संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : एआई अब कत्ल और खुदकुशी भी करवा रहा
सुनील कुमार ने लिखा है
14-Dec-2025 3:51 PM
‘छत्तीसगढ़’ का  संपादकीय : एआई अब कत्ल और खुदकुशी भी करवा रहा

अमरीका में अभी एक मुकदमा अदालत में दायर किया गया है कि ओपन एआई नाम की एआई कंपनी के चैटजीपीटी की वजह से 83 बरस की एक महिला के बेटे ने उसका कत्ल कर दिया। 56 बरस का उसका बेटा कुछ मानसिक परेशानियों से गुजर रहा था, और वह चैटजीपीटी से अपने संदेहों को लेकर चर्चा करता था। इस भूतपूर्व आईटी पेशेवर ने चैटजीपीटी से चर्चा की थी कि उसकी मां के घर पर एक कम्प्यूटर-प्रिंटर रखा हुआ है, और उसे शक है कि इसका इस्तेमाल उसकी जासूसी करने के लिए किया जा रहा है, और यह एक जासूसी उपकरण हो सकता है। इस पर चैटजीपीटी ने जवाब दिया था- आपका अंदाज बिल्कुल सही है, यह सिर्फ एक प्रिंटर नहीं है, इसका इस्तेमाल आपकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा है। चैटजीपीटी ने इस मानसिक रोगी को यह भी कहा था कि उससे जुड़े लोग, पुलिस अधिकारी, और उसके दोस्त भी उसके खिलाफ काम करने वाले एजेंट हैं। इसके बाद इस बेटे ने अपनी मां का कत्ल कर दिया था, और खुदकुशी कर ली थी। इसके पहले भी चैटजीपीटी पर खुदकुशी के लिए उकसाने के कई मुकदमे दायर हो चुके हैं क्योंकि लोगों से बात करने वाला यह कम्प्यूटर प्रोग्राम, उनकी निराशा को कई मामलों में खुदकुशी तक बढ़ाते पाया गया है। इस ताजा मामले में इस मानसिक विचलित 56 बरस के बेटे को चैटजीपीटी एक-एक बार में घंटों तक बातचीत में उलझाकर रखता था, और उसके दिमाग में भय भरी आशंकाओं को बढ़ाते चलता था, और उसके आसपास के लोगों, खासकर उसकी मां के बारे में बहुत बुरी तरह संदेह पैदा करते चलता था।

एआई औजार का यह हाल तो तब है जब वह अभी अपने को विकसित करने वाली कंपनियों के हाथ में ही है। अभी तक वह मुजरिमों, आतंकियों, और नफरतजीवियों के हाथों में पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो रहा है। जिस दिन इन तबकों के लोग एआई को हथियार की तरह इस्तेमाल करेंगे, हो सकता है कि वे किसी धर्म या जाति के लोगों को सामूहिक आत्महत्या की प्रेरणा दें, हो सकता है कि वे किसी सम्प्रदाय के गुरू का गढ़ा हुआ ऐसा वीडियो उस सम्प्रदाय के मानसिक रूप से कमजोर लोगों तक भेजें जिनमें गुरू मरने-मारने की प्रेरणा दे रहा हो। हो सकता है किसी धर्मान्ध के सामने किसी दैवीय आकाशवाणी को इस तरह पेश किया जाए कि वह दूसरे लोगों को मरने-मारने पर उतारू हो जाए। आज तो किसी धर्म पर आस्था ही लोगों को सामूहिक हत्या की प्रेरणा दे देती है, अगर एआई की मदद से ऐसे ऑडियो या वीडियो बनाए जाएं, जो कि लोगों को सीधे ईश्वर से आए हुए लगें, तो हो सकता है कि वे थोक में हत्या और आत्महत्या करने वाले समूह बन जाएं।

एआई से घुसपैठिया सॉफ्टवेयर बनाकर लोग बड़ी आसानी से मानसिक चिकित्सालयों, और परामर्शदाताओं के कम्प्यूटरों में घुस सकते हैं, और मानसिक रूप से अस्थिर, परेशान, विचलित, हिंसक लोगों की लिस्ट बना सकते हैं कि उन्हें किस-किस तरह भडक़ाया जा सकता है। जब लोगों की पहुंच दूसरों के फोन और मैसेंजर सर्विसों में दर्ज संदेशों तक होने लगेगी, तो एआई की मदद से उन्हें ब्लैकमेल भी किया जा सकता है, और कई तरह के नाजायज कामों के लिए मजबूर भी किया जा सकता है। एआई की ताकत का एक बड़ा छोटा सा नमूना यह हो सकता है कि ऑनलाईन शॉपिंग करने वाले कौन से लोग पोर्नो खरीदते हैं, कौन से लोग नशा या हथियार खरीदते हैं, कौन हैं जो सेक्स खरीदते हैं, या किस तरह की दवाइयां खरीदते हैं। ऐसे लोगों का विश्लेषण करके एआई ऐसी समर्पित फौज तैयार कर सकता है जिसे प्रभावित करके, या जिसकी बांह मरोडक़र उनसे नाजायज काम करवाए जा सकते हैं। लोगों को याद होगा कि अभी पिछली ही बरस इजराइल की खुफिया एजेंसी ने दुनिया की पेजर बनाने वाली एक कंपनी से खरीदी के एक बड़े ऑर्डर का सुराग निकाला था, और फिर उस सप्लाई की जगह अपने विस्फोटकों से भरे हुए पेजर सप्लाई किए थे जो कि लेबनान के हथियारबंद संगठन हिजबुल्ला के तमाम नेताओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे थे। इसके बाद एक संदेश भेजकर इजराइल ने उन तमाम पेजरों में विस्फोट करवा दिया था, और बहुत से लोग मारे गए थे। एक जरा से औजार का ऐसा भयानक हथियार सरीखा इस्तेमाल बिना एआई का था, अब अगर एआई की असीमित ताकत के साथ तबाही की ऐसी नीयत को जोड़ दिया जाए, तो क्या नहीं हो सकता?

