बेमेतरा

बेमेतरा: हरियाली पर करोड़ों खर्च, विकास कार्यों के नाम पर काटे जा रहे पेड़
04-Jun-2026 3:49 PM
बेमेतरा: हरियाली पर करोड़ों खर्च, विकास कार्यों के नाम पर काटे जा रहे पेड़

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 4 जून। जिले में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से संचालित विभिन्न वृक्षारोपण योजनाओं के क्रियान्वयन और बुनियादी रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत पौधे लगाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पौधों के प्रभावित होने और सडक़ चौड़ीकरण परियोजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामले सामने आए हैं। पिरदा, गोपाल भैना और जिला मुख्यालय का ‘ऑक्सीजोन’ इस स्थिति के प्रमुख उदाहरण हैं।

 10 हजार पेड़ों की कटाई की अनुमति

जिले में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए संचालित विभिन्न सडक़ परियोजनाओं के कारण हरित क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। बेमेतरा-मुंगेली रोड, नवागढ़-नांदघाट रोड और दुर्गा रोड के निर्माण व चौड़ीकरण का कार्य जारी है। इन परियोजनाओं के मार्ग में आने वाले कुल 10 हजार पेड़ों को काटने का आदेश जारी किया जा चुका है।  जारी आदेशों के तहत अकेले नवागढ़ रोड पर अब तक लगभग 5 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं।

विभिन्न योजनाओं की जमीनी हालत

 दुर्ग वन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम गोपाल भैना में वर्ष 2024-25 के दौरान नदी तट योजना के तहत 27 लाख का बजट निर्धारित किया गया था। इसके तहत नींबू, करंज और अर्जुन प्रजाति के 6,000 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था।

 वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार, कई पौधे अभी भी रोपे जाने के बजाय अपनी मूल पॉलिथीन थैलियों में ही खुले में रखे हुए हैं। इस संबंध में जब वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो बेमेतरा प्रभारी के अवकाश पर होने की बात कही गई और अन्य कर्मचारियों ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की।

 बेरला ब्लॉक के ग्राम पिरदा में वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ राज्य विकास निगम लिमिटेड द्वारा 28 एकड़ भूमि पर 11,000 पौधे लगाने का दावा किया गया था। देखरेख और सिंचाई व्यवस्था के अभाव में वर्तमान में वहां 1,000 से भी कम पौधे जीवित बचे हैं। जवाबदेही के प्रश्न पर साजा रेंजर ने स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र और योजना रायपुर मंडल के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आती है।

 जिला मुख्यालय के खिलौने रोड स्थित 11 एकड़ भूमि पर वर्ष 2018-19 में 40 लाख की लागत से ऑक्सीजोन विकसित करने की योजना बनाई गई थी, जिसके तहत 5,400 पौधे रोपे गए थे।

 वर्तमान में उचित रखरखाव और प्रबंधन न होने के कारण यह स्थल अपशिष्ट और गंदगी की समस्या से जूझ रहा है। इस संबंध में वन विभाग के एसडीओ ने कहा कि इस स्थल को स्थानीय निकाय को सौंपा जाना है, जबकि मुख्य नगरपालिका अधिकारी  ने इस विषय में अनभिज्ञता व्यक्त की है।

पौधों का परिपक्व होना आवश्यक — प्रकृति प्रेमी

वृक्षारोपण की वर्तमान नीतियों और रखरखाव पर टिप्पणी करते हुए स्थानीय प्रकृति प्रेमी मोहन वर्मा ने कहा-केवल पौधे लगा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें एक परिपक्व वृक्ष बनने तक निरंतर उनकी देखरेख, सुरक्षा और सिंचाई की व्यवस्था करना असली कार्य है।


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