दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 14 फरवरी। राजनांदगांव निवासी स्व. सामरतन राय के परिजनों ने खसरा नंबर 1567 (रकबा 30 डिसमिल) और खसरा नंबर 1636 (रकबा 84 डिसमिल) को वर्ष 1954-55 के भू-राजस्व अभिलेख में दर्ज नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया है। परिजनों का कहना है कि उक्त भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है, लेकिन अभिलेख में दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
परिवार के सदस्य रामविलास जोशी ने बताया कि इस संबंध में वे तहसील, एसडीएम कार्यालय और जिला कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक अभिलेख दुरुस्ती नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों से वे इस मामले में प्रयासरत हैं।
रामविलास जोशी ने प्रदेश के राज्यपाल को भी आवेदन देकर खसरा नंबर 1567 और 1636 को संबंधित भू-अभिलेख में दर्ज कराने की मांग की है। उनके अनुसार, राजभवन सचिवालय की ओर से मामले को संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने और आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही गई है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि भूमि पर अन्य लोगों का कब्जा है और अभिलेख दुरुस्त नहीं होने से उन्हें अपनी जमीन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में राजनांदगांव के राजस्व विभाग के अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


