संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : एआई से बने बंदर, या पोर्नो से असली इंसानों के पेट पर पड़ रही लात
30-Dec-2025 6:49 PM
 ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : एआई से बने बंदर, या पोर्नो से असली इंसानों के पेट पर पड़ रही लात

एआई के बारे में लिखते हुए थकने की नौबत ही नहीं आती। जब तक आज का यह संपादकीय लिखना पूरा होगा, तब तक दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में कई और चीजें इतनी जुड़ चुकी होंगी, कि आज की आखिरी लाईन लिखने के बाद कल के लिए पहली लाईन लिखना फिर शुरू किया जा सकता है। अब एक खबर यह आई है कि एआई से तरह-तरह के वीडियो बनाकर लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं, और उन्हें बड़ी संख्या में दर्शक मिल रहे हैं। यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की संख्या से ही कमाई जुड़ी रहती है, जितने अधिक दर्शक, उतनी ही अधिक कमाई, इसलिए इस प्लेटफॉर्म पर लोगों का अकेला मकसद अधिक से अधिक दर्शक पाना रहता है। इस काम में लोग पहले से वीडियो बनाते आए हैं, लेकिन अब एआई की मदद से घटिया वीडियो बनाकर इंसानों के बनाए हुए असली वीडियो से अधिक कमाई हो रही है। अभी अमरीका में किए गए एक शोध में यह पता लगा है कि भारत में ऐसा एक चैनल, बंदर अपना दोस्त, है जो भारत में सबसे अधिक देखा जा रहा है, और 240 करोड़ बार देखे गए इसके वीडियो की वजह से इसे 35 करोड़ तक कमाई का अंदाज है। कहने के लिए एआई की मदद से बनाए गए घटिया वीडियो को स्लॉप कहा जाता है, यानी कचरा या बेकार। लेकिन ऐसे वीडियो धड़ल्ले से चल रहे हैं, और सच तो यह है कि ये इंसानों के हक को भी खा रहे हैं।

 
एआई वीडियो शुरू होने के पहले एक वीडियो बनाने के लिए, लेखक, कैमरापर्सन, एंकर, एडिटर, कई लोग लगते थे, संगीत देने वाले लगते थे। अब एआई अकेला ही मुफ्त में ये सारे काम कर दे रहा है। और तो और कंटेंट भी एआई सुझा देता है, उस पर आपके कोई सुझाव हों, तो उन्हें तुरंत ही जोड़-घटाकर वह पलक झपकते नया कटेंट बना देता है। हम अपने इस अखबार में संपादकीय के लिए कभी विषय तलाशते हुए अलग-अलग एआई औजारों से कहते हैं कि कोई विचारोत्तेजक विषय एडिटोरियल, या वीडिटोरियल के लिए 25-25 शब्दों में सुझाएं, तो एआई आधे मिनट के भीतर ही ऐसे 25 विषय सुझा देता है, और कभी-कभी इनमें से कोई विषय काम का रहने पर उसके बारे में और विस्तार से पूछने पर भी वह जानकारी दे देता है। ऐसी जानकारी हम अपने संपादकीय पेज पर एक लेख की तरह चैटजीपीटी के हवाले से, उससे मिलते-जुलते एक काल्पनिक नाम, चित्रगुप्त नाम से प्रकाशित भी कर देते हैं। लेकिन हम तो बिल्कुल ही बचकानी पूछताछ करते हैं, असली पेशेवर लोग तो एआई का इस्तेमाल धोबी की गधे की तरह खूब सारा बोझ लादकर करते हैं, और वे उससे वीडियो, संगीत, सभी कुछ बनवा लेते हैं। अब जो होनहार या प्रतिभाशाली, मौलिक और रचनात्मक लोग अभी तक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते थे, उनके पेट पर एआई की लात बड़ी जोर की पड़ी है। कहने के लिए तो इंटरनेट पर सभी के लिए बहुत सी जगह है, लेकिन दुनिया की आबादी तो सीमित है, और उनमें से जिन लोगों की पहुंच इंटरनेट तक है, उनकी जिंदगी इस काम के लिए घंटे भी सीमित हैं। अब उन घंटों को अगर एआई-सामग्री चुराने लगे, तो जिनका पेट और मुंह है, वे तो भूखे रह जाएंगे। यह सिलसिला अभी शुरू ही हुआ है, आगे यह कहां तक पहुंचेगा, इसका ठिकाना नहीं है। एआई से बनाए हुए बंदर के कुछ वीडियो हमने भी देखे हैं, उसमें बड़ी तीखी राजनीतिक बातों की वजह से लोग बंधे रह जाते हैं, और उन मुद्दों पर कुछ और देखने-सुनने की उनकी जरूरत बाद में कम रह जाती है।
 

