संपादकीय
ईरान पर अमरीकी और इजराइली हमलों के बीच एक-दो बड़ी अटपटी बातें सामने आई हैं। ट्रम्प सरकार, और कैथोलिक ईसाईयों के मुख्यालय, वेटिकन के बीच जो टकराव चल रहा है, वह राजा और धर्म के बीच टकराव का एक अनोखा मामला है। इतिहास आमतौर पर राजा की हिंसा का साथ देने वाले धर्म की मिसालों से भरा हुआ है। अलग-अलग देश, अलग-अलग राजा, या अलग-अलग शासन प्रणालियां, और उनमें से हर किसी के सबसे बुरे फैसलों का भी साथ देता हुआ धर्म, यही सबसे आम बात है। लेकिन खास बात इस बार यह है कि ट्रम्प सरकार इस जंग को धर्म के नाम पर लड़ रही है, और पोप यह साफ कर रहे हैं कि दुनिया का कोई हमला धर्म और ईश्वर के नाम पर नहीं किया जा सकता। तनातनी कुछ आगे तक बढ़ गई है, और अभी नौबत यह पहुंच गई कि खबरें बताती हैं कि अमरीकी रक्षा विभाग, पेंटागन ने अमरीका में पोप के दूत, कार्डिनल को बुलाकर फटकार लगाई है, और कहा है कि चर्च को अमरीका का साथ देना चाहिए, क्योंकि अमरीका के पास अपनी मर्जी पूरी करने की ताकत है। ऐसा पता चला है कि वेटिकन ने इस धमकी के जवाब में अमरीका की 250वीं सालगिरह के जलसे में शामिल होने का न्यौता ठुकरा दिया है, और पोप के प्रस्तावित अमरीकी दौरे को रद्द कर दिया है।
यह बात कुछ अटपटी इसलिए है कि अमरीका के ताजा इतिहास में धर्म का इतना अधिक और बेजा इस्तेमाल करके और कोई सरकार नहीं बनी थी। ट्रम्प ने सत्ता में आने के पहले, और आते ही चर्च को खुश करने के लिए और कट्टर धर्मालुओं को संतुष्ट करने के लिए गर्भपात के खिलाफ तरह-तरह की कार्रवाई की। ट्रम्प के सबसे करीबी लोग अपने को धर्म का बड़ा झंडाबरदार कहते हैं, और ऐसे में पोप के साथ एक निहायत ही गैरजरूरी और नाजायज जुबानी जंग कुछ हैरान भी करती है। ईरान पर हमला शुरू होने के वक्त से ट्रम्प और उसके करीबी मंत्रियों ने फौजी कार्रवाई को ईश्वर की इच्छा, और न्यायसंगत युद्ध की तरह पेश किया। ट्रम्प की टीम अमरीका की फौजी ताकत को दुनिया में अच्छाई लाने का जरिया करार दे रही है। अमरीकी मूल के पहले पोप बने, वर्तमान, पोप लियो ने इसे सार्वजनिक रूप से ईश्वर के नाम का दुरूपयोग कहा, और कहा कि युद्ध कभी भी ईश्वर की इच्छा नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा कि इसे सभ्यताओं की जंग कहना पूरी तरह गलत है। जंग का साथ देने के लिए ट्रम्प सरकार के दबाव पर वेटिकन ने यह साफ किया कि ताकत सच का पैमाना नहीं हो सकता। पोप ने इस बारे में कहा कि ईश्वर कमजोरों और मजदूरों के साथ है, न कि मिसाइलों और परमाणु बमों के।
दरअसल ट्रम्प सरकार आने के बाद से, और ईरान की जंग छिडऩे के बीच भी पोप ने (और पिछले पोप फ्रांसिस ने भी), अपनी चिट्ठियों में यह लिखा है कि प्रकृति की बर्बादी ईश्वर की रचना का अपमान है। यह बात पर्यावरण को बर्बाद करने के संदर्भ में भी मानी जाती है, और जंग या दूसरी मानव निर्मित आपदाओं से होने वाली प्रकृति की बर्बादी के संदर्भ में भी। अमरीकी राजनीति में एक तबका चर्च के ऐसे बयानों को राजनीति कहकर खारिज करता है, जबकि पोप ने इस मुद्दे को उठाना, चर्च का धार्मिक कर्तव्य माना है। ट्रम्प सरकार की असाधारण और अभूतपूर्व सख्त प्रवासियों पर कार्रवाई का विरोध करते हुए पोप ने कहा है कि प्रवासियों को रोकना ईसाई मूल्यों के खिलाफ है, क्योंकि ईश्वर हर इंसान में बसता है। पोप ने अमरीकी सरकार की नीतियों को मानवीय गरिमा का हनन भी बताया था। वर्तमान पोप लियो ने अमरीकी सरकार के जंग को लेकर धर्म के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति की है। दरअसल अमरीकी रक्षा (जंग) मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान में फंसे एक अमरीकी पायलट के बचाव की तुलना ईसा मसीह के पुनर्जन्म से की थी, और कहा था कि यह पायलट ईस्टर के दिन फिर से जीवित हुआ है, और ईश्वर की कृपा अमरीका पर है। इस मंत्री ने इस जंग को सीधे यीशु मसीह के नाम पर लड़ा जाने वाला युद्ध बताया था, और कहा था कि अमरीकी सैनिकों को असीमित हिंसा की ताकत ईश्वर से मिले, जिसमें दुश्मनों के लिए दया की कोई जगह न हो। इसके बाद ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर धमकी दी थी कि आज रात एक पूरी सभ्यता (ईरान) खत्म हो जाएगी, साथ-साथ ट्रम्प ने यह इशारा भी किया था कि यह विनाश ईश्वरीय न्याय का एक हिस्सा है क्योंकि वे अमरीका को ईश्वर समर्थित देश मानते हैं।
