दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 1 नवंबर। छग प्रदेश राइस मिलर एसो. का प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष कैलाश रुंगटा एवं महासचिव प्रमोद अग्रवाल के नेतृत्व में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से सौजन्य भेंट कर उनसे चर्चा की। चर्चा में छग राज्य से 26 लाख मीट्रिक टन उसना चावल का सेंट्रल पुल हेतु उपार्जन किए जाने का निवेदन डॉ. रमन सिंह से किया। साथ ही प्रदेश की राइस मिलों की दशा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में होने वाले आर्थिक एवं राष्ट्रीय नुकसान का विस्तृत ब्यौरा भी उन्हें दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि प्रदेश में उत्पादित होने वाले धान का 60 प्रतिशत मात्रा उसना मीलिंग प्रकृति का होता है, जिसमें ब्रोकन 55 से65 प्रतिशत तक होने से 67 प्रतिशत चावल प्राप्त नहीं किया जा सकता। अत: प्रदेश में 61.65 लाख मीट्रिक टन अरवा चावल का उपार्जन असंभव है। प्रदेश में कुल 40 लाख मीट्रिक टन धान अरवा प्रकृति का होता है। छत्तीसगढ़ राज्य में 500 उसना मिल है। इनमें चार हजार करोड़ का आर्थिक निवेश है, उसना की मिलिंग नहीं होने की दशा में उसना मीलें आर्थिक संकट ने आ जाएगी।
इसी तरह 105 लाख मीट्रिक टन धान की अरवा मिलिंग यदि जबरदस्ती करवाई जाएगी तो प्रदेश की सभी अरवा मीलें भी दिवालिया होने की स्थिति में आ जाएंगी। भा.खा.नि. छग के पास भी गोदाम एवं कर्मचारियों की कमी है। छग से चावल को अन्य राज्यों में भेजने के लिए रेलवे रैक भी बहुत सीमित मात्रा में ही मिल पाती है। चावल का तीव्र गति से मूवमेंट नहीं होने के कारण भी भा.खा. नि. छग में 37.65 लाख टन अरवा चावल को 2 साल में ही ले पाएगा। पूरे धान का अरवा मिलिंग समय पर नहीं होने से लाखों टन धान भंडारण केंद्रों में ही खराब हो जाएगा। जिससे हजारों करोड़ का आर्थिक एवं राष्ट्रीय नुकसान होगा। इन परिस्थितियों से बचने के लिए मिलर, कर्मचारी, श्रमिकों को बेरोजगारी से और चावल उद्योग को बैंक डिफॉल्ट से बचाने के लिए प्रदेश में 26 लाख मैट्रिक टन उसना चावल का उपार्जन अति आवश्यक है। राइस मिलरों की समस्या के समाधान में डॉ. रमन सिंह ने उचित पहल का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल में मुरारी भूतड़ा, कांतिलाल बोथरा, विनीत जैन, मोहन अग्रवाल, रोशन चंद्राकर, योगेश चंद्राकर, दिलीप अग्रवाल, परमानंद जैन शामिल थे।


