बस्तर

चित्रकोट महोत्सव: बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक कला के संगम से गूंज उठा ‘नियाग्रा’ का तट
19-Feb-2026 3:35 PM
चित्रकोट महोत्सव: बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक कला के संगम से गूंज उठा ‘नियाग्रा’ का तट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 19 फरवरी। विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के समीप मेला स्थल में बुधवार को  ‘चित्रकोट महोत्सव 2026 ’ का शानदार आगाज़ हुआ, जहाँ बस्तर की माटी की सोंधी खुशबू और लोक कलाओं के विविध रंगों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

चित्रकोट महोत्सव 2026 के शुभारंभ के अवसर पर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत के साथ विकास की दिशा में सरकार प्रयास किया जा रहा है। सरकार द्वारा सांस्कृतिक, कला और खेल गतिविधि के माध्यम पर्यटन स्थल में चित्रकोट महोत्सव को बढ़ावा दिया जा रहा है । विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष दिनेश कश्यप ने भी संबोधित करते हुए चित्रकोट महोत्सव एक सांस्कृतिक महोत्सव के लिए समृद्ध जनजाति संस्कृति का प्रतीक है। शासन द्वारा आयोजित इस समारोह में दो दिवसीय महोत्सव में खेलगतिविधि, कला संस्कृति, पर्यटन को बढ़ाने का प्रयास है।

जिला पंचायत  उपाध्यक्ष  बलदेव मंडावी, नगर पालिक निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, जनपदों के अध्यक्ष, सदस्य, अन्य जनप्रतिनिधि, सहित आईजी सुंदरराज पी., सीसीएफ आलोक तिवारी, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, वन मंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे ।

महोत्सव के प्रथम दिन की शुरुआत स्थानीय स्कूली छात्र-छात्राओं की ऊर्जावान प्रस्तुतियों के साथ हुई। सेजेस अलनार और अंग्रेजी माध्यम स्कूल धाराउर के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास गढिय़ा और चित्रकोट सहित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं ने लोक संस्कृति पर आधारित नृत्यों से कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। स्कूली कलाकारों की इन प्रस्तुतियों ने मंच पर एक ऐसी जीवंतता पैदा की, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। अतिथियों ने स्कूली बच्चों को प्रशस्ति पत्र देकर प्रोत्साहित किया ।

जैसे-जैसे शाम ढलती गई, महोत्सव का मंच बस्तर की पारंपरिक पहचान और जनजातीय गौरव का गवाह बना। आंजर के कलाकारों ने जब अपने पारंपरिक  ‘गौर नृत्य’ और लोहण्डीगुड़ा के कलाकारों ने ‘परब नृत्य’ की प्रस्तुति दी, तो पूरा परिसर तालियों की गडग़ड़ाहट से गूँज उठा। इसके पश्चात तोकापाल के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘ककसाड़ नृत्य’ और बकावण्ड के ‘नाट परब’ ने दर्शकों को बस्तर की प्राचीन परंपराओं और लोक गाथाओं से रूबरू कराया। इन नृत्यों में छिपी ऊर्जा और लयबद्धता ने यह सिद्ध कर दिया कि बस्तर की लोक कला आज भी अपनी जड़ों से पूरी मजबूती के साथ जुड़ी हुई है।

सांस्कृतिक संध्या का आकर्षण तब और बढ़ गया जब शास्त्रीय और आधुनिक कला का अनूठा संगम मंच पर दिखाई दिया। जेनिसा देवांगन और निधि रावल के सुरीले गायन के बाद धुर्विका शर्मा, गीतिका चक्रधर और समृद्धि शर्मा ने अपने सधे हुए  ‘कथक नृत्य ’ से मंच पर एक शास्त्रीय गरिमा बिखेरी। स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के क्रम में  ‘बस्तर विट्स म्यूजिकल ग्रुप ’ और वंदना पॉल की प्रस्तुतियों ने संगीत प्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। विशेष रूप से लोक कला मंच  ‘चिरैया ’ कोंडागांव की वृहद प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ी लोक विधाओं का ऐसा ताना-बाना बुना कि दर्शक अपनी सीटों से बंधे रहे।

कार्यक्रम का समापन  ‘लाइव बैंड जुनूनियत ’ की धमाकेदार परफॉरमेंस के साथ हुआ, जिसने युवा दर्शकों के बीच जबरदस्त जोश भर दिया। आधुनिक वाद्ययंत्रों की धुन और लोक धुनों के इस फ्यूजन ने महोत्सव की पहली शाम को एक यादगार मोड़ पर लाकर खड़ा किया। प्रशासन द्वारा की गई चाक-चौबंद व्यवस्था और स्थानीय कलाकारों के इस महाकुंभ ने चित्रकोट महोत्सव को न केवल एक आयोजन, बल्कि बस्तर की अस्मिता के उत्सव के रूप में स्थापित कर दिया है।


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