बस्तर
बच्चों ने रैली निकाल दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 20 फरवरी। बस्तर की कला, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के विश्व प्रसिद्ध केंद्र चित्रकोट महोत्सव में आज आस्था और उल्लास के साथ-साथ स्वच्छता की एक नई इबारत लिखी गई। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तत्वावधान में आयोजित विशेष स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम ने महोत्सव की चमक को दोगुना कर दिया। दिन की शुरुआत एक ऊर्जावान जागरूकता रैली के साथ हुई, जिसमें स्कूली बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों ने कदम से कदम मिलाकर पूरे क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त बस्तर के नारों से गुंजायमान कर दिया। हाथों में तख्तियां लिए इन बच्चों ने न केवल पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचा, बल्कि हर नागरिक को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास भी कराया।
महोत्सव में आकर्षण का मुख्य केंद्र प्लास्टिक लाओ-थैला पाओ अभियान रहा, जिसने स्वच्छता को एक प्रोत्साहन का रूप दे दिया। मेले में आए नागरिकों ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक एकत्र कर जमा किया और उसके बदले गर्व के साथ कपड़े व जूट के थैले प्राप्त किए। थैला वितरण के इस कार्यक्रम ने आमजन को यह संदेश दिया कि प्लास्टिक का विकल्प न केवल सुलभ है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। इसी कड़ी में सार्वजनिक और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर लगाए गए स्वच्छता बोर्डों के माध्यम से प्रचार-प्रसार को गति दी गई, ताकि दूर-दराज से आए सैलानी बस्तर की पावन धरा को साफ-सुथरा रखने में अपना योगदान दे सकें। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए शुभंकर के माध्यम से कचरा पृथक्करण की बारीकियाँ साझा की गईं। ग्रामीणों को बड़े ही सरल ढंग से समझाया गया कि कैसे रसोई के गीले कचरे और प्लास्टिक-कागज जैसे सूखे कचरे को अलग-अलग रखकर हम कचरे का सही प्रबंधन कर सकते हैं। गीले कचरे से खाद बनाने और सूखे कचरे के पुनर्चक्रण की इस जानकारी ने उपस्थित सभी लोगों को कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक बनाया।


