बस्तर

मांगों को लेकर स्टाफ नर्स ने खोला मोर्चा, ज्ञापन
16-Dec-2025 10:19 PM
मांगों को लेकर स्टाफ नर्स ने खोला मोर्चा, ज्ञापन

कहा मांग पूरी नहीं होने पर उतरेंगे सडक़ पर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 16 दिसंबर। मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में पदस्थ नियमित स्टाफ नर्सों ने मंगलवार को अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करने उतर पड़े। अपनी मांगों के पूरा नहीं होने पर सडक़ की लड़ाई लडऩे की बात कहते हुए कहा-एमपी की तर्ज पर समान वेतन दिया जाए।

 मेडिकल कालेज डिमरापाल में कई वर्षों से नियमित स्टाफ नर्सों ने मंगलवार को डीन कार्यालय के बाहर अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सडक़ पर आ गए।

स्टाफ नर्स जयंती पाटकर ने बताया कि यहां पर स्टाफ की काफी कमी है, मेकाज में नियमित स्टाफ नर्स के कई पद खाली होने के बाद भी यहां पर भर्ती नहीं किया जा रहा है, जिसकी वजह से 650 बिस्तरों वाले इस हॉस्पिटल में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले एक वार्ड में 30 मरीजों को रखा जाता था, लेकिन उन वार्डों में भर्ती मरीजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 40 से ऊपर कर दिया गया है, वहीं एक अकेले स्टाफ नर्स को इन सभी मरीजों को देखना पड़ रहा है, इसके अलावा यहां पर बहुत सारी स्टाफ नर्स संविदा व दैनिक वेतन भोगी के रूप में कई वर्षों से काम कर रही हैं, ऐसे में इन स्टाफ को ही नियमित करते हुए और स्टाफ की भर्ती की जाए। रात के समय एक अकेले स्टाफ नर्स पर काम का बोझ काफी बढ़ जाता है, चिकित्सक अलग से मरीजों का उपचार बताते हंै, दिन में अलग, ऐसे में एक अकेले स्टाफ नर्स इन सभी को कैसे कर सकती हैं?

वहीं अन्य स्टाफ ने बताया कि मांगों में स्टाफ नर्स का ग्रेड पे 4800, नर्सिंग सिस्टर का 5400, सहायक नर्सिंग अधीक्षक का 6600, उप नर्सिंग अधीक्षक का 7600, नर्सिंग अधीक्षक का 8600 किया जाए, शासन द्वारा 2018 में गठित कमेटी की अनुशंसा कर संशोधन किया जाए, मेकाज में खाली पड़े पदों में जल्द से जल्द भर्ती किया जाए, जो लंबे समय से काम कर रहे है उन्हें ही नियमित किया जाए, मध्यप्रदेश की तरह यहां पर भी समान वेतन, समान सम्यवान दिया जाए,  सबसे बड़ी समस्या है कि यहां पर बाहर से आने वाले ग्रामीणों को शौचालय की काफी कमी देखने को मिलती है, कैम्पस के अंदर खाली जमीन को उपयोग करते हुए ग्रामीणों के लिए सुलभ शौचालय की व्यवस्था कि जाए, वही यहां कार्यरत कई स्टाफ नर्स के छोटे छोटे बच्चो को लाना पड़ता है, उनके लिए यहां एक झूला घर खोला जाए, केवल वादे पर वादे किए जा रहे है।

 लेकिन अब तक किसी तरह का कोई भी निर्णय नही लिया गया है, देखा जाए तो यहां करीब 100 के ऊपर नियमित स्टाफ नही है, ऐसे में जल्द से जल्द भर्ती किया जाए, नहीं तो आने वाले समय में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जवाबदारी छत्तीसगढ़ सरकार की होगी।


अन्य पोस्ट