संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : दाढ़ी-पगड़ी अमरीकी फौज से बाहर करने की तंगदिली
सुनील कुमार ने लिखा है
24-Oct-2025 5:36 PM
‘छत्तीसगढ़’ का  संपादकीय : दाढ़ी-पगड़ी अमरीकी फौज से बाहर करने की तंगदिली

अमरीका में रक्षामंत्री को अब युद्धमंत्री का पदनाम दिया गया है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप नोबल शांति पुरस्कार के लिए ओवरटाईम कर रहे हैं, दुनिया को धमका रहे हैं, बांह मरोड़ रहे हैं, और इसके साथ-साथ वे रक्षामंत्री को अब युद्धमंत्री का पदनाम दे चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग बहुत से मोर्चों पर अमरीकी हितों की रक्षा करने के बजाय अब अमरीकी सेना का प्रभारी मंत्री युद्धमंत्री कहला रहा है, जाहिर है कि इस सरकार और इस फौज का क्या नया रूख रहेगा। ऐसे में अभी कुछ दिन पहले युद्धमंत्री पीटर हेगसेथ ने यह कहा कि अमरीका अपने फौजियों के बाल कटवाने जा रहा है, और दाढ़ी मुंडवाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि गैरपेशेवर दिखने का युग खत्म हो गया है, और अब फौज में दाढ़ी वाले लोग नहीं रहेंगे। इसका विरोध करते हुए अमरीका के एक सांसद थामस आर.सुओजी ने रक्षामंत्री को लिखा है कि यह सिक्खों और मुस्लिमों को फौज के बाहर का रास्ता दिखाने का काम होगा। पिछले महीने ही यह निर्देश जारी हो चुका है, और धार्मिक आधार पर सिक्खों, मुस्लिमों, यहूदियों, और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों को दाढ़ी और बाल या पगड़ी बनाए रखने की इजाजत खत्म की जाती है।

अमरीका और भारत में सिक्खों ने इस फौजी फैसले का बहुत विरोध किया है, और मुस्लिम संगठनों ने भी ऐसी ही प्रतिक्रिया दर्ज की है। अगर अमरीकी सरकार इस फैसले पर अड़ी रहती है, तो अपनी धार्मिक मान्यताओं को कड़ाई से मानने वाले सैनिकों के पास फौज छोडऩे के अलावा और कोई विकल्प नहीं रहेगा, और फौज में इन धर्मों के नए लोग जा भी नहीं पाएंगे। यह फैसला ट्रंप के चुनावी नारों से लेकर राष्ट्रपति बनने के बाद के उनके फैसलों तक कई बातों में दिखते रहा है। अमरीका में देश के बाहर से आए हुए लोग कैसे घटाए जा सकते हैं, इस पर ट्रंप रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। फौज से इन धर्मों के लोगों को अगर हटना पड़ता है, तो जाहिर है कि उनमें से कई लोग देश छोडक़र जाने की भी सोचेंगे, और वह ट्रंप की गोरी नीतियों को माकूल भी बैठेगा। दिलचस्प बात यह है कि अभी जब जर्मन चांसलर ट्रंप से मिले, तो उन्होंने ट्रंप को उनके पिता का जर्मनी का जन्म प्रमाणपत्र तोहफे में दिया। बहुत से लोगों का यह मानना है कि यह तोहफा एक किस्म का व्यंग्य था कि ट्रंप खुद अमरीका में बहुत पुराना नहीं है, और उसके पिता तो जर्मनी में पैदा हुए थे। ट्रंप लगातार धर्म, नस्ल, रंग, और राष्ट्रीयता के आधार पर जो भेदभाव करते चल रहा है, फौज को लेकर उसका यह फैसला उसी की एक कड़ी है। लेकिन अमरीका में जो लोकतंत्रवादी हैं, वे इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं कि ट्रंप किस तरह, और किस हद तक अमरीकी जनजीवन में विविधता को खत्म करते चल रहा है, और वह इस देश को पूरी तरह से एक गोरा और ईसाई देश बनाने पर आमादा है।

