कारोबार
मदर्स डे विशेष
रायपुर, 10 मई। माहेश्वरी युवा मंडल रायपुर के संजय हरनारायण मोहता ने बताया कि मां शब्द सिर्फ कहने में एक अक्षर का हो सकता है, लेकिन कैसे बताऊं मैं,इस एक अक्षर के शब्द में पूरा कुटुंब समाया हुआ है। लोगों के जीवन में सबसे अहम किरदार सिर्फ मां का ही होता है।
श्री मोहता ने बताया कि किसी भी व्यक्ति के इस संसार में आने पर सबसे पहले एक ही शब्द निकलता है मां, मां एक बच्चे के जीवन की अमूल्य धरोहर होती है, मां की ममता वह नींव का पत्थर होती है, जिस पर बच्चों के भविष्य की इमारत खड़ी होती है। बच्चों की जिंदगी का पहला एहसास मां की ममता होती है।
श्री मोहता ने बताया कि जिंदगी की सबसे पहले गुरु मां ही होती है,और हम उनके शिष्य होने के नाते मां को कोई गुरु दक्षिणा भी नहीं दे सकते । क्योंकि मां एक ऐसा कर्ज है जो हम अपनी पूरी जिंदगी की कमाई देकर भी अदा नहीं कर सकते। मां वह होती है, जो मन की बात को कहने से पहले जान ले, जो हमारी आंखों को अपनी आंखों से देखते ही पहचान ले, दर्द हो या खुशी हमारी हर इच्छा, हर हरकत को दूर से ही देखकर जान लेती है।
श्री मोहता ने बताया कि दुनिया में सबसे बेपनाह प्यार मां ही कर सकती है, और वह सिर्फ और सिर्फ हमारे लिए जीती है। हमारी एक खुशी के लिए अपना जीवन निष्छवार कर देती है। मैंने फरिश्तों का नाम सुना था, लेकिन अपनी मां के रूप में देख भी लिया। मां एक सामान्य महिला है, लेकिन उसे अकेली मां के सामने हर कोई असामान्य है।
श्री मोहता ने बताया कि इसका ऋण नहीं चुका सकते, वही मां होती है। इस शब्द की ममता, गहराइयां,और विशालता को कभी भी परिभाषित नहीं किया जा सकता। मां तेरी ममता की तुलना संसार में किसी से नहीं की जा सकती तेरे चरणों में मेरा नमन है मां।


