दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 18 जनवरी। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। सत्र 2024-25 में खरीदे गए धान के उठाव के बाद कबीरधाम (कवर्धा) और महासमुंद जिलों के धान संग्रहण केंद्रों में करोड़ों रुपये के धान की भारी कमी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा इस कमी के लिए चूहों, कीट-पतंगों, नमी और मौसम को जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के आरोप तेज हो गए हैं।
इन मामलों के उजागर होने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने दुर्ग वेयरहाउस का दौरा किया। उन्होंने कहा कि वे यह देखने आए हैं कि कहीं कवर्धा और महासमुंद से बताए जा रहे चूहे दुर्ग तो नहीं पहुंच गए। पूर्व में राज्य भंडार निगम के अध्यक्ष रह चुके वोरा ने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने कभी ऐसा मामला नहीं देखा, जहां हजारों क्विंटल धान की कमी को चूहों और कीट-पतंगों के नाम पर समझाया गया हो। उनका कहना था कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी का संकेत देता है। दौरे के बाद वोरा ने दुर्ग के पुलिस अधीक्षक, आईपीएस विवेकानंद सिन्हा से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि असली दोषियों की पहचान जरूरी है और करोड़ों रुपये के इस नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चूहों को दोषी ठहराना वास्तविक भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने का प्रयास है। कांग्रेस पार्टी ने इन सभी मामलों को गंभीर बताते हुए उच्च स्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह केवल धान की कमी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी धन और किसानों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है, जिसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है।
कबीरधाम जिले के बाजार चारभाठा और बरघरा धान संग्रहण केंद्रों से कुल 26 हजार क्विंटल धान कम पाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है। विभागीय रिपोर्ट में कमी के लिए चूहों और कीट-पतंगों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इधर महासमुंद जिले के बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में सत्र 2024-25 के दौरान 3.65 प्रतिशत शॉर्टेज दिखाकर शासन को करीब 5 करोड़ 71 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। धान सुरक्षा पर हर साल लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। प्रारंभिक जांच में फर्जी आवक-जावक, फर्जी बिल, मजदूरों की फर्जी हाजिरी और सीसीटीवी से छेड़छाड़ के आरोप सामने आए हैं।