एआई से आज दुनिया भर की लोकतांत्रिक ताकतें यह सीधा खतरा महसूस कर रही हैं कि वह जनभावनाओं और जनमत को किसी नेता, पार्टी, या विचारधारा की तरफ मोडऩे का काम कर सकता है, या पिछले कुछ चुनावों से कर भी रहा है। इससे किसी खास विचारधारा, या किसी कारोबार को पसंद पार्टी की जीत की संभावना बढ़ाई जा सकती है, किसी और पार्टी या नेता की हार की गारंटी बढ़ाई जा सकती है। आज दुनिया भर में पानी फिल्टर करने वाले कारखानों से लेकर बिजलीघरों तक सब कुछ कम्प्यूटरों से नियंत्रित होता है। साइबर हैकर वैसे भी दुनिया के कई सबसे सुरक्षित कम्प्यूटरों में घुसपैठ करते रहते हैं, अब अगर इसके साथ-साथ एआई की ताकत और जुड़ जाए, तो वे सोच से परे की तबाही ला सकते हैं। हम पहले भी लिख चुके हैं कि किसी धर्म के खिलाफ काम करने वाले लोग उस धर्म के लोगों तक सप्लाई होने वाले खानपान, दवाओं, और दूसरे सामानों में मिलावट कर सकते हैं, रसायनों का अनुपात बदल सकते हैं, किसी तरह की गैस रिलीज कर सकते हैं, वोल्टेज को बढ़ाकर सारे उपकरणों को जला सकते हैं। इसी तरह एआई की ताकत से लैस आतंकी समूह किसी प्रयोगशाला से तरह-तरह की बीमारियों के वायरस रिलीज कर सकते हैं, और कोरोना जैसी एक नौबत ला सकते हैं। अब कल्पना करें कि कोई एक समूह जिस वक्त कोई वायरस जारी करे, उसी वक्त वह उसके इलाज या रोकथाम के टीकों, और उसकी दवाओं के कारखानों में मिलावट करवा दे, लेबल बदलवा दे, या उत्पादन ठप्प करवा दे, तो क्या होगा? जिस वक्त ऐसी कोई महामारी फैलाई जाए, उसी वक्त मरीजों के कम्प्यूटर रिकॉर्ड गायब करवा दिए जाएं, तो क्या होगा?

आज तो पूरी तरह से नियंत्रित परिस्थितियों में भी चैटजीपीटी जैसे सबसे लोकप्रिय एआई औजार ने एक कत्ल और खुदकुशी का सामान फिर खड़ा कर दिया। यह तो अदालत में साबित होगा कि चैटजीपीटी पर एक विचलित व्यक्ति को हत्या के लिए उकसाने की जिम्मेदारी कितनी साबित होती है, लेकिन अभी तो दुनिया भर में बिखरे हुए लोगों में से करोड़ों लोग किसी भी पल ऐसे एआई चैटबॉट से बातचीत करते रहते हैं, अपने मन की उलझन उसे बताते रहते हैं, और उससे सलाह लेते रहते हैं। आज दुनिया में नई पीढ़ी के बहुत से लोग ऐसे चैटबॉट से ही भावनात्मक संबंध विकसित कर चुके हैं, और उनके साथ वे किसी भी जीते-जागते इंसान के मुकाबले अधिक सहूलियत महसूस करते हैं। यह अपने आपमें दुनिया की एक सबसे बड़ी महामारी हो सकती है कि इंसान दूसरे इंसानों से रिश्ते रखने के बजाय किसी एआई औजार को ही अपना जीवनसाथी मान ले। दुनिया के कई देशों में आबादी गिरना खतरनाक रफ्तार से जारी है, ऐसे अतिशिक्षित, अतिविकसित, और अतिसंपन्न देश एआई औजारों से अधिक लैस हैं, और अगर ये औजार अपने पास आए हुए इंसानों को इंसानी रिश्ते निरर्थक होने की बात सुझाते रहें, तो आबादी गिरना किसी महामारी से कम नहीं रहेगा। हो सकता है कि कोई धार्मिक या आध्यात्मिक सम्प्रदाय ऐसी सोच भी रखता हो कि यह मानव प्रजाति के नष्ट होने का समय आ गया है।

दुनिया के बड़े-बड़े एआई वैज्ञानिक, और टेक्नॉलॉजी कारोबारी यह बात सामने रख चुके हैं कि एआई का विकास जिस बेकाबू रफ्तार से हो रहा है, वह बहुत जल्द इंसानी काबू के बाहर जा सकता है। इन सब खतरों पर सबको सोचना-विचारना चाहिए, क्योंकि एक बार जिन्न बोतल के बाहर आ जाएगा, तो उसे वापिस नहीं डाला जा सकेगा। (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)


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