बस्तर

चित्रकोट महोत्सव: समापन संध्या पर बिखरे बस्तर की लोक संस्कृति के रंग
20-Feb-2026 4:18 PM
चित्रकोट महोत्सव: समापन संध्या पर बिखरे बस्तर की लोक संस्कृति के रंग

सुपरस्टार अनुज शर्मा की प्रस्तुति ने बांधा समा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 20 फरवरी। विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के मनोरम तट पर आयोजित ‘चित्रकोट महोत्सव 2026’ का गुरुवार को भव्य और रंगारंग समापन हुआ।

महोत्सव के अंतिम दिन की शुरुआत स्कूली छात्र-छात्राओं की ऊर्जावान प्रस्तुतियों के साथ हुई, जिसमें माध्यमिक विद्यालय पदरगुड़ा, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय लोहण्डीगुड़ा, एकलव्य आदर्श विद्यालय गढिय़ा, पीएम आश्रम शाला बड़े गुमियापाल और कन्या आश्रम अलनार की छात्राओं ने अपनी कला का प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात बस्तर की आदिम संस्कृति की झलक तब देखने को मिली जब दरभा के नर्तकों ने धुरवा नृत्य, किलेपाल के नर्तकों ने पारंपरिक गौरसिंह नृत्य और लामकेर के नर्तकों ने प्रसिद्ध गेड़ी नृत्य के दलों ने अपनी थाप पर पूरे पंडाल को थिरकने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही मनोज नाग और साथियों ने जनजातीय गीत एवं नृत्य की इस अविस्मरणीय प्रस्तुति ने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

इसके साथ ही यहां शास्त्रीय और लोक कला का एक अनूठा संगम देखने को भी मिला, जहाँ ओडिसी डांस ग्रुप की लयबद्धता और नीरज एवं तमन्ना के कथक नृत्य ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। वहीं मोहम्मद अनस के पियानो वादन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुमधुर लहरियों से वातावरण को बेहद सुकूनदेह बना दिया। बस्तर अंचल के लोक रंग ग्रुप और आनन्दिता तिवारी व जोबिता विश्वास की प्रस्तुतियों ने स्थानीय कला की गहराई को प्रदर्शित किया, जबकि कोंडागांव के ‘रंग पुरैया’ दल ने अपनी विशिष्ट शैली से सबका ध्यान खींचा।

 

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण और समापन संध्या की जान रहे छत्तीसगढ़ी फिल्मों के सुपरस्टार और धरसींवा विधायक अनुज शर्मा।

एक मंझे हुए कलाकार के रूप में मंच संभालते ही उन्होंने अपनी जादुई आवाज और चिरपरिचित अंदाज से युवाओं और बुजुर्गों, सभी का दिल जीत लिया। उनके गीतों पर दर्शक दीर्घा में बैठा हर व्यक्ति झूम उठा।

 समापन समारोह के दौरान मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों ने बस्तर की इस गौरवशाली परंपरा को सहेजने और पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

 देर रात तक चली इस सांस्कृतिक महफिल ने चित्रकोट की दूधिया रोशनी और कल-कल बहते जलप्रपात के साथ मिलकर एक ऐसी याद संजोई, जिसे पर्यटक लंबे समय तक अपने जेहन में रखेंगे।


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