बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 14 अप्रैल। धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ. सौरव निर्वाणी ने अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत श्रीराम दास को मनुस्मृति पर आधारित एक व्याख्या भेंट की। यह कार्यक्रम चित्रकूट से पधारे महंत के सम्मान में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर राम जानकी मंदिर के महंत सुरेंद्र दास और डॉ. सौरव निर्वाणी ने मनुस्मृति के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
डॉ. निर्वाणी ने कहा कि मनुस्मृति को वे एक ऐसा ग्रंथ मानते हैं, जो समाज में अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर मार्गदर्शन प्रदान करता है। उनके अनुसार, वर्तमान समय में सामाजिक और नैतिक चुनौतियों के बीच इस प्रकार के ग्रंथों का अध्ययन प्रासंगिक हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मनुस्मृति के सिद्धांतों को समझने और उनके कुछ पहलुओं को अपनाने से समाज में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सकती है।
महंत सुरेंद्र दास ने कहा कि मनुस्मृति में वर्णित सिद्धांतों को यदि वर्तमान संदर्भ में समझा जाए, तो वे समाज में संतुलन और सामंजस्य स्थापित करने में सहायक हो सकते हैं।
डॉ. निर्वाणी ने लोगों से अपील की कि वे इस ग्रंथ को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान भारत का संचालन संविधान के अनुसार होता है, जबकि प्राचीन ग्रंथ सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के संदर्भ में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।


