दुर्ग

भूमि के बदले प्रभावितों को स्थायी नौकरी दी जाए-कांग्रेस
06-Feb-2026 4:03 PM
भूमि के बदले प्रभावितों को स्थायी नौकरी दी जाए-कांग्रेस

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

दुर्ग, 6 फरवरी। भूमि अधिग्रहण प्रभावित किसानों ने दुर्ग जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर के समक्ष अपनी समस्याएं रखी। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसानों के साथ हो रहे गंभीर अन्याय, मुआवजा निर्धारण में मनमानी, सामाजिक प्रभाव आंकलन  की अनदेखी, प्रशासनिक दबाव एवं आजीविका छिनने का विरोध की बात कहते हुए किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तारपूर्वक स्थिति पर चर्चा की।

श्री ठाकुर ने प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर किसानों के हित आंदोलन करने का उन्हें भरोसा दिलाया।  किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल मुआवजा, उनकी आजीविका का विकल्प नहीं है, इसलिए भूमि के बदले स्थायी नौकरी की व्यवस्था की जाए। जिले के ग्राम पुरई, पाऊवारा, चंगोरी, बिरेझर, थनौद, कोनारी, चंदखुरी, भानपूरी, बोरीगारका, करगाडीह, खोपली, घुघसीडीह, कोकड़ी, कोडिया सहित अन्य ग्रामों के किसानों ने बताया कि विभिन्न विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन भूमि का मूल्यांकन न तो बाजार दर के अनुसार किया जा रहा है न ही वर्तमान गाइडलाइन का पालन हो रहा है। ग्राम सभा की सहमति के बिना जबरन अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जिससे किसान भय और असमंजस की स्थिति में हैं।

किसानों ने कहा कि एकमुश्त 5 लाख या सीमित मुआवजा राशि आजीविका का स्थायी विकल्प नहीं हो सकती। भूमि चले जाने के बाद किसान एवं उनके परिवार के सामने रोजग़ार, शिक्षा और भविष्य की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। इसलिए प्रभावित प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य को परियोजना में स्थायी नौकरी अथवा समकक्ष रोजगार दिया जाना अनिवार्य किया जाए। किसानों ने यह भी मांग रखी कि जब तक भूमि के बदले नौकरी की स्पष्ट नीति लागू नहीं होती, तब तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि भूमि के साथ-साथ मकान, कुआँ, बोर, पेड़-पौधे, बाड़ी, सिंचाई एवं विद्युत संरचनाओं का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया है, जिससे प्रभावित परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट रहे हैं। कई स्थानों पर सामाजिक प्रभाव आंकलन केवल कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह गया है, जबकि कानून के अनुसार ग्राम सभा की वास्तविक सहभागिता और पूर्व सहमति अनिवार्य है।

इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने किसानों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि भाजपा सरकार विकास के नाम पर किसानों की जमीन छीनकर उन्हें बेरोजग़ार बना रही है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 केवल मुआवजे की बात नहीं करता, बल्कि पुनर्वास, पुनस्र्थापन और आजीविका की सुरक्षा को भी अनिवार्य बनाता है, जिसे भाजपा सरकार लगातार कुचल रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि भूमि के बदले प्रभावित परिवारों को स्थायी नौकरी दी जाए, ताकि किसान सम्मान के साथ अपना जीवन चला सकें। केवल पैसे देकर किसानों की जमीन लेना अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने भूमि के बदले नौकरी, उचित मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी प्रभावित किसानों के साथ मिलकर सडक़ से सदन तक व्यापक और आक्रामक आंदोलन करेगी। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी किसानों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर पूरी ताकत से संघर्ष करेगी।

इस दौरान देवेंद्र देशमुख, प्रभावित किसान अमित साहू, लक्ष्मी मानिकपुरी, शकुन साहू, लक्षमण निषाद, लखन निषाद, व्यासनारायण साहू, धनेश राम साहू, भंवर लाल देशमुख, यशवंत देशमुख, सतीश देशमुख, मेहतरू साहू, बिहारी लाल, अजय कुमार सिन्हा, विष्णु चंद्राकर, चैन सिंह साहू, प्रेम लाल साहू, कल्याण पटेल, यशवंत साहू, बिसेसर साहू, धनऊ कोसरे, मोहन चंद्राकर, मलेश निषाद, चेतन भारद्वाज, रामाधार, पुकेश्वर यादव, रामचरण भारद्वाज, बुधारू, दिलीप देशमुख, मुकेश देशमुख, गोवर्धन देशमुख, प्रदीप देशमुख, उमेश साहू, महेश देशमुख, मोहन हरमुख, बीरेंद्र आदि मौजूद थे।


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