दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 6 जनवरी। सिख धर्म के दसवें एवं अंतिम मानव गुरु, महान योद्धा, कवि और समाज सुधारक साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज का प्रकाश पर्व 5 जनवरी को विश्वभर के साथ-साथ दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में भी अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह पावन अवसर गुरु महाराज के त्याग, साहस, बलिदान और मानवता के प्रति उनके महान संदेशों को स्मरण करने का दिवस है।
इस शुभ अवसर पर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, स्टेशन रोड में विशेष गुरमत समागम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विवरण 3 जनवरी को श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ आरंभ हुआ, जिसका समापन 5 जनवरी को प्रात:काल श्रद्धापूर्वक किया गया। विशेष रूप से लुधियाना से पधारे रागी जत्थे के भाई बलकार सिंह एवं हजूरी रागी भाई आदित्य प्रताप सिंह द्वारा मधुर गुरबाणी कीर्तन का गायन किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
प्रख्यात विद्वान ज्ञानी कुलदीप सिंह ने साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह के जीवन-दर्शन, उनकी शिक्षाओं तथा खालसा पंथ की स्थापना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। समागम के उपरांत गुरु का अटूट लंगर आयोजित किया गया, जिसमें सभी वर्गों एवं समुदायों के श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया, जो समानता और भाईचारे का अनुपम उदाहरण रहा। साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज ने धर्म, संस्कृति और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर समाज को साहस, त्याग और समानता का संदेश दिया। उनका अमर वचन सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिडिय़न ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं आज भी जन-जन को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। इस समागम में स्त्री सत्संग सभा , हम चाकर गोबिंद के संस्था सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।


