बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 15 अप्रैल। राम जानकी मंदिर में आयोजित संत सभा में धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ. सौरव निर्वाणी ने गोत्र व्यवस्था और सामाजिक संरचना पर अपने विचार रखे।
डॉ. निर्वाणी ने कहा, एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए सनातन समाज को अपनी मूल पहचान गोत्र व्यवस्था की ओर लौटना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में प्रचलित जाति प्रथा, उनके अनुसार, सनातन धर्म का मूल स्वरूप नहीं है, बल्कि समय के साथ विकसित हुई व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि वैदिक परंपरा में समाज का संगठन गोत्र और वर्ण व्यवस्था के आधार पर होता था, जो उनके अनुसार व्यक्ति के कर्म और गुणों पर आधारित था। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों का संबंध ऋषि परंपराओं से जुड़ा हुआ है, जिसे गोत्र के रूप में जाना जाता है।
डॉ. निर्वाणी ने कहा कि यदि समाज अपने नाम के साथ गोत्र का प्रयोग प्रारंभ करे। तो यह समाज को एक साझा पहचान में जोड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजी शासनकाल के दौरान जनगणना और प्रशासनिक कारणों से जातियों का वर्गीकरण किया गया, जिससे, उनके अनुसार, समाज में स्थायी विभाजन हुआ। उन्होंने लोगों से जाति के स्थान पर गोत्र के उपयोग की अपील की और कहा कि इससे समाज में एकता और आपसी सहयोग की भावना बढ़ सकती है।
इस दौरान नवगढ़ राम जानकी मंदिर के महंत सुरेंद्र दास ने कहा, यदि सम्पूर्ण सनातन समाज इस दिशा में संगठित प्रयास करता है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत पुन: विश्वगुरु के रूप में स्थापित होगा और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सपना साकार होगा।