अमरीका के शिकागो में जन्मे पोप लियो ने अपनी अमरीकी जड़ों के बावजूद वेटिकन से ही अमरीकी सरकार के खिलाफ एक मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि ईश्वर जंग को आशीर्वाद नहीं देता, जो कोई भी ईसा मसीह के शिष्य हैं, वे कभी भी बम गिराने वालों के साथ खड़े नहीं हो सकते। ईसाई धर्म के एक प्रमुख समारोह, पाम संडे के संदेश में पोप ने एक धार्मिक आयत का हवाला देते हुए अमरीकी नेताओं से कहा- भले ही तुम कितनी भी प्रार्थनाएं करो, ईश्वर नहीं सुनेगा, क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से सने हैं। पोप ने युद्ध के लिए ईश्वर के नाम का इस्तेमाल करने को ईशनिंदा करार दिया, और कहा कि ईश्वर को अंधेरे (जंग) के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, वह केवल रौशनी और शांति का प्रतीक है।
राजा और धर्म के इतिहास में झांकने पर एक नजर में यही दिखते आया है कि धर्मगुरूओं ने हमेशा ही राजा को देवदूत करार देने की कोशिश की, उसे ईश्वर का प्रतिनिधि बताया, और मध्यकाल में योरप के कई युद्धों के दौरान चर्च ने युद्धों को पवित्र घोषित किया था, और राजाओं को यकीन दिलाया था कि जंग में हिंसा करना पाप नहीं, बल्कि जन्नत या स्वर्ग पाने का रास्ता है। भारत सहित दुनिया के दूसरे देशों में जंग के लिए जाने वाले राजाओं को आशीर्वाद देने वाले धर्मगुरूओं, या पुजारियों का लंबा इतिहास है। दरबारों में राजपुरोहितों को इसीलिए रखा जाता था कि वे राजा के तमाम किस्म के नाजायज फैसलों को जायज ठहराकर जनता को धोखे में रख सके। लेकिन इक्का-दुक्का मामले इसके खिलाफ भी हुए हैं।
रोम में जब एक सम्राट ने एक विद्रोह को कुचलने के लिए हजारों लोगों का कत्ल करवा दिया, तो मिलान के बिशप ने सम्राट को चर्च में घुसने से रोक दिया, और कहा कि तुम्हारे हाथ खून से सने है। ऐसे कुछ और मामले भी इधर-उधर दर्ज हैं, लेकिन अमूमन चर्च, या दूसरे धर्म, अपने इलाके के राजा का साथ उसी तरह देते आए हैं, जिस तरह कबीले के सरदार का साथ कबीले के बैगा-गुनिया देते थे। धर्म और अंधविश्वास को राजा पालता था, और ये दोनों राजा की हिफाजत में चौकीदारी करते थे, जनता को बरगलाकर रखते थे। ऐसे में आज जब दुनिया में सबसे अधिक आबादी, करीब 140 करोड़ लोगों के अकेले मुखिया पोप ने अमरीका की जंगखोर सरकार के खिलाफ सार्वजनिक बयानों के रास्ते एक मोर्चा खोल रखा है, तो वे धर्म की एक बिल्कुल नई भूमिका सामने रख रहे हैं। आमतौर पर कोई धर्म ट्रम्प जैसे ताकतवर और बददिमाग-बेदिमाग से उलझने की नहीं सोचता, लेकिन पोप लियो ऐसा कर रहे हैं, और चर्च के, दुनिया के इतिहास में इस बात का खास जिक्र किया जाएगा। दुनिया के कुछ दूसरे धर्मों के कुल अनुयायी पोप को मानने वाले कैथोलिक ईसाईयों के मुकाबले अधिक हो सकते हैं, लेकिन किसी भी दूसरे धर्म में कोई एक अकेला व्यक्ति इतनी बड़ी धर्मसत्ता नहीं है। जिन्हें पता न हो, वे यह बात जान लें कि वेटिकन को दुनिया के तकरीबन तमाम देशों ने एक देश का दर्जा हुआ है, और पोप को उस देश के मुखिया का दर्जा हर देश में दिया जाता है। आज अमरीकी गुंडागर्दी, और जुर्म के मुकाबले जुबान खोलना जिस किसी ने भी अपनी जिम्मेदारी समझी है, उनका नाम इतिहास में अलग से लिखा जाएगा। धर्म को लेकर हमारे मन में जो आम हिकारत रहती है, वह पोप लियो के इस ताजा रूख, और ताजा बयानों से इस पल के लिए हटी है। आगे-आगे देखें, होता है क्या।


