए, वरना जैसी शर्मिंदगी की नौबत आज है, वह आती रहेगी।