अमरीका के लोकतंत्र और वहां की जिंदगी के हर दायरे में विविधता का ही एक सबसे बड़ा योगदान रहा। दुनिया भर से वहां पहुंचने वाले प्रतिभाशाली लोगों ने मिलकर ही अमरीका को कामयाब बनाया। हर प्रतिभा को बढ़ावा देते हुए उसका इस्तेमाल करके अमरीकी अर्थव्यवस्था आसमान पर पहुंची। ऐसे मेल्टिंग पॉट कहे जाने वाले देश को आज जिस तरह से एक धर्म, एक रंग, और कुल दो जेंडर तक सीमित किया जा रहा है, उसका बड़ा नुकसान अमरीका को आने वाले बरसों में होगा, और कुछ अर्थशास्त्री इस खतरे के बारे में लिख भी रहे हैं। आज अमरीका को ट्रंप के विविधता-विरोधी रूख के नुकसान का ठीक-ठीक अंदाज इसलिए नहीं लग रहा है कि आज पूरी दुनिया में ट्रंप एक बिफरे हुए सांड की तरह (सांड से माफी के साथ) तबाही कर रहा है, और दुनिया भर पर टैरिफ, दुनिया भर से रिश्तों में उठा-पटक की वजह से खुद अमरीका की जिंदगी और वहां के कारोबार में एक ऐसा रेतीला -धूलभरा अंधड़ आया हुआ है कि लोगों को आज नुकसान और खतरा दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। लेकिन अमरीकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, और अमरीकी लोगों के लिए रोजगार को अधिक बचाकर रखने के नाम पर ट्रंप जो कुछ कर रहा है, उससे अमरीका का ही बड़ा नुकसान हो रहा है। दुनिया भर से वहां पहुंचे हुए लोग जितने मेहनतकश रहते हैं, जितनी कम तनख्वाह या मजदूरी पर काम करते हैं, अपने देशों से हुनर सीखकर वहां आए रहते हैं, वह सब अमरीका में आज आसानी से हासिल नहीं है। कोई अमरीकी उतना हुनर सीखकर, उतने कम पैसों पर उतनी मेहनत करने के लिए शायद ही तैयार होंगे। लेकिन इससे ट्रंप अपनी एक नफरती जिद तो पूरी कर ही रहा है कि अमरीका में दूसरी राष्ट्रीयता, दूसरी नस्ल से आए हुए लोगों की गिनती घटानी है। अमरीकी फौज से ट्रंप ने ट्रांसजेडरों को पहले ही बाहर कर दिया है, और अमरीका में कुल दो ही सेक्स को मान्यता दी है। लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ जाकर इस पुरातनपंथी फैसले से ट्रंप अमरीका में सदियों से धीरे-धीरे स्थापित मूल्यों को खत्म कर रहा है।

सभ्यता का विकास लोगों को उनकी धार्मिक मान्यताओं, उनकी पोशाक, उनके खानपान, उनकी उपासना पद्धति की वजह से उन्हें देश और समाज की मूलधारा से अलग कर देने से नहीं होता। सभ्यता का विकास सदियों में हुआ है, और ट्रंप के पास उसे तबाह करने के लिए उतने दशक भी नहीं है, उसके पास शायद चार बरस का यह आखिरी कार्यकाल ही है जिसमें से करीब पौन बरस निकलने जा रहा है। अमरीकियों ने ट्रंप को चुना था, लेकिन इस ट्रंप ने उन्हीं अमरीकियों का जितना बड़ा नुकसान किया है, उसकी भरपाई आसानी से नहीं होगी। आज वह अमरीकी फौज से सिक्ख, मुस्लिम, यहूदी, और दूसरे अल्पसंख्यकों को बाहर करने जा रहा है, लेकिन वह अमरीका की एक उदार लोकतंत्र की साख को भी बाहर कर रहा है। दुनिया के बाकी देशों को भी यह सबक लेना चाहिए कि उदार सभ्यता के खिलाफ जाकर वे अपने विकसित लोकतंत्र को किस तरह लंबे वक्त के लिए नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

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