बेमेतरा

धान खरीदी 6 दिनों में 28 लाख टन खरीदी की चुनौती
22-Jan-2026 4:07 PM
धान खरीदी 6 दिनों में 28 लाख टन खरीदी की चुनौती

बेमेतरा में 97.67 लाख लक्ष्य, अब तक 69 लाख क्विंटल धान की खरीदी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 22 जनवरी। जिले में इस वर्ष खरीदी की प्रक्रिया अपने अंतिम और सबसे कठिन चरण में पहुंच चुकी है। शासन का जिले के लिए निर्धारित 97 लाख 69 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य अब तक एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़ा है।

वर्तमान आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 30 जनवरी की समय सीमा समाप्त होने में मात्र 6 कार्य दिवस शेष बचे हैं, जबकि जिले में अब तक लगभग 69 लाख क्विंटल धान की खरीदी संभव हो पाई है। इसका सीधा अर्थ है कि प्रशासन को शेष अल्प अवधि में करीब 28 लाख टन धान की खरीदी करनी होगी। जिले के 129 केंद्रों पर वर्तमान में जिस रफ्तार से धन लिया जा रहा है वह अधिकतम 20 से 25 हजार क्विंटल प्रतिदिन तक ही सीमित है। यदि खरीदी की यही गति बनी रही तो सीजन के अंत तक जिले में अब 8 लाख टन से अधिक धान की खरीदी का लक्ष्य अधूरा रह सकता है, जिससे न केवल सरकारी रिकॉर्ड प्रभावित होंगे बल्कि बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रहेंगे।

76 फीसदी किसानों की धान खरीदी

पिछले 45 दिनों में जारी खरीदी अभियान के दौरान पंजीकृत किसानों के आंकड़े बताते हैं कि अब तक लगभग 76 फीसदी किसानों से ही धान की खरीदी की जा सकती है। जिले में कुल 1,64,859 किसान पंजीकृत है, जिनमें से एक 1,98,698 छोटे और मध्यम श्रेणी के किसान है। इनमें से 1,23,785 किसानों ने अब तक अपना धान बेच चुके है, लेकिन 34,911 किसान अभी भी केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। इस तरह जिले के 6,161 बड़े किसानों में से 5,384 किसान धान बेच चुके हैं, जबकि 778 बड़े किसानों का ध्यान लिया जाना बाकी है। कुल मिलाकर 35,689 किसानों का ध्यान लेना अभी शेष है। केवल 6 दोनों का समय शेष होने के कारण यह आशंका गहराती जा रही है। प्रशासन की धीमी कार्य प्रणाली और संसाधनों की कमी की वजह से ये किसान इस वर्ष अपने हक की राशि पाने से चूक सकते हैं।

30 जनवरी तक के लिए जारी किए गए टोकन की सूची पर नजर डालें तो प्रशासन में भारी भरकम लक्ष्य तय किया है। 22 जनवरी को 19,240 टन, 23 जनवरी को 19,397 टन , 27 जनवरी को 18607 टन, 28 जनवरी को 18,190 टन ,29 जनवरी को 33,07 टन और अंतिम दिन 30 जनवरी को 18,232 टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। कुल मिलाकर लगभग 1,26,674 टन धान के लिए टोकन जारी किए जा चुके हैं। रिकार्ड बताते हैं कि जिले में अब तक अपने कुल लक्ष्य का 70.88 फीसदी यानी 6,92,185.71 टन धान खरीदा है।

किसानों को टोकन कटवाने दर-दर भटकना पड़ रहा है। वह रात को जाकर अपनी बारी का इंतजार करने मजबूर है। हजारों किसानों का कहना है कि वह टोकन के लिए बार-बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन उन्हें इस पर जानकारी नहीं मिल पा रही है। किसान सुबह 5 बजे ही ट्रैक्टर लेकर केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन वहा अबव्यवस्था ही दिखाई दे रही है। जिन किसानों के पास टोकन है उन्हें भी डर सता रहा है। लक्ष्य के करीब 29.12 फीसदी पीछे होने के बावजूद प्रशासन यह मानकर चल रहा है कि टोकन आधारित खरीदी से स्थिति संभल जाएगी। हालांकि जानकारों का कहना है कि बिना प्रभावी उठाव और अतिरिक्त श्रम शक्ति के इतने बड़े अंतर को महज 6 दिनों में पाट  पाना लगभग असंभव है।

 

जिले के 129 धान खरीद केंद्रों पर इस समय सबसे बड़ी गंभीर समस्या धान के उठाव का ठप होना है। केंद्रों पर भंडारण क्षमता से कहीं अधिक धान जमा हो चुका है। जिसके कारण नई धान को रखने के लिए जगह नहीं बची है। 50 से अधिक केंद्र ऐसे हैं जहां धान की बोरियों के ऊंचे पहाड़ जैसे खड़े हो गए हैं, और फड़ पूरी तरह भर चुके हैं। स्थिति यह है कि जब तक कोई वाहन वहा से धान लेकर निकलता नहीं तब तक दूसरे किसानों का वाहन अंदर प्रवेश नहीं कर पाता। इस वजह से मुख्य सडक़ों पर घंटे जाम लगा रहता है। दूसरी ओर शासन की ओर से अब नए निर्देश जारी किए गए हैं कि सोमवार से खरीदे जाने वाले धान का अलग से स्टेट किया जाए और उसकी गणना अलग टीम की ओर से की जाएगी। नए रैंक बनाने और पुराने उपज का उठाव न होने के कारण केंद्रों के प्रबंधकों के सामने दोहरा संकट पैदा हो गया है, जिससे खरीदी प्रक्रिया की गति और धीमी हो गई है।

नोडल अधिकारी आरके वारे में कहा कि इस बार अनुमानित लक्ष्य से कम खरीदी होगी। कम बारिश की वजह से उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिसका असर धान खरीदी में पड़ा है। अनुमान है कि 85 लाख क्विंटल धान खरीदा जा सकेगा।


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