धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 3 जनवरी। छत्तीसगढ़ी संस्कृति में दान पुण्य के पर्व माने जाने वाला छेरछेरा पुन्नी नगर सहित ग्रामीण अंचल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह दरवाजे पर छोटे एवं बड़े लोगों की टोली पारम्परिक गीत गाते हुए अन्नदान करने गुहार लगाने लगे। पहले सभी घरों में छेरछेरा टोली को अन्न के रूप में धान का दान किया जाता था, अब इसमें मुफ्त वाला चांवल,नगद राशि, बिस्कुट और चॉकलेट भी शामिल हो गया हैं।
शनिवार को सुबह से ही बच्चो का झुंड घरों-घर जाकर छेरछेरा मांगते नजर आया। बड़े लोग भी समूह में बाजे गाजे के साथ पहुंचे। कहीं-कहीं पर पुरुषों की टोली लोकगीत एवं डंडा नृत्य करते हुए किसानों से अन्नदान प्राप्त किया। लोक परम्परा के कद्रदान लोगों ने खुशी-खुशी उन्हें धान चावल एवं दूसरी चीजें भेंटकर बिदा किया।
बताया गया कि पौष पूर्णिमा के अवसर पर मनाए जाने वाले इस पर्व में अन्नपूर्णा देवी की पूजा की जाती है। विधायक अजय चन्द्राकर, जनपद अध्यक्ष गितेश्वरी साहू, नपा अध्यक्ष ज्योति भानु चन्द्राकर, उपाध्यक्ष देवव्रत साहू, भखारा नपं अध्यक्ष ज्योति हरख जैन, कांग्रेस जिला अध्यक्ष तारणी-नीलम चन्द्राकर ने अपने घरों में अन्नदान कर नागरिकों को पर्व की बधाई दी।
इन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अन्नदान का महापर्व छेरछेरा नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है।
छेरछेरा उत्सव कृषि प्रधान संस्कृति में दानशीलता की परंपरा को याद दिलाता है।
छेरछेरा मांग कर लौटे युक्ती, भावेश, खुशी, सोनू भुरी आदि बच्चों का कहना था पहले अधिकांश घरों में धान दिया जाता था, लेकिन अब सोसायटी का चावल और चॉकलेट, बिस्कुट जैसी चीजें मिल रही है। जिससे हमें संग्रहण के लिए अलग-अलग व्यवस्था करनी पड़ती है।


