दुर्ग
लम्बे इंतजार के बाद भिलाई से रायपुर का सफर होगा आसान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 30 अक्टूबर। अगर सब कुछ सही रहा तो कल से रायपुर के बीच वाहन चालकों को रोज लगने वाले जाम से निजात मिल जाएगी। दुर्ग के कुम्हारी में निर्माणाधीन 800 मीटर लंबा फ्लाई ओवर दो पहिया वाहन चालकों के लिए खोला जा सकता है। जाम को देखते हुए एनएचएआई ने यह निर्णय लिया है। फ्लाई ओवर खुल जाने से सर्विस रोड से 30 हजार से अधिक दो पहिया वाहनों के ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। इससे चार पहिया और भारी वाहन सर्विस रोड से आसानी ने निकल पाएंगे।
गौरतलब हो कि दुर्ग से लेकर रायपुर के बीच नेशनल हाईवे पर चार फ्लाई ओवर बनाए जा रहे हैं। इसके चलते वाहनों को सर्विस रोड से आना-जाना करना पड़ रहा है। सर्विस रोड संकरी होने से और गाडिय़ों का दबाव अधिक होने से यहां दुर्घटना और जाम लगने की समस्या काफी बढ़ गई थी। इसे देखते हुए पीडब्लयूडी के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने 23 सितंबर को यहां का दौरा किया था।
उन्होंने इस दौरान के एनएचएआई अधिकारियों और फ्लाई ओवर का निर्माण कर रही एजेंसी के इंजीनियर्स को जमकर फटकारा था। उस समय अफसरों ने 15 अक्टूबर तक का समय मांगा था और कहा था कि वह दो पहिया वाहन चालकों के लिए फ्लाई ओवर को चालू कर देंगे। इसकी जिम्मेदारी कलेक्टर डॉ. एसएन भूरे को दी गई थी। जब समय से काम पूरा न हुआ तो एनएचएआई के अधिकारियों ने बारिश का बहाना बनाकर कुछ समय और मांगा। कलेक्टर की फटकार के बाद ठेका कंपनी ने कुम्हारी फ्लाई ओवर को दो पहिया वाहन के लायक तैयार कर लिया है और इसे कल से संभवत: खोल दिया जाएगा।
विदित हो कि भिलाई और रायपुर के बीच रोजाना 30-35 हजार दो पहिया वाहन गुजरते हैं। सबसे अधिक संख्या सुबह 9-11 और शाम को 5-7 बजे के बीच रहती है। ऐसा इसलिए कि अधिकतर लोग रायपुर में जॉब करते हैं और भिलाई से आना-जाना करते हैं। इतनी संख्या में एक साथ दो पहिया वाहनों के निकलने से सर्विस रोड में जाम लग जाता था। ऐसे में बाइक चालक को एक से डेढ़ घंटा का समय लगा जाता था। सभी दो पहिया वाहनों को फ्लाई ओवर से गुजार देने से सफर 40 मिनट का हो जाएगा और जाम भी नहीं लगेगा। सुबह और शाम दोपहिया वाहन चालकों को आने जाने की इतनी जल्दी होती है कि जहां से भी उन्हें जगह मिली वो वहीं से घुसकर निकलने की फिराक में रहते हैं।
इससे जाम के साथ साथ दुर्घटनाएं भी होती है। यहां हर दिन 5-6 सडक़ दुर्घटना होना आम बात है। कई बार तो लोगों की जान भी जा चुकी है। ऐसे में दुर्घटना की आशंका 70 फीसदी तक कम हो जाएगी।


