दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 8 जून। पूरी दुनिया में पानी और बानी (मातृभाषा) को लेकर एक विकट संकट की स्थिति है इसे बचाने, लोगों को जगाने मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी टीम लगातार पानी बचाओ-बानी बचाओ को लेकर अभियान चला रही है. इसी अभियान के तहत रविवार को मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ की टीम ऐतिहासिक-पुरातात्विक स्थल तरीघाट पहुँची। जहाँ टीम ने माँ-महामाया मंदिर में पूजा अर्चना के बाद अपने खारुन नदी पदयात्रा की शुरुआत की. इस यात्रा का समापन शिवनाथ संगम स्थल सोमनाथ में होगा
छत्तीसगढ़ राज्य भी इस संकट से जूझ रहा है। राज्य में लगातार भू-जल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है, नदियों में प्रवाह नहीं है। गर्मी के दिनों में महानदी से लेकर कई-छोटी बड़ी नदिया कई स्थानों पर सूख जाती है. तालाबों और नालों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। जल प्रदूषण के साथ बेहताशा कई तरह के खनन संकट बढ़ते ही जा रहा है। अनेक एनीकेट और स्टॉप डैम से नदियों को तलाबों में तब्दील किया जा रहा है।
इसी तरह से छत्तीसगढ़ में मातृभाषाओं पर संकट बढ़ रहा है. छत्तीसगढ़ी, हल्बी, गोंडी, सरगुजी जैसी मातृभाषाओं में पढ़ाई-लिखाई नहीं होने से मातृभाषाएं धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो देंगी। इसे बचाने, लोगों को जगाने मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी टीम लगातार पानी बचाओ-बानी बचाओ को लेकर अभियान चला रही है। टीम के संयोजक डॉ. वैभव बेमेतरिहा ने बताया कि खारुन पदयात्रा दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण की पदयात्रा की शुरुआत रविवार को तरीघाट से शुरू हुई। तरीघाट से खारुन नदी के किनारे-किनारे होते हुए सोमवार को महादेव घाट रायपुर में समाप्त होगी। दूसरे चरण की पदयात्रा महादेव घाट रायपुर से शुरू होकर शिवनाथ संगत स्थल सोमनाथ(सिमगा) में समाप्त होगी।
पहले दिन पदयात्रा में मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी टीम के राजीव तिवारी, संजीव साहू, राघवेंद्र साहू, समरेंद्र शर्मा, मनोज सिंह बघेल के साथ पर्यावरण प्रेमी पत्रकार रोम शंकर यादव, दीपक गोस्वामी, अशोक कुमार, भेद प्रकाश वर्मा, हरीश साहू,मुकेश सेन सहित कई लोग शामिल रहे।


