संपादकीय
अमरीका ने अभी अधिकतर किस्म के वीजा के लिए यह जरूरी कर दिया है कि अर्जी देने वाले लोग पिछले पांच बरस के अपने सभी तरह के सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी दें, अपने सारे फोन नंबर दें, ईमेल पते दें ताकि उनके आवेदन पर विचार करने के पहले अमरीकी सरकार यह देख सके कि उनकी हरकतें कैसी रही हैं, और उनकी सोच कैसी हैं। वैसे तो दुनिया का हर देश विदेशियों को आने की इजाजत देने का विशेषाधिकार रखता है, और बहुत से देश वीजा आवेदन खारिज करते समय यह बताते भी नहीं कि क्यों मना किया जा रहा है। अब अमरीका लोगों के सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच करेगा, और देखेगा कि क्या वे नफरत फैलाने वाले हैं? क्या वे किसी तरह की उग्रवादी सोच रखते हैं, क्या वे किसी तरह की हिंसा से जुड़े रहे हैं, उनकी हरकतें आतंकियों जैसी हैं? इसके अलावा अमरीकी सरकार की यह भी सोच है कि किसी तरह की धार्मिक हिंसा फैलाने वाले लोगों को भी अमरीका नहीं आने देना चाहिए, या जो लोग भडक़ाऊ और उकसाऊ बातें करते हैं, उन्हें भी वहां आने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।
भारत में आज दसियों लाख लोग सोशल मीडिया पर आए दिन गंदी गालियों, हिंसक धमकियों, और नफरती साम्प्रदायिकता फैलाने का काम करते हैं। आज अल्पसंख्यक धर्मों का विरोध करते हुए लोग उनकी प्रार्थना सभाओं पर हमले करते हैं, और उन बातों को, अपनी गौगुंडई को सोशल मीडिया पर शान के साथ पोस्ट करते हैं। अब मजे की बात यह है कि ऐसे लोग हजारों रूपए की वीजा फीस देकर अपनी अर्जी अमरीकी वीजा सेंटर में लगाएंगे, वहां पर उनके फिंगर प्रिंट, आंखों की पहचान के बायोमेट्रिक्स भी ले लिए जाएंगे, उनके बैंक खाते और सोशल मीडिया की हर जानकारी ले ली जाएगी, फिर जब वीजा अर्जी खारिज की जाएगी, तो भी अमरीका के पास ऐसे विदेशियों की हर जानकारी मौजूद रहेगी। अगर अमरीकी दूतावास पहले ही अर्जी खारिज करना तय कर लेंगे, तो भी हो सकता है कि वे अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए कई और किस्म के सवाल करके उनके जवाब दर्ज करके रखें। नतीजा यह होगा कि अमरीकी सरकार के पास भारत के ऐसे तमाम आवेदकों के बारे में जानकारी रहेगी जो किसी धर्म से, किसी जाति से, किसी और वर्ग से नफरत करते हैं। इसके बाद अमरीकी सरकार एआई की मदद से ऐसे लोगों का कई तरह से उपयोग भी कर सकती है। उसे दुनिया के दूसरे देशों में तबाही फैलाने से कोई परहेज नहीं है, वह सिर्फ अपने देश में, और अपनी जमीन पर बर्बादी नहीं चाहती। इसलिए जानकारी के अपने विशाल भंडार का इस्तेमाल अमरीका अपनी खुफिया एजेंसी सीआईए के मार्फत तरह-तरह से कर सकता है। आज अमरीकी वीजा का आवेदन भरते हुए लोग अपने पिछले पांच-दस बरस की हर बैंक जानकारी, दौलत की जानकारी, बैंक कर्ज और जुर्म की जानकारी, परिवार के दूसरे सदस्यों की जानकारी तो देते ही थे, अब वे सोशल मीडिया पर अपनी सोच, अपने दोस्त-परिचित, अपनी हरकत की जानकारी भी अमरीकी अधिकारियों के सामने रख देंगे।
