दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 19 जनवरी। धान खरीदी में अव्यवस्था को लेकर इस बार शुरू से किसान आवाज उठाते आ रहे हैं। अब सत्यापन के नाम पर किसान परेशान हो रहे हैं, इसे लेकर किसानों में रोष व्याप्त कई किसान ऐसे हैं जिन्होंने एक भी दाना नहीं बेचे हैं। इसके बाद भी टोकन जारी करने के पूर्व सत्यापन किया जा रहा हैं। इधर 31 जनवरी की तिथि के लिए कटा टोकन 29 जनवरी को शिफ्ट किया जा रहा जिसे भी लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जनपद पंचायत दुर्ग के उपाध्यक्ष राकेश हिरवानी का कहना है कि सत्यापन कराकर सरकार किसानों को दलाल साबित करने में लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार किसान को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पहले किसान खाद और बीज के लिए परेशान थे अब किसी भी तरह अपनी उपज को बचा लिया है तो सरकार उसे खरीदने के लिए आनाकानी कर रही है। सरकार मोदी की गारंटी में एक-एक दाना खरीदने की बात कर रही थी आज वही सरकार किसानों को चोर व दलाल साबित करने घर घर जाकर उनके उपज का सत्यापन कराने में जुटी है। पटवारी व कोतवाल द्वारा किसानों के घर-घर जाकर किसानों के साथ दबाव पूर्ण ढंग से दुव्र्यवहार किया जा रहा है जिससे किसान मानसिक रुप से प्रताडि़त हो रहे हैं और वो दिन भी दूर नहीं कि इस प्रताडऩा से ग्रसित किसान आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर न हो जाए। दूसरी तरफ धान नहीं बिक पाने व टोकन नहीं मिल पाने से किसान के आक्रोश का शिकार पटवारी व कोतवाल न हो जाए यह भी खतरा बना हुआ है। सत्यापन में लगे पटवारी व कोतवाल की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन होगा यह भी एक प्रश्न का विषय है।
सरकार किसान का धान खरीदने से बचने का प्रयास कर रहा है, कई किसान अपनी जमीन रेगहा में देकर कृषि कार्य कर रहे हैं जिसका उपज अन्यत्र जगह रख दिया गया है। ऐसी स्थिति में कृषकों को अपनी फसल बेचने के लिए प्रताडऩा का शिकार होना पड़ रहा है। इस तरह का हथकंडा अपनाकर किसानों को प्रताडि़त किया जा रहा है। एक तरफ 7 करोड़ का धान चूहा खाने का मामला सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर कर रहा है वहीं दूसरी ओर सरकार का खाद्य विभाग यह भी कह रही है कि धान में सूखत का होना वैज्ञानिक और स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसे माईसचर लास कहा जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में सहकारी समितियों में सूखत का प्रावधान क्यों नहीं दे रही है क्या सूखत सिर्फ संग्रहण केंद्र में ही होता है सहकारी समिति में नहीं? श्री हिरवानी ने मांग करते कहा कि सरकार सभी संग्रहण केन्द्र का निरीक्षण कराएं करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर होगा, लेकिन किसानों का एक एक दाना सरकार को लेना ही होगा, इसके लिए कांग्रेस के कार्यकर्ता किसानों के साथ खड़ी है।
उन्होंने कहा कि धान नहीं बिकने से परेशान किसान आक्रोशित है, ऐसे में उनकी पटवारी और कोतवाल व सत्यापन टीम के साथ वाद विवाद की स्थिति भी बन रही है। ऐसे में उक्त टीम की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या सरकार दुघर्टना होने का इंतजार कर रही है। श्री हिरवानी ने कहा कि सरकार ने धान खरीदी कि अंतिम तिथि 31 जनवरी के जगह अब 30 जनवरी को तय कर दिया है। जैसे-जैसे अंतिम तिथि नजदीक आ रही है वैसे-वैसे सरकार किसानों व कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बना रही है। इसी क्रम में 31 जनवरी को समितियों में उपार्जन हेतु काटा गया टोकन अब 29 जनवरी को शिफ्ट कर दिया गया है इसे लेकर उन्होंने सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठाया।