अभी दो-चार दिन पहले ही एक किसी अंतरराष्ट्रीय समाचार-पॉडकास्ट पर एक रिपोर्ट थी कि किस तरह दुनिया में वयस्क मनोरंजन बनाने वाली पोर्न इंडस्ट्री एआई की मार झेल रही है। असली पोर्नो बनाने में वयस्क कलाकार लगते थे, उसकी शूटिंग में बहुत सारे लोग लगते थे, उसकी एडिटिंग में बहुत लोग लगते थे। अब एआई की मेहरबानी से लोग अपनी पसंद का पोर्नो छांट सकते हैं। वे अपनी चाहत को डाल सकते हैं कि उन्हें मर्द किस रंग या राष्ट्रीयता का चाहिए, लडक़ी किस रंग, राष्ट्रीयता, कद-काठी की चाहिए, वे इनके बीच किस तरह की सेक्स फिल्म देखना चाहते हैं। वे सेक्स को लेकर अपनी सारी हसरत को उगल सकते हैं, और एआई उसके मुताबिक पोर्नो पेश कर सकता है। यह सिलसिला पोर्नो के ग्राहकों की पसंद को इस हद तक पूरा करने वाला है कि असली सेक्स फिल्में उसका मुकाबला नहीं कर सकती। अभी असली, जिंदा सेक्स-कलाकारों वाले पोर्नो की ग्राहकी बची हुई है, तो वह इसलिए कि जिंदा लोगों के बीच सेक्स में जो स्वाभाविक और प्राकृतिक हलचल दिखती है, वह कई लोगों को अभी भी अधिक सुहाती है, लेकिन एआई से बने हुए, और असली कलाकारों वाले वीडियो के बीच में फर्क तेजी से घटते चले जाना है। आज जब डीपफेक नाम की तकनीक से किसी जिंदा व्यक्ति की फोटो से भी उसका पोर्नो बनाया जा सकता है, तो फिर एआई से बनने वाले पोर्नो का आसमान अंतरिक्ष तक बढ़ गया मान लिया जाना चाहिए।
 
दुनिया के अधिकतर लोगों की जरूरत बहुत अधिक मौलिक या रचनात्मक सामग्री की नहीं रहती। हम जिस तरह कुछ मुद्दों पर एआई से बात करके अपने पाठकों की जरूरत के लायक लेख तैयार करवा लेते हैं, वह किसी इंसान का लिखा हुआ मौलिक लेख नहीं रहता, लेकिन वह अधिकतर पाठकों की जरूरत पूरी करने वाला रहता है। कुछ ऐसा ही एआई से बनने वाले पोर्नो, या गैरपोर्नो वीडियो का भी है कि अधिकतर दर्शकों को मौलिकता से कोई अधिक लेना-देना नहीं रहता। ऐसे में एआई को एक रोबो की तरह इस्तेमाल करके रोबो-कैफे की तरह का कोई कारोबार चलाने वाले लोग घर बैठे, चुटकियां बजाते सामग्री बनाते जाएंगे, और कहीं नग्न देह वाले वीडियो, तो कहीं प्रवचनकर्ता बंदर वाले वीडियो बनाकर नोट छापते रहेंगे, और असली वीडियो बनाने वाले लोग धीरे-धीरे कमाई और अधिक हद तक खोते जाएंगे।

एआई कितनी तरह से लोगों को बेरोजगार करेगा, यह कई अलग-अलग दायरों से निकलकर आ रहा है, लेकिन वीडियो और सोशल मीडिया पर एआई को एक पालतू जानवर की तरह इस्तेमाल करने वाले लोग उससे इतने नोट कमा रहे हैं कि उसे ढोने के लिए उन्हें एक पालतू असली गधा लगेगा। आगे-आगे देखें, होता है क्या।

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