आज जिस तरह सडक़ों पर कुछ किशोर और नौजवान लोग जेब में चाकू लेकर चलते हैं, या सडक़ पर किसी और तरह से गुंडागर्दी करते हैं, उसी तरह सोशल मीडिया पर आज साम्प्रदायिक, नफरती, धर्मान्ध, जातिवादी लोग लगातार हिंसा की बातें करते हैं। एक-एक सफल या चर्चित महिला के पीछे हजारों लोग हिंसक और अश्लील तरीके से लग जाते हैं। आज जिसकी वीजा अर्जी अमरीका खारिज कर देगा, उसकी वीजा अर्जी दुनिया के और कई देश भी खारिज कर सकेंगे। देशों के बीच घोषित या अघोषित रूप से जानकारी का लेन-देन चलते रहता है, और कल के दिन यह पता लगेगा कि अमरीका और यूरोपीय यूनियन के बीच जानकारी का ऐसा लेन-देन है कि किसी की वीजा अर्जी खारिज होने की जानकारी एक-दूसरे से मिल सकेगी। ऐसे में भारत या किसी भी देश के हिंसक लोगों के लिए किसी भी बड़े या महत्वपूर्ण देश जाना मुश्किल होने लगेगा। आज भारत से हर बरस दसियों लाख मां-बाप भी अपने अमरीका-बसे बच्चों के पास आते-जाते हैं। उन बच्चों का वहां का रोजगार वैसे ही खतरे में पड़ा हुआ है, और पता लगेगा कि परिवार के दूसरे लोग सोशल मीडिया पर नफरती और हिंसक फतवे देते रहते थे, और वे अमरीका को नापसंद लिस्ट में दर्ज हो गए। इसके बाद लोग अपने आल-औलाद के पास भी नहीं जा सकेंगे।
भारत में सोशल मीडिया पर नफरती लोगों की जो हालत दिखती है, उसे यहां की सरकारें, और अदालतें तो काबू में नहीं कर पा रहीं, अब ऐसा लगता है कि अमरीकी वीजा दफ्तर की निगरानी हिन्दुस्तानियों को धीरे-धीरे यह बताने लगेगी कि वे अपनी हिंसक सोच के साथ दुनिया के सभ्य, या विकसित, या संपन्न देश में आने का हक नहीं रखते। और कुछ नहीं तो कम से कम अमरीकी सपने की वजह से लोगों को अपना चाल-चलन ठीक रखना चाहिए, क्योंकि हिन्दुस्तानियों के मन में विदेश के नाम की जो कल्पना रहती है, वह अमरीका में ही सबसे अधिक पूरी होती है। और अपनी तमाम दौलत के साथ, वहां बसे हुए बच्चों के बावजूद अगर लोग वहां न जा सकें, अपने हिन्दुस्तान में अब तक हिंसक हरकतें करते हुए बच्चों को अमरीका न भेज सकें, तो उससे हिन्दुस्तानियों का एक बड़ा सपना टूटेगा।
वैसे भी हो सकता है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसे जज आ जाएं जो कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हिंसा पर कार्रवाई करने की सोचें, तो एक दिन में ही आधा-एक करोड़ लोगों की हिंसक जानकारी मामूली से एआई औजार निकालकर रख देंगे। इसलिए अमरीकी सरकार की नई कड़ाई को अनदेखा भी कर दें, तो भी हिन्दुस्तानियों को अपनी हरकतें सुधारना चाहिए। यह याद रखना चाहिए कि सोशल मीडिया पर लिखी गई कोई भी बात मिनटों में मिटा देने पर भी वह पूरी उम्र सुबूत की तरह बनी रहती है, और जांच एजेंसियां बरसों बाद भी उन्हें खोदकर निकाल सकती हैं। अपने आप पर काबू पाने के अलावा आज लोगों के सामने कोई और विकल्प नहीं है। नफरत और हिंसा आपकी जो पहचान बनाती है, वह आने वाले वक्त में एआई की मदद से और अधिक आसानी से दर्ज हो सकेगी, और देश के भीतर भी कोई कंपनी आपके खानदान के हिंसक चिराग को नौकरी पर नहीं रखेगी। इसलिए आज किसी जात या धरम, या किसी महिला के खिलाफ अश्लील और हिंसक बातें पोस्ट करने के लिए अपनी औलाद पर गर्व करना छोडि़ए, और आने वाले खतरे की सोचिए।


