बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 30 दिसंबर। बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के अंतर्गत मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत तोकापाल में नल-जल योजना बीते चार दिनों से पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। पानी की आपूर्ति बंद होने से गांव में भीषण जलसंकट उत्पन्न हो गया है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों, कर्मचारियों और स्कूली बच्चों को दैनिक कार्यों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पेयजल संकट के चलते ग्रामीण मजबूरी में नदी, नाले और तालाबों का दूषित पानी उपयोग करने को विवश हैं। यह पानी पीने योग्य नहीं होने के बावजूद इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे खासकर बच्चों में पीलिया, मलेरिया, निमोनिया, बुखार जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक-दो दिन में जलापूर्ति बहाल नहीं हुई, तो गांव में बीमारी फैलने की पूरी आशंका है।
पानी की कमी के कारण कई घरों में आपसी विवाद की स्थिति बन रही है। महिलाएं दूर-दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। कई कर्मचारी समय पर ड्यूटी नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहीं बच्चों को स्कूल भेजना भी मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि जंगली जानवर भी पानी की तलाश में गांव के आसपास भटकते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत को जल संकट की पूरी जानकारी होने के बावजूद सरपंच द्वारा न तो वैकल्पिक हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई और न ही टैंकर की व्यवस्था की गई। चार दिनों से गांव बिना पानी के है, फिर भी पंचायत की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इस संबंध में जब ग्राम पंचायत तोकापाल के सरपंच लख्मी कश्यप से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि नल-जल योजना की मोटर जल गई है, जिसे मरम्मत के लिए भेजा गया है और दो-तीन दिन लग सकते हैं। टैंकर व्यवस्था को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मोटर जल्द बन जाएगी, इसलिए टैंकर की आवश्यकता नहीं समझी गई।
सरपंच के इस जवाब से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। महिलाओं और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे खाली बर्तन लेकर जनपद पंचायत सीईओ कार्यालय पहुंचकर एसडीएम एवं तहसीलदार को ज्ञापन सौंपेंगे।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि या जिम्मेदार अधिकारी ने इस गंभीर समस्या का संज्ञान नहीं लिया है, जिससे जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है। लोगों का कहना है कि पंचायत की लापरवाही का जवाब आने वाले चुनावों में दिया जाएगा।
बच्चों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा
पानी की किल्लत के चलते बच्चे नदी-नालों और तालाबों में नहाने तथा वहीं का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो गांव के बच्चों को गंभीर बीमारियां घेर सकती हैं।


