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नारायणा एमएमआई ने किया जागरूक
रायपुर, 8 मई। डॉ. मुकेश कुमार शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, जनरल मेडिसिन, नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल ने बताया कि कई लोग थैलेसीमिया ट्रेट के कैरियर होते हैं, लेकिन उन्हें इसका पता भी नहीं होता। वे पूरी तरह स्वस्थ दिखते हैं, उनमें कोई लक्षण नहीं होते, और उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि वे यह जीन अपने बच्चों में पहुँचा सकते हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि यही कारण है कि थैलेसीमिया एक खतरनाक स्थिति बन जाती है, क्योंकि इसका जोखिम तब तक सामने नहीं आता जब तक दो कैरियर विवाह करके थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित बच्चे को जन्म नहीं देते। विवाह-पूर्व जांच एक साधारण रक्त परीक्षण के माध्यम से यह पता लगाने में मदद करती है कि व्यक्ति थैलेसीमिया का कैरियर है या नहीं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि यदि दोनों साथी कैरियर पाए जाते हैं, तो वे परिवार शुरू करने से पहले आनुवंशिक जोखिम को समझ सकते हैं। इससे दंपत्ति को चिकित्सकीय सलाह लेने और सोच-समझकर निर्णय लेने का अवसर मिलता है। यह विवाह को रोकने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले अनावश्यक कष्ट को रोकने के लिए है। यदि दोनों साथी कैरियर हों, तो हर गर्भावस्था में 25 प्रतिशत संभावना होती है कि बच्चा थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित होगा।
डॉ. शर्मा ने बताया कि ऐसे बच्चों को जीवनभर नियमित रक्त चढ़ाने, बार-बार अस्पताल जाने और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। इससे परिवार पर भावनात्मक, शारीरिक और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। लेकिन यदि समय रहते कैरियर की पहचान हो जाए, तो इस स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि भारत में लाखों लोग थैलेसीमिया के साइलेंट कैरियर हैं, लेकिन बहुत कम लोग विवाह से पहले इसकी जांच करवाते हैं।


