संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : एपस्टीन-फाइल्स से लेकर अफगानिस्तान में अमरीकी सैनिकों के सेक्स-जुर्म तक
14-Feb-2026 6:12 PM
‘छत्तीसगढ़’ का  संपादकीय : एपस्टीन-फाइल्स से लेकर अफगानिस्तान में अमरीकी सैनिकों के सेक्स-जुर्म तक

अंतरराष्ट्रीय मीडिया, और सोशल मीडिया के एक हिस्से को देखें तो लगता है कि किसी बजबजाती हुई नाली के पानी पर तैरती गंदगी को देख रहे हैं। वह गंदगी भी इस किस्म की कि जैसी बदबू किसी ने कभी झेली न हो। बच्चों से सेक्स, बलात्कार करने और करवाने वाला एक अमरीकी अरबपति जेफ्री एपस्टीन जैसी तस्वीरों और जानकारियों के साथ, दुनिया भर के ताकतवर लोगों के साथ अपने रिश्तों, और बच्चियां सप्लाई करने के न्यौतों वाली लाखों ईमेल के साथ, जिस तरह खबरों में आ रहा है, वह देखना भी भयानक है। दुनिया के कम से कम दस देशों में इन ईमेल में नाम आए हुए लोगों के सरकारी जगहों से इस्तीफे हो रहे हैं, और ब्रिटिश संसद में ऐसे इस्तीफे के बाद किसी तरह अपनी खाल बचाए हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री सौ-सौ बार सदन, और देश की जनता से माफी मांग रहे हैं। अमरीकी संसद की जांच कमेटी अभी इसी बात पर हैरान-परेशान है कि जांच एजेंसियों और वहां के कानून मंत्रालय ने किस तरह बहुत सारे लोगों के नाम बिना किसी जायज वजह को बताए मिटाने के बाद कागजात सार्वजनिक किए हैं। दुनिया भर के प्रमुख लोगों, सरकार और कारोबार के ताकतवरों के लिए नाबालिग लड़कियां जुटाने का यह दुनिया के इतिहास का अपने किस्म का सबसे बड़ा मामला है, और इस भड़वे को भारत की मीडिया में कुछ लोग अब तक कारोबारी-बिचौलिया करार दे रहे हैं!

 
इस बीच अमरीका की एक स्वतंत्र मीडिया संस्था ने एक बहुत ही लंबी खोजी जांच रिपोर्ट में यह साबित किया है कि अफगानिस्तान में दशकों तक तैनात अमरीकी सैनिकों ने वहां के नाबालिगों के साथ बड़े पैमाने पर बलात्कार किए थे। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में किशोर लडक़ों को सेक्स-गुलाम बनाने की एक प्रथा, बच्चाबाजी है, और अमरीकी सैनिकों ने वहां तैनात रहते हुए अपने सेक्स के लिए ऐसे बच्चों को जुटाकर बंदी रखा हुआ था।

 

 अफगानिस्तान में अमरीकी फौजों की बड़ी लंबी तैनाती चली, और कई सैनिक वहां बहुत लंबे समय तक रहे, और उन्होंने इस तरह के बहुत से काम किए। इस रिपोर्ट में अफगानिस्तान की इस जमीनी हकीकत के बारे में भी कहा गया है कि तालिबान अमरीकी सैनिकों की इन हरकतों के खिलाफ थे, और इसलिए वहां की जनता तालिबानों के प्रति हमदर्दी भी रखती थी। एक तरफ वहां राज कर रहे अमरीका के सैनिक नाबालिग बच्चों को सेक्स-गुलाम बनाकर उनसे बलात्कार करते थे, और अमरीकी फौजी हुकूमत से परे वहां कोई आवाज नहीं थी। लेकिन अफगानिस्तान की इस पुरानी बात पर आज नई चर्चा इसलिए छिड़ी है कि अमरीका के भीतर नॉर्थ कैलोलाइना में एक बहुत बड़ा फौजी अड्डा है, जहां करीब 50 हजार सैनिक रहते हैं, और वहां बच्चों के यौन शोषण के कई मामले सामने आ रहे हैं। कई मामलों में बलात्कारों के बाद सैनिकों को बड़ी लंबी कैद की सजा भी हो रही है। इस फौजी कैम्प के सैनिकों के मामले बताते हैं कि महिलाओं से बलात्कार के मुकाबले बच्चों से यौन-अपराध के मामले अधिक हो रहे हैं। और इसके पीछे सरकारी तथ्य ही यह बताते हैं कि इस कैम्प के अधिकांश दोषी अमरीकी सैनिक अफगानिस्तान में लंबी तैनाती कर चुके थे। अफगानिस्तान से 2021 में अमरीकी फौजों की वापिसी के बाद से फौजियों द्वारा बच्चों से यौन-अपराधों में करीब दस गुना बढ़ोत्तरी हुई है, और इसे एक महामारी जैसी नौबत बताया जा रहा है। इस खोजी रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि फौज के आला अफसरों को ऐसे बहुत से मामलों की जानकारी रहती है, लेकिन उन पर कार्रवाई के बजाय वे उन्हें दबाने का काम अधिक करते हैं, ताकि फौज की बदनामी न हो, और ऐसे बलात्कारियों और यौन-मुजरिमों को इस्तीफा दे देने का विकल्प देते हैं।
 
हम एपस्टीन-फाइल्स के साथ-साथ अमरीकी रिपोर्ट में एम्पायर-फाइल्स कही जा रही इन घटनाओं का जिक्र इसलिए कर रहे हैं कि जब लोग दूसरे देशों में बच्चों से बलात्कार करके लौटते हैं, तो वे अपने देश में भी इस तरह का काम करते हैं। किसी भी देश के पर्यटक जब दुनिया के सेक्स-पर्यटन केन्द्रों में जाते हैं, और वहां नाबालिग बच्चों से सेक्स-बलात्कार करके आते हैं, तो लौटने के बाद भी वे अपने देश में बच्चों पर एक बहुत बड़ा खतरा रहते हैं, जैसे कि आज अफगानिस्तान में किशोर सेक्स-गुलाम रखने वाले लौटे हुए सैनिकों से अमरीका में खड़ा हुआ खतरा है। दुनिया के जिन देशों के भी जिन लोगों के नाम एपस्टीन-फाइल्स में बच्चों से बलात्कार के मामले में सामने आए हैं, उनके बारे में कभी भी भरोसे से यह नहीं कहा जा सकता कि वे अपने देश में भी इसी तरह के बच्चे जुटाने, फंसाने, या कब्जाने की कोशिश नहीं करेंगे। बच्चों से सेक्स के शौकीन या आदी मुजरिम अपना मिजाज नहीं बदलते, और अमरीका में संसद के हुक्म से जांच एजेंसियों, और कानून मंत्रालय के कब्जे वाले दसियों लाख दस्तावेज जारी हुए हैं, और उनमें जिन-जिन लोगों के नाम बच्चों से सेक्स के सिलसिले में सामने आए हैं, उन सारे देशों को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करना चाहिए, और कम से कम एक देश ने ऐसे एक यौन-अपराध के आरोपी को गिरफ्तार भी किया है।
 
ये दो मामले एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, लेकिन इन दोनों के पीछे हम एक ताकत का खेल भी देखते हैं। अफगानिस्तान में जिस तरह अमरीका का कब्जा था, और अमरीकी फौजें हीं वहां पर शासक थीं, एक किस्म से तानाशाह थीं, तो वैसी तानाशाही कई किस्म के जुल्म और जुर्म करती ही है। दूसरी तरफ एपस्टीन नाम का दुनिया का यह सबसे बड़ा भड़वा दुनिया के दर्जनों देशों के सबसे ताकतवर सरकारी और कारोबारी मुखियाओं के बीच बच्चों से सेक्स, दलाली, और ब्लैकमेलिंग का दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा रैकेट चला रहा था, उस पर अमरीकी राष्ट्रपतियों की भी पूरी मेहरबानी थी। जब सत्ता का इतना निर्बाध संरक्षण किसी को हासिल होता है, तो वे कोई भी जुर्म करने से नहीं हिचकते। यह बात सिर्फ सेक्स-अपराधों के संदर्भ में लागू नहीं होती, यह बात सत्ता की मेहरबानी से होने वाले हर किस्म के अपराधों पर लागू होती है कि सत्ता का संरक्षण लोगों से असाधारण जुर्म करवाता है। इससे एक बात और भी साबित होती है कि दुनिया की सबसे ताकतवर कुर्सियों पर बैठे हुए लोग भी इस दलाल के टापू पर नाबालिग लड़कियों, और बच्चियों की देह पर जिस तरह जीभ लपलपाते चारों हाथ-पैर पर किसी जानवर की तरह दिखते थे, उससे भी यह समझ पड़ता है कि कोई ओहदा, कोई ताकत लोगों को सेक्स-हिंसानियत से नहीं रोकती, बल्कि उसके लिए बढ़ावा ही देती है। हमारे पाठकों को इन दो घटनाओं को एक साथ रखकर देखना चाहिए, और सरकार, कारोबार, या फौजी हुकूमत से परे भी धर्म, या आध्यात्म की हुकूमत के प्रति भी सावधान रहना चाहिए, जहां कहीं ताकत बेहिसाब हो जाती है, वह बेकाबू भी हो जाती है। 

